बराड़ा मंडी में उठान न होने से लगा गेहूं का अंबार। संवाद
बराड़ा। गेहूं खरीद सीजन 2026-27 के जोर पकड़ते ही बराड़ा क्षेत्र की अनाज मंडियों में अव्यवस्थाओं का बोलबाला हो गया है। बराड़ा मुख्य मंडी सहित सरदेहड़ी और उगाला खरीद केंद्रों पर सरकारी खरीद तो की जा रही है, लेकिन उठान की कछुआ चाल ने किसानों और आढ़तियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। वर्तमान में मंडियों के फर्श से लेकर रास्तों तक केवल गेहूं की बोरियों का अंबार लगा है, जिससे नई फसल लेकर आ रहे किसानों को अपने वाहन खड़े करने तक की जगह नहीं मिल पा रही है।
आंकड़ों में सुस्ती का हाल
16 अप्रैल तक तीनों केंद्रों पर कुल 2,70,145 क्विंटल गेहूं की सरकारी खरीद हो चुकी है, परंतु इसमें से मात्र 90,506 क्विंटल ही गोदामों तक पहुंच पाया है। 1,79,639 क्विंटल (लगभग 66 प्रतिशत) अभी उठान बकाया है। सबसे खराब स्थिति सरदेहड़ी केंद्र की है। यहां मात्र 24 प्रतिशत उठान हुआ है। वहीं बराड़ा मंडी में मात्र 33 प्रतिशत उठान हुआ है।
आढ़तियों की मांग वाहनों की संख्या बढ़ाएं
शुक्रवार को आसमान में छाए बादलों ने किसानों की धड़कनें बढ़ा दी हैं। खुले आसमान के नीचे पड़ा 1.79 लाख क्विंटल से अधिक अनाज बारिश की भेंट चढ़ने की कगार पर है। किसान मनजीत सिंह और गुरजीत ने बताया कि एक तरफ बारदाने की किल्लत है, तो दूसरी तरफ उठान न होने से मंडी में पैर रखने की जगह नहीं बची। यदि बारिश हुई, तो किसानों का पीला सोना मिट्टी में मिल जाएगा। पिछले वर्ष की तुलना में आवक कम होने के बावजूद हैफेड की परिवहन व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है। आढ़तियों ने प्रशासन से मांग की है कि तत्काल वाहनों की संख्या बढ़ाई जाए और बारदाने की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। किसानों का कहना है कि यदि समय रहते उठान नहीं हुआ, तो आगामी आवक को संभालना असंभव हो जाएगा।