कृषि कानून को रद्द करने की मांग को लेकर अंबाला से शनिवार को 4 हजार ट्रैक्टर दिल्ली सिंघू बार्डर के लिए रवाना हुए। इससे पहले तिरंगे और भाकियू के झंडे से सजे 4 हजार ट्रैक्टरों ने मोहड़ा स्थित अनाज मंडी में चार घंटे के लिए डेरा डाल लिया। हालात यह थी कि मंडी के सामने नेशनल हाईवे पर दो किलोमीटर आगे और दो किलोमीटर पीछे जहां तक नजर गई केवल ट्रैक्टरों की कतार ही लगी दिखाई दी। लगातार बढ़ रही ट्रैक्टरों की संख्या के चलते कुछ देर के लिए अंबाला-चंडीगढ़ नेशनल हाईवे जाम हो गया। स्थिति को भांपते हुए पहुंची पुलिस ने व्यवस्था बनवाई और ट्रैक्टरों को हाईवे किनारे लगवाया। इस दौरान कांग्रेस नेता जसबीर मलौर, हजपा प्रमुख निर्मल सिंह भी किसानों का समर्थन करने के लिए पहुंचे। इन्होंने भी किसानों के साथ मिलकर नारे लगाए। लगभग 2 बजे जब ट्रैक्टरों का काफिला दिल्ली के लिए रवाना हुआ तो पूरे नेशनल हाईवे पर केवल ट्रैक्टर ही ट्रैक्टर दिखाई दे रहे थे।
ईंधन बचाने के लिए एक के साथ जोड़े चार
सिंघू के लिए रवाना हुए ट्रैक्टरों के काफिले में दर्जनों ट्रैक्टर ऐसे थे जिनके साथ चार-चार ट्रैक्टर जोड़े गए थे, ताकि दिल्ली बार्डर तक कम से कम ईंधन में अधिक ट्रैक्टरों को पहुंचाया जा सके। जबकि अधिक ट्रैक्टरों से बंधी ट्राली में लंगर का सारा सामान रखा हुआ था। किसानों को कोई ठंड और बरसात के चलते कोई दिक्कत न हो इसके लिए ट्राली को वाटरप्रूफ तिरपाल से ढक रखा था।
बोले, इतिहास में पहली बार किसान दिखाएंगे गणतंत्र दिवस पर ताकत
किसान बोले, इतिहास में पहली बार गणतंत्र दिवस पर तीनों सेनाओं के साथ-साथ किसान अपने ट्रैक्टरों के साथ ताकत दिखाएंगे। आसमां में राफेल अपनी कलाबाजियों से लोगों के दिलों में जगह बनाएंगे वहीं हम भी शांतिपूर्ण तरीके से अपने ट्रैक्टरों के करतब दिखाकर लोगों को तालियां बजाने पर मजबूर कर देंगे। देश ने अभी तक किसानों को केवल खेतों में ट्रैक्टर चलाते हुए देखा था। इस बार की परेड में लोग ट्रैक्टरों के करतब देख कर दांतों तले उंगली दबा लेंगे।
भाकियू उप प्रधान गुलाब सिंह ने दावा किया है कि अंबाला जिले से कम से कम 4 हजार ट्रैक्टर रवाना हुआ है। जबकि अभी आने वाले दो दिनों में भी अंबाला से किसान ट्रैक्टर लेकर निकलेंगे। जो संख्या बढ़कर 6 हजार तक हो सकती है। उसके साथ ही हजारों की संख्या में युवा किसान सिंघम बार्डर पर पहुंच रहे हैं। जिससे कि किसानों को सरकार के समक्ष अपनी ताकत दिखाने का मौका मिलेगा। उन्होंने कहा कि जब तक सरकार कृषि कानूनों को वापस नहीं ले लेती है तब तक उनका यह आंदोलन इसी प्रकार जारी रहेगा।
भाकियू अंबाला वन के प्रधान सुखविंद्र सिंह ने कहा कि किसानों की ट्रैक्टर परेड पूर्ण रुप से शांति पूर्वक लेकिन बहरी हो चुकी सरकार को ट्रैक्टर परेड दिखाना हमारी मजबूरी हो गई है। जिससे कि सरकार किसानों की मांगों पर ध्यान देते हुए कानून वापस लेले।
भाकियू प्रवक्ता अमरजीत सिंह ने कहा कि सरकार अपनी जिद्द पर अड़ी हुई है। किसान आंदोलन पर डटे हुए हैं। मौका भी है दस्तूर भी है। गणतंत्रता दिवस पर तीनों सेनाओं के साथ साथ किसान भी अपनी ताकत का जलवा दिखाएंगे।
भाकियू मुलाना प्रधान हरपाल सिंह ने कहा कि किसान 26 जनवरी का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। क्योंकि इस दिन दिल्ली में किसानों के ट्रैक्टर एक तरफ जहां करतब दिखाएंगे। ट्रैक्टरों की संख्या के माध्यम से सरकार को अपनी ताकत दिखाने का काम करेगी।