अंबाला सिटी। रवालों गांव स्थित गुरुद्वारा श्री हुकुमसर साहिब में सोमवार को बाबा विधिचंद चक्रवर्ती दल पहुंच गया। गुरुद्वारा साहिब में श्री गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर्व को समर्पित महान धार्मिक गुरमति समागम हो रहा है। यह समागम गुरुद्वारा हुकुमसर साहिब रवालों के मुख्य सेवादार बाबा हरबंस सिंह की देखरेख में हो रहा है।
इस उपलक्ष्य में रविवार को बाबा विधिचंद दल की ओर से श्री अखंड पाठ आरंभ किए गए थे। मंगलवार को श्री अखंड पाठ का भोग डाला जाएगा। सुबह 9 से दोपहर 1 बजे तक समागम आयोजित किया जाएगा। समागम के उपरांत घोड़ा दौड़ भी करवाई जाएगी। बाबा विधिचंद दल के मुखी संत बाबा अवतार सिंह भी पंजाब के तरनतारन जिले के सुर सिंह गांव से पहुंचेंगे। उनके नेतृत्व में कई वर्षों से यह दल लगातार चल रहा है। सोमवार दोपहर में दल के घोड़े और हाथी गुरुद्वारा हुकुमसर साहिब में पहुंचे। दल को देखने के लिए संगत की भीड़ जमा हो गई। गुरुद्वारा साहिब में लंगर भी बरताया गया।
इस समागम का आयोजन हर वर्ष गुरुद्वारा साहिब में किया जाता है। समागम में तीन दिन तक आसपास गांव समेत कई जगहों से संगत पहुंचती है। घोड़ा दौड़ को देखने के लिए संगत में काफी उत्साह होता है। बीती 18 अक्तूबर को गुरुद्वारा श्री हुकुमसर साहिब में संत बाबा सावण सिंह जी की 18वीं बरसी मनाई गई थी।
आज घोड़ों की दाैड़ में दिखेगा दम
दल में मौजूद घोड़े और हाथी की काफी देखभाल की जाती है। इन घोड़ों को ट्रकों की सहायता से एक से दूसरी जगह पर ले जाया जाता है। घोड़े को खाने के लिए देसी घी, चूरी, जौ, कनक, चने, बाजार की खुराक दी जा रही है। साथ ही इनकी सफाई का भी विशेष ध्यान रखा जाता है। समागम के अंतिम दिन घोड़ा दौड़ में दमखम दिखाएंगे।
सचखंड में विराजमान हुए थे बाबा सावण सिंह
ब्रह्मज्ञानी संत बाबा सावण सिंह का जन्म माजरी गांव में हुआ था। बचपन में ही उनके माता-पिता का देहांत हो गया था। उन्होंने जीवन-यापन के लिए जमींदारों के साथ खेती-बाड़ी भी की। कार्य करने के दौरान भी बाबा सावण सिंह नाम-सिमरन में लीन रहते थे। कुछ समय बाद वह महान पवित्र स्थानों की यात्रा पर निकल गए। उन्होंने गुरुद्वारा श्री लखनौर साहिब, मरदों साहिब, गेंदसर साहिब, पंजोखरा साहिब, नबाणा साहिब, श्री हजूर साहिब, श्री हेमकुंड साहिब ऐतिहासिक स्थानों की सेवा की। उन्होंने अपने जीवन में संगतों को श्री गुरुग्रंथ साहिब के चरणों में लगने के लिए प्रोत्साहित किया।
वह ऐतिहासिक गुरुद्वारा साहिब की सेवा करते हुए रवालों गांव में पहुंच गए। यहां उन्होंने बिना किसी उगाही के संगत के सहयोग से गुरुद्वारा श्री हुकुमसर साहिब की निष्काम सेवा करवाई। इसके उपरांत इस स्थान का नाम गुरुद्वारा श्री हुकुमसर साहिब रखा गया। उन्होंने वचन किए थे कि इस स्थान की महिमा दूर-दूर तक होगी। उन्होंने संगतों को गुरमति, गुरु-इतिहास, गुरबाणी बोध व कथा विचार करने की शिक्षा दी। बाबा सावण सिंह जी 18 अक्टूबर 2006 को सचखंड में विराजमान हुए। संत बाबा सावण सिंह की बरसी हर वर्ष समूह गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी व संगत के सहयोग से मनाई जाती है।