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ब्लड कंपोनेंट मशीन चलाने का मिला लाइसेंस अब एक यूनिट से बचेंगी चार लोगों की जान

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health - फोटो : Ambala
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संवाद न्यूज एजेंसी
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अंबाला। छावनी के नागरिक अस्पताल के ब्लड बैंक को कोई रक्तदान करता है तो उसके एक यूनिट रक्त से चार लोगों की जान बचाई जा सकेगी। जल्द ही मरीजों के लिए यह सुविधा शुरू कर दी गई जाएगी। स्टेट ड्रग कंट्रोलर की तरफ से ब्लड बैंक में करीब 80 लाख की लागत से आई दो ब्लड कंपोनेंट मशीन बीसीएस को शुरू करने के लिए लाइसेंस उपलब्ध करवा दिया गया है। इस लाइसेंस का अस्पताल प्रबंधन को लंबे समय से इंतजार था। जल्द ही स्टाफ व संबंधित एलटी के आते ही मरीजों को इसका लाभ मिलने लगेगा। अगस्त माह के अंदर एमआरआई मशीन मिलने के बाद अंबालावासियों के लिए यह दूसरी बड़ी सौगात है। अब मरीजों को प्राइवेट लैब के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे और साथ ही एक यूनिट ब्लड में से मरीज को जिसकी जरूरत होगी, वहीं उसे चढ़ाया जाएगा। यह मशीन डेंगू, बर्न केस, थैलेसीमिया व एड्स के मरीजों को राहत मिलेगी।
मशीन खून में शामिल तत्वों को करती है अलग
ब्लड कंपोनेंट मशीन खून में शामिल तत्वों को अलग-अलग कर देती है। पैथालाजी विशेषज्ञों के अनुसार थैलेसीमिया के मरीजों को आरबीसी, डेंगू के मरीजों को प्लेटलेट्स, बर्न के मरीजों को प्लाजमा, एफएफपी व एड्स के मरीजों को डब्ल्यूबीसी की जरूरत पड़ती है। यह मशीन आरबीसी, श्वेत रक्त कणिकाएं, फ्रेश फ्रोजन प्लाजमा, एफएफपी, लाल रक्त कणिकाएं, डब्ल्यूबीसी, प्लेटलेट्स, प्लाजमा को अलग-अलग कर देता है। ऐसे स्थिति में मरीज को पूरी बोतल खून चढ़ाने के बजाए आवश्यक तत्व ही चढ़ाए जाते हैं। एक बोतल खून में से चार मरीजों की जिंदगी बचाई जा सकती है।
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प्लेटलेट्स पांच दिन तक रखे जा सकेंगे सुरक्षित
नागरिक अस्पताल के ब्लड बैंक के साथ-साथ प्लाज्मा की सुरक्षा के लिए भी दो डीप फ्रिजर लगाए गए हैं। वहीं, प्लाज्मा को पिघलाने के लिए भी एक मशीन की व्यवस्था की गई है। ब्लड स्टोर के लिए 3 रेफ्रिजरेटर है, जहां तक प्लाज्मा को सुरक्षित रखने का बात है इसके लिए भी मशीन उपलब्ध है। रक्त को शुद्ध करने के लिए भी अलग मशीन उपलब्ध है। फिलहाल अस्पताल में केवल ब्लड ही चढ़ाया जाता है और कंपोनेंट मशीन के लिए मरीजों को प्राइवेट या फिर पीजीआई की दौड़ लगानी पड़ती है।
जीएमसीएच-32 अस्पताल में टेक्निशियन लेगा एक माह की ट्रेनिंग
लाइसेंस मिलने के बाद अस्पताल प्रबंधन ने भी मशीन को जल्द शुरू करवाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। ब्लड बैंक से टेक्निशियन को बाकायदा मशीन चलाने की ट्रेनिंग के लिए चंडीगढ़ के जीएमसीएच-32 अस्पताल भेजने के लिए अस्पताल प्रबंधन ने संपर्क किया गया है। जहां वह एक माह की ट्रेनिंग में पूरी तरह से एक यूनिट ब्लक से सभी को अलग करने की ट्रेनिंग लेगा। जैसे ही वह ट्रेनिंग से लौटेगा तो अस्पताल में इसे शुरू कर दिया जाएगा। मशीन को अस्पताल में आए कई महीने हो चुके थे। बिना लाइसेंस के उसे चलाया नहीं जा सकता था।
प्लाजमा सेपरेटर की भी भेजी डिमांड
ब्लड सपेरेटर मशीन के आने व लाइसेंस मिलने के बाद अस्पताल प्रबंधन की तरफ से बाकायदा प्लाजमा सेपरेटर की मशीन की भी डिमांड भेजी गई है। यह मशीन ब्लड से प्लाजमा को अलग करने में काफी मददगार होगी। हजारों रुपये की लागत से तैयार मशीन के आने पर ब्लड बैंक पूरी तरह से आधुनिक सुविधाओं से लैस हो जाएगा।
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हाल ही में ब्लड बैंक को ब्लड सेपरेटर मशीन बीसीएस चलाने का लाइसेंस मिल गया है। जल्द ही इस मशीन को चालू कर दिया जाएगा जोकि मरीजों के लिए काफी मददगार रहेगी।
-डॉ. मुकेश, आरएमओ, छावनी नागरिक अस्पताल
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