अंबाला। स्पेशल चाइल्ड बनकर जन्मा तांशू लोगों की नजर में भले ही दूसरे बच्चों से अलग हो लेकिन अपनी मां का लाडला है। शुरूआत में कुछ भी करता था तो लोगों से ताने मिलते थे। बावजूद इसके तांशू और उसकी मां रजनी बाला ने हिम्मत नहीं हारी।
पांच साल की उम्र में तांशू ने स्केटिंग कोच चंद्रहास शर्मा के संपर्क में आकर स्केटिंग करना शुरू किया। हालांकि परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी लेकिन मां रजनी बाला ने पाई-पाई जोड़कर आगे बढ़ाया।
आज यही तांशू कैंटोनमेंट बोर्ड के वात्सलय स्पेशल स्कूल में पढ़ाई कर रहा है। साथ ही स्केटिंग जगत में एक उभरता हुआ खिलाड़ी बनकर सामने आया है। 2019 में आइस स्पीड स्केटिंग नेशनल में पहला स्थान पाया था। फिर स्वीडन में हुई वर्ल्ड विंटर गेम्स के निमंत्रण पर गया था और दो स्वर्ण पदक हासिल किए थे।
कैंटोनमेंट बोर्ड की मदद से तांशू बना चमकता सितारा
मां रजनी बाला ने बताया कि पति के निधन के बाद वह टी स्टॉल चलाकर परिवार का गुजर बसर कर रही है। पांच साल की उम्र में ही तांशू के खेल की प्रति रुझान को देखकर उम्मीद संस्था के साथ जोड़कर स्केटिंग के लिए डाला था। उस समय कोच चंद्रहास शर्मा ने प्रशिक्षण दिया। उसके बाद कोच वात्सल्य स्कूल में आए तो तांशू को स्कूल में डाला। तभी से कैंटोनमेंट बोर्ड की मदद से तांशू की प्रतिभा निखरती चली गई।
पांच किलोमीटर तक तांशू करता है रोड स्केटिंग
रोलर स्केटिंग, इन लाइन स्केटिंग में तांशू का कोई जवाब नहीं है। तांशू ने तीन ऑल इंडिया कंपीटिशन खेले हैं, जिनमें दो गोल्ड और एक सिल्वर मेडल जीता। इसी तरह तीन इंटर स्कूल ओपन चैंपियनशिप में गोल्ड हासिल किया जबकि अंबाला लोकल लेवल की चार चैंपियनशिप जीती हैं। इतना ही नहीं सड़क पर तांशू रोजाना पांच किलोमीटर तक रोड स्केटिंग करता है। वात्सल्य स्पेशल स्कूल के प्रिंसिपल यशपाल कुमार ने बताया कि तांशू एक बेहतरीन खिलाड़ी है।