अंबाला सिटी। गर्मी को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग की ओर से जिले के नागरिक अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों को एक पत्र जारी किया है। इसमें मरीजों को गर्मी से संबंधित अधिक दवा देने के निर्देश दिए हैं। जहां पहले मरीजों को सात दिनों तक की दवा मिलती थी तो वहीं अब मरीजों को 10 दिनों तक की दवा दी जा रही है। इससे मरीजाें को गर्मी में अस्पताल के अधिक चक्कर न काटने पड़े।
ऐसे लगती है लू
एएसएमओ डॉ. सुखप्रीत सिंह ने बताया कि गर्मी के कारण हमें पसीना आता है और पसीने में पानी के साथ साथ शरीर के लिए जरूरी साल्ट भी बह जाते है। इन्हें पूरा करने के लिए बार-बार पानी पीना पड़ता है। लू में भी ऐसा ही होता है जो साल्ट पसीने के साथ बह जाते है उन्हें पूरा करने के लिए शरीर को प्रर्याप्त मात्रा में पानी नहीं मिल पाता। इससे लू लगने की स्थिति पैदा होती है और मरीज को कमजोरी महसूस होने लग जाती है। ऐसे में हमें अधिक से अधिक मात्रा में पानी पीना चाहिए और साल्ट की कमी को पूरा करने के लिए ओआरएस घोल लेना चाहिए।
लू के लिए बनाया अलग वार्ड
विभाग ने अपनी ओर से लू के लिए अलग से वार्ड बनाया है। जहां पर बेड भी आरक्षित रखे हैं। इसके साथ ही प्रत्येक स्वास्थ्य केंद्र पर ओआरएस कॉर्नर भी बनाए हैं। ग्लूकोज को ठंडे वातावरण में रखा गया है। इससे लू से प्रभावित मरीज को जल्द राहत मिल सके।
वर्जन
गर्मी को देखते हुए हमने अस्पतालों को पत्र लिखा है और मरीजों को थोड़ी अधिक दवा देने के लिए कहा है, जिससे कि मरीजों को गर्मी में बार-बार अस्पताल न आना पड़े।
डॉ सुखप्रीत सिंह, एएसएमओ स्वास्थ्य विभाग, अंबाला
लू से बचने के लिए सावधानी बरतें आमजन : उपायुक्त
तापमान में हो रही बढ़ोतरी के चलते नागरिकों से लू के प्रकोप से बचाव के लिए प्रशासन ने विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। उन्होंने नागरिकों से आह्वान किया है कि वे लू से बचाव के लिए जरूरी प्रबंध रखें। छोटे बच्चों और बुजुर्गों की विशेष देखभाल जरूरी है। डीसी डॉ. शालीन ने कहा कि मौसम विभाग ने आने वाले कुछ दिन और अत्याधिक गर्मी होने और लू के चलने की संभावना जताई है।
शरीर में पानी की कमी करने वाले चाय, कॉफी और कार्बोनेटिड शीतल पेय जैसे पदार्थों के सेवन से बचना चाहिए। उच्च प्रोटीन युक्त व बासी भोजन न खाएं। डीसी डॉ. शालीन ने कहा कि लू से बचाव के लिए पर्याप्त पानी पीयें, भले ही प्यास न लगी हो। हल्के रंग के व ढीले और छिद्रयुक्त सूती कपड़े पहनें। डीसी डॉ. शालीन ने कहा कि पार्क किए गए वाहनों में बच्चों या पालतू जानवरों को न छोड़ें। जानवरों को छाया में रखें और उन्हें पीने के लिए भरपूर पानी दें।