नगर परिषद से पालिका, पालिका से निगम और निगम से फिर नगर परिषद तक का सफर तय करने के बावजूद अंबाला नगर निगम में साल दर साल प्रॉपर्टी टैक्स जमा नहीं करवाने वाले डिफाल्टरों की तादात में तेजी से इजाफा हो रहा है। हालात यह हैं कि निगम के गठन से लेकर अब तक ट्विन सिटीवासियों पर 38 करोड़ 24 लाख 92 हजार 998 रुपये का प्रापर्टी टैक्स बकाया है। अधिकारी आज तक रिकवरी करने में पूरी तरह नाकाम रहे हैं। 8 साल में एक भी वर्ष ऐसा नहीं रहा जब 60-70 फीसद से ज्यादा रिकवरी हुई हो। यही कारण है कि हर साल डिफाल्टर लिस्ट लंबी होने से सरकारी खजाना बिल्कुल खाली हो चुका है। मसलन हालात यह हैं कि खुद नगर निगम और परिषद के कर्मचारियों को वेतन देने के लिए भी बजट नहीं है। यही कारण है कि निगम में कार्यरत कर्मचारियों को अक्टूबर का वेतन अभी तक नहीं मिला और अब नवंबर भी खत्म होने को है। आचार संहिता से एक माह पहले निगम के तत्कालीन आयुक्त ने प्रापर्टी टैक्स डिफाल्टरों और ऐसे लोग जिन्होंने टैक्स जमा नहीं करवाया उनके घर टीमें भेजकर दिक्कतें पूछने की योजना बनाने का दावा किया था ताकि जो वास्तव में गलत बिलों से परेशान हैं उनकी समस्या का समाधान कर रिकवरी हो सके लेकिन निगम का यह दावा आज तक हकीकत में तब्दील नहीं हो सका। इतना ही नहीं रिकवरी कम होने पर आज तक कर्मचारियों पर भी शिकंजा नहीं कसा गया।
1.20 लाख लोगों से वसूला जाता है टैक्स
आंकड़ों की बात करें तो ट्विन सिटी में 1.20 लाख लोगों से प्रापर्टी टैक्स वसूला जाता है। 2019-20 में पिछला एरियर मिलाकर करीब 17 करोड़ का टैक्स प्रस्तावित किया गया था लेकिन अभी तक 4.87 करोड़ की ही रिकवरी हो पाई है। 2018-19 में करीब 60 हजार लोगों ने टैक्स जमा करवाया था यानी 60 हजार ने जमा नहीं करवाया। इनमें से करीब 30 प्रतिशत ऐसे लोग हैं जो निगम की डिफाल्टर सूची में शामिल हैं जिन्होंने कई साल से निगम को फूटी कौड़ी नहीं दी।
इसलिए नहीं हो रही रिकवरी, क्यों पब्लिक नहीं दे रही टैक्स
दरअसल नगर निगम के प्रापर्टी टैक्स का पिछले 8 साल से ऑडिट ही नहीं करवाया। लोगों के घर मनमर्जी से बिल भेजे जा रहे हैं। स्थिति यह है कि रिहायशी एरिया में कमर्शियल बिल थमा जा रहे हैं। लोग ठीक करवाने के लिए एक-दो बार आते हैं सुनवाई नहीं होती तो उसके बाद वह टैक्स जमा करवाना ही लाजमी नहीं समझते।
बदल जाते हैं निगम आयुक्त
नगर निगम के 5 साल के कार्यकाल में 16 आयुक्त बदले यानि एक साल में औसतन अंबाला नगर निगम में 3 नए आयुक्त। यानी हर चार महीने बाद अंबाला से निगम आयुक्तों का तबादला। ऐसे में जो भी निगम आयुक्त आकर रिकवरी की योजना बनाता है वह सिरे ही नहीं चढ़ पाती उससे पहले वह बदल जाता है।
31 दिसंबर तक 2010 से अब तक के ब्याज में छूट
नगर निगम प्रापर्टी टैक्स धारक चाहे वह डिफाल्टर ही क्यों न हों यदि 31 दिसंबर तक अपना पिछला सारा टैक्स चुकता करते हैं तो ब्याज नहीं लगेगा। इसके अतिरक्त वर्तमान में जो प्रॉपर्टी टैक्स बिल भेजा गया है उसका भुगतान इस अवधि तक करने पर पूरे बिल में 10 प्रतिशत राशि माफ होगी।
डिफाल्टरों को नोटिस हम पहले भी दे चुके हैं और अब भी दोबारा नोटिस भेजने का काम शुरू कर दिया गया है। इसके बाद भी यदि वह टैक्स नहीं भरेंगे तो नियमानुसार सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. सुशील कुमार, निगम आयुक्त।