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घट रही प्रतिरोधक क्षमता, बेअसर हो रही एंटीबायोटिक दवाएं

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घट बढ़ती बीमारियों में अब एंटीबायोटिक दवाएं भी बेअसर होने लगी हैं, 1928 में बनी एंटीबायोटिक पेनिसिलिन कई गंभीर संक्रामक बीमारियों को ठीक करने में कारगर साबित होती थी। लेकिन अब इसका असर बहुत कम दिख रहा है। इसका कारण है, मरीज के शरीर की घट रही प्रतिरोधक क्षमता है। एंटीबायोटिक दवाइयों को लेकर अंबाला शहर जिला नागरिक अस्पताल के पीएमओ कार्यालय में मंथन के दौरान बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर शुुभ ज्योति ने यह बात कही।
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दवाइयों के साल्ट को भोजन बनाने लगे हैं बैक्टीरिया
जहां एंटीबायोटिक दवाई को लेने से मरीज कुछ ही समय में संक्रामक बीमारियों से ठीक हो जाता था, वहीं अब बैक्टीरिया भी इतने ताकतवर हो गए हैं कि दवाइयों के साल्ट को ही अपना भोजन बना देते हैं, इस कारण मरीज को ठीक होने में समय लग रहा है।
असर कम होने के ये कारण
डा. शुभज्योति ने बताया कि एंटीबायोटिक दवा का असर कम होने का सबसे बड़ा कारण खान-पान सही न होना, अस्वस्थ होने पर पूरा इलाज न करना, झोलाझाप डाक्टरों से व कैमिस्ट से बिना डाक्टर की सलाह के दवाई का सेवन करना, कपनियां द्वारा मुनाफा खोरी के चक्कर में बिना पूरी जांच किए दवाइयों को बजार में उतारना। अन्य कई कारण हैं जो दवाइयों को शरीर में जाकर बेअसर कर रही हैं और शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कम हो रही है।
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अमेरिका की तर्ज पर होना चाहिए सिस्टम
डाक्टर ने कहा कि अमेरिका की तर्ज पर डाक्टर के लिखने के बाद भी केवल तीन दिन की दवाई देने का सिस्टम चलाना चाहिए व बिना डाक्टर की पर्ची पर लिखे हुए पेरासिटामोल के अलावा कोई दवाई केमिस्ट को भी मरीज को नहीं देनी चाहिए, इससे मरीज कम से कम दवाई का सेवन करेगा और उन दवाइयों की शरीर को आदत भी नहीं होगी।
10 साल लगते हैं एक दवाई को बाजार में उतारने के लिए
बैठक में बताया कि एक दवाई को बाजार में उतारने के लिए कम से कम 10 साल का समय लगता है। इस बीच कंपनी पहले दवाई का निर्माण करती है, उसके बाद दवाई का जानवरों पर प्रभाव देखा जाता है, उसके बाद इंसान पर भी उस दवाई का टेस्ट किया जाता है और सभी प्रकार के चरणों से जब दवाई का सही असर होता है तो उसे मार्केट में व डाक्टरों के पास भेजा जाता है। लेकिन मुनाफा खोरी के चक्कर में आजकल कंपनियां बिना टेस्ट के दवाइयों को बाजार में उतार रही है और झोलाझाप डाक्टर उन दवाइयों से मुनाफा कमाने के चक्कर में बिना डाक्टर की सलाह के मरीज को दे देते हैं, इससे शरीर पर असरदार दवाइयों का असर भी खत्म हो जाता है।
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