अंबाला। हरियाणा का सबसे पुराना शहर और अंग्रेजों की छावनी रहा अंबाला कैंट विधानसभा क्षेत्र में इस समय सियासी पारा चढ़ा हुआ है। यहां सियासी का माहौल निश्चित तौर पर सूबे की राजनीति पर छाप छोड़ेगा। मौजूदा समय में भी चुनावी माहौल गर्म है। कांग्रेस के टिकट की घोषणा होने के बाद यहां पर त्रिकोणीय समीकरण हैं।
एक तरफ छह बार के विधायक और पूर्व गृह और स्वास्थ्य मंत्री रहे अनिल विज हैं तो दूसरी ओर कांग्रेस से पूर्व पार्षद परविंद्र सिंह परी मैदान में हैं। इसके साथ कांग्रेस से बगावत कर निर्दलीय नामांकन भरने वाली चित्रा सरवारा छावनी से मैदान में है। कांग्रेस में यह फूट फिर से कांग्रेस को नुकसान पहुंचा सकती है। उधर विज जहां विकास कार्यों का मुद्दा लेकर मैदान में हैं, तो विपक्षी भी विकास में कमियों और उससे लोगों को परेशानी का मुद्दा भुनाने की फिराक में हैं।
स्थानीय मुद्दों की बात करें तो बड़ी परियोजनाएं जरूर अंबाला कैंट में आईं हों मगर लोगों की मूलभूत सुविधाओं में अभी भी कोताही दिखाई देती है। अंबाला छावनी में पुरानी अनाज मंडी के पास के बाजार, जिसमें गुड़ बाजार, दाल बाजार, पंसारी बाजार आदि में पुरानी दुकानें हैं। स्थानीय व्यापारियों में सुशील गोयल बताते हैं कि अंबाला में स्वास्थ्य, परिवहन आदि पर काफी काम हुआ है मगर उनके बाजार में जलभराव की समस्या अभी तक है। यहां मौजूद अन्य व्यापारियों का भी कहना है कि यहां से सड़क सीधे भाजपा कार्यालय तक जाती है मगर यह सड़क आज तक क्षतिग्रस्त पड़ी हुई है। बारिश के दिनों में पानी भर जाता है और उनकी दुकानों में पानी भरने से सामान का इस साल भी नुकसान हुआ है। यहां शौचालय की हालत भी बहुत खराब है। नालों की लंबे समय से सफाई तक नहीं हुई है।
इसी प्रकार गुड़ बाजार में दुकान करने वाले लक्ष्मी नारायण खन्ना बताते हैं कि लोग आज भी सड़क, पानी जैसी समस्याओं में फंसे हुए हैं। असल में अंबाला कैंट में जो विकास हुए हैं इतने विकास कार्य कभी नहीं हुए। यह बात जरूर है कि रुपये तो खूब आए मगर स्थानीय अधिकारियों ने इनका सही इस्तेमाल नहीं किया। परियोजनाओं को लटकाया और उलझाने का काम किया जबकि जनप्रतिनिधियों ने उन्हें खुलकर काम करने के निर्देश दिए थे।
इस बार अंबाला कैंट के लोग अटके विकास कार्यों को पूरा करने के लिए वोट देंगे। वहीं सदर बाजार के व्यापारियों का कहना है कि यहां अनावश्यक रूप से नगर परिषद ने सड़कें बार-बार तोड़ी और बनाईं, जिससे उनका नुकसान हुआ। यहां सीवरेज लाइन डलने से अब जलभराव की स्थिति नहीं पैदा होती है।
इसी प्रकार कबाड़ी बाजार के स्थानीय निवासी बताते हैं कि यहां पर अधिकांश बाद कांग्रेस और कांग्रेस से बागी हुए प्रत्याशी चुनावी मैदान में कूद जाते हैं जिससे विपक्ष यहां लंबे समय से पनप ही नहीं पाया है। इसी का फायदा सत्ता पक्ष को मिलता है। इस बार भी ऐसा ही हो रहा है।
उल्लेखनीय है कि चित्रा सरवारा ने पिछले चुनाव में भी कांग्रेस छोड़कर छावनी सीट से आजादी प्रत्याशी के रूप में दम भरा था। वे छावनी से दूसरे स्थान पर रही थीं। भाजपा से अनिल विज सातवीं बार चुनावी मैदान में हैं और विकास कार्यों का दम भर रहे हैं। विपक्ष में परविंदर सिंह परी और चित्रा सरवारा को उम्मीद है कि सत्ता विरोधी माहौल उनके विधानसभा तक पहुंचने की राह आसान करेगा। इसके साथ ही इनेलाे-बसपा के गठबंधन से प्रत्याशी ओंकार सिंह अपना चुनावी गणित लगाकर प्रतिद्वंद्वियों का समीकरण बिगाड़ने में जुटे हैं।
जलभराव की समस्या सुनने वाले सभी, करने वाला कोई नहीं
एक साल पहले जुलाई माह में अंबाला छावनी के टांगरी नदी के पास बनी कॉलोनियों में बाढ़ का पानी घुस गया था। जिससे स्थानीय निवासियों व साइंस कारोबारियों का काफी नुकसान हुआ। एक तो इनके नुकसान की भरपाई न होने से काफी नाराजगी है। टांगरी नदी के पास बनी न्यू टैगोर गार्डन के निवासियों का कहना है कि उनके यहां तो हाल ही में फिर से पानी आ गया। इस समस्या को सुनने तो हर कोई आ जाता है मगर कोई स्थाई समाधान नहीं दे पा रहा है। यही हाल आसपास की कॉलोनियों का है। अधिकारी छोटा मोटा काम करा देते हैं मगर नदी का पानी फिर से उनकी बेचैनी बढ़ा देता है। स्थानीय निवासी रामेश्वर ने बताया कि इस बार उसी को वोट देंगे तो टांगरी नदी की समस्या का स्थाई समाधान देगा। इसके साथ ही जीटी बेल्ट से सटा होने के बावजूद छावनी में साइंस उद्योगों के लिए कुछ खास नहीं हो पाया। कारोबारियों के फार्म भरवा लिए गए मगर उन्हें पता नहीं किसी को एक रुपया भी मिला हो।
ये प्रत्याशी भी मैदान में
आम आदमी पार्टी से राजविंदर कौर, जननायक जनता पार्टी से अवतार सिंह, युगा थुलासी पार्टी से नवीन कुमार, निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में जसविंदर, सुधीर कुमार, रामसिंह, सुनील वर्मा, नवीन बिदला और धर्मेश सूद मैदान में हैं।
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विकास की झड़ी लगाई, मजबूती से बात उठाई : विज
भाजपा प्रत्याशी अनिल विज का कहना है कि अंबाला में सबसे अधिक विकास कराया है। स्वास्थ्य सेवाएं, सड़कें, सीवरेज को सुधारा। शहीद स्मारक जैसी परियोजना अंबाला छावनी को सबसे अलग दर्शाएगी। इसके साथ ही सरकार में भी मजबूती से हलके की बात उठाई है। छावनी में घरेलू सिविल एनक्लेव का काम भी लगभग पूरा हो चुका है। आने वाले समय में यह सभी कार्य अंबाला की शोभा बढ़ाएंगे।
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लोगों को नहीं मिला विकास का लाभ : परविंदर
कांग्रेस प्रत्याशी परविंदर सिंह परी का कहना है कि जनता भाजपा के पिछले 10 सालों का रिपोर्ट कार्ड देख चुकी है। इसलिए वह भाजपा को सत्ता से बाहर करने के लिए बेताब है। छावनी में एक ही सड़क तीन-तीन बार तोड़ी जा रही है फिर बनाई जा रही है। यहां पर धन की काफी बर्बादी हुई है। लोगों के पास असल लाभ नहीं पहुंच पाया है।
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जलनिकासी नहीं होने से पिछड़ी छावनी : चित्रा
निर्दलीय प्रत्याशी चित्रा सरवारा ने कहा कि छावनी में पानी की निकासी आज तक विधायक नहीं करा पाए। छावनी में करोड़ों रुपये लगाने का दावा किया जा रहा है मगर जलभराव की समस्या से क्षेत्र पिछड़ गया है। एक ओर तो छावनी की साज सज्जा के नाम पर करोड़ों रुपये बर्बाद किया है दूसरी ओर मुख्य समस्या निकासी, सीवर, ड्रेनेज के लिए कोई मास्टर प्लान नहीं बनाया। छावनी में कार्यों को तोड़ने और बनाने में जमकर भ्रष्टाचार चल रहा है।