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भारत देश का श्रृंगार है हिंदी, जैसे सुहागन के माथे पे बिंदी

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डॉ सोनिका - फोटो : Ambala
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भारत देश का श्रृंगार है हिंदी, जैसे सुहागन के माथे पे बिंदी। जब दिल से हिंदी हम अपनाएंगे, तब राष्ट्रभाषा इसे कह पाएंगे। ऐसे ही शब्द हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने में सहायक सिद्ध हो सकते है। जब तक देश के हर वर्ग और हर उम्र का व्यक्ति हिंदी को नहीं अपनाएगा। तब तक हिंदी को राष्ट्रभाषा और मातृभाषा बनना बहुत ही मुश्किल है। हिंदी लेखकों का भी मानना है कि हिंदी से सरल और मधुर भाषा और कोई नहीं हो सकती। जितना हो सके हमें हर कार्य में हिंदी भाषा का अधिक उपयोग करना चाहिए।
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130 करोड़ भारतीयों द्वारा पसंद की जाने वाली भाषा हिंदी ही है। इसका सरल और सहज प्रयोग लोकप्रियता का कारण है। हिंदू संस्कृति की तरह ये भाषा भी विशाल हृदय वाली है। इसमें अनेक भाषाओं को स्थान दिया गया है। विश्व में सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषाओं में से एक हिंदी को अधिक शक्तिशाली बनाने की आवश्यकता है। हालांकि इसे प्रथम राजभाषा का दर्जा प्राप्त है,लेकिन अभी तक राष्ट्रभाषा नहीं बनाया जा सका है। हिंदी एक भाषा नहीं अपितु सबसे प्राचीन संस्कृति की प्रतिनिधि और पहचान है। - राकेश मेहता, भूतपूर्व वायु सेना अधिकारी एवं प्रेरक वक्ता।
हर भारतीय जुबां पर हिंदी की पकड़ मजबूत हो, गहरे व्याकरण की धनी हिंदी भाषा का उत्थान हो, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मातृभाषा का सम्मान हो, राष्ट्रभाषा हिंदी भारतीय संस्कृति की आत्मा एवं संस्कारों का प्रतिबिंब तथा राष्ट्रीय एकता का प्रतीक है। देवनागरी लिपि में लिखित इस भाषा में प्रत्येक भाषा को आत्मसात करने की क्षमता है। इसकी सरलता एवं सहजता की विशेषता ही इसे अन्य भाषाओं से पृथक करती है। आओ हिंदी का प्रचार कर उन्नत विकास कराएं गर्व से अपने हस्ताक्षर हिंदी में सजाएं।
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-एकता डांग, कवित्री।
बच्चों की खामोशियों में गुम हो गया आंचल, धूल मिट्टी से विरान हो गया आंचल, मां का दूध मुख से पोछंता था आंचल, तपती दोपहरी में छांव देता था आंचल, शर्म हयाको छांव देता था आंचल, आज फैशन की दौड़ में गुमनाम हो गया मां का आंचल, आज न जाने कहां गुम हो गया मां का आंचल। हिंदू संस्कृति की तरह हिंदी भाषा भी विशाल हृदय वाली है। इसमें अनेक भाषाओं को स्थान दिया गया है।
- सुरेंद्र मोहन, प्रिंसिपल, राजकीय स्कूल बलदेव नगर।
मेरे हिंद की धड़कन, एकता की जान है हिंदी। सहजता सरलता सामंजस्य और समन्वय का नाम है हिंदी। हिंदी किसी भी भाषा के शब्दों को ऐसे अपना लेती है मानों उसके अपने हों। ऊंच नीच को नहीं मानती, ऐसी है मेरी हिंदी। इसमें सब बराबर हैं। आधे अक्षर को सहारा देने के लिए पूरा अक्षर हमेशा तैयार रहता है। सभी को एक सूत्र के रूप में पिरोकर एक साथ रखने का नाम है हिंदी। हिंदी एक वैज्ञानिक भाषा है। वर्णमाला का प्रत्येक अक्षर तार्किक है और सटीक गणना के साथ क्रमिक रूप से रखा गया है।
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- डॉ. सोनिका, पीजीटी हिंदी, राजकीय विद्यालय, मेन ब्रांच।

सुरेंद्र मोहन।- फोटो : Ambala

एकता डांग।- फोटो : Ambala

राकेश मेहता।- फोटो : Ambala

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