अंबाला सिटी। नग्गल क्षेत्र के गांव जगौली निवासी हरजिंद्र सिंह रविवार को अपने गांव लौटे। वह उन 50 लोगों में शामिल थे जिन्हें एक दिन पहले अवैध रूप से अमेरिका में रहने पर डिपोर्ट किया गया है। हरजिंद्र सिंह ने बताया कि डिपोर्ट होने के बाद वह काफी पीड़ा में हैं। अमेरिका की पुलिस ने उन्हें पकड़ने के बाद 25 घंटे तक बेड़ियों में जकड़ कर रखा। इस यातना से उनके पैरों पर सूजन आ गई है। वहीं अमेरिका से वापस आने के बाद उनके सामने भविष्य का भी संकट है। उन्होंने बताया कि कुछ समय पहले वह डंकी रूट के माध्यम से अमेरिका गए थे। अमेरिका जाने में उन्होंने 35 लाख रुपये खर्च किए थे। जिन्हें जोड़ने के लिए उन्होंने आधी जिंदगी मेहनत करते हुए गुजार दी थी। अब वापस आने पर वह उसी मोड़ पर खड़े हैं जहां से सुनहरे सपनों का सफर शुरू किया था।
बच्चों को अच्छा भविष्य देना था
हरजिंद्र सिंह ने बताया कि अमेरिका जाकर बच्चों का भविष्य सुधारने का सपना देखा था। अमेरिका पहुंचने के दौरान वहीं पर कुकिंग का काम सीखा और फ्लोरिडा शहर में कुक की नौकरी भी लग गई। मालिक भी अच्छा था। जब सब कुछ ठीक होने लगा तो ट्रंप सरकार के फैसले के कारण वहां की पुलिस ने मुझे पकड़कर भारत भेज दिया। मुझे इसका दुख है। मेरे 35 लाख रुपये भी डूब चुके हैं। मैंने खेती कर यह रुपये एकत्रित किए थे। अब मेरी उम्मीदों पर पानी फिर गया है।
हरजिंद्र सिंह ने बताया कि अमेरिकी सरकार की पुलिस को बेड़ियों में बांधकर 25 घंटे तक नहीं रखना चाहिए था। पैर अब तक सूजे हुए हैं। केंद्र सरकार से हरजिंद्र सिंह ने मांग की है कि उनकी मदद की जाए। उनका परिवार उन पर ही आश्रित था। किसान के लिए जीवन काटना काफी मुश्किल है। हमारे पास जमीन है मगर रुपये नहीं हैं। सरकार को हमारी मदद करनी चाहिए, यहां डीजल, यूरिया इतना महंगा है किसान दब रहे हैं। भारत में सब कुछ ठीक होता तो हम परिवार को छोड़कर क्यों सात समंंदर पार जाते।