संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला। बर्फखाने की जमीन के बाद अब नगर परिषद ने सिया वाटिका की जमीन पर मालिकाना हक के लिए तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए हरियाणा सरकार को भेजी फाइल पर मुहर लग गई है और जल्द ही सरकार के महाधिवक्ता इस मामले की सुप्रीम कोर्ट में पैरवी करने वाले वकीलों के पैनल की सूची जारी करेंगे ताकि तथ्यों के आधार पर इस सरकारी जमीन पर अपना कब्जा वापस लिया जा सके।
आठ वकील रहे थे नदारद
नगर परिषद ने इस संबंध में सरकार को एक विशेष प्रस्ताव बनाकर भेजा था कि सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान उनका केस कैसे कमजोर किया गया और नगर परिषद की तरफ से पैरवी करने वाले आठ वकील सुनवाई के दौरान नहीं पहुंचे। इस कारण सुप्रीम कोर्ट ने एक तरफा फैसला सुनाया, लेकिन जब नगर परिषद ने तथ्याें की जांच की तो सामने आया कि सुनवाई के दिन 29 अप्रैल को पैनल का एक भी वकील सुप्रीम कोर्ट पहुंचा ही नहीं जोकि उनकी हार का कारण बना। इसके अलावा नगर परिषद की तरफ से सरकार से यह भी अनुशंसा की गई थी कि केस को कमजोर करने वाले पैनल के वकीलों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाए।
2022 में शुरू हुआ था मामला
तीन एकड़ जमीन का मामला वर्ष 2003 में शुरू हुआ था। सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की पैरवी वर्ष 2022 में शुरू हुई थी। पैरवी करने वाले आठ वकीलों के पैनल पर लगभग 14 लाख रुपये खर्च हो चुके थे, लेकिन अंतिम सुनवाई के दौरान पैनल का एक भी वकील नहीं पहुंचा। इसलिए अब नगर परिषद ने इस हार से सीख लेते हुए अब अपना दावा पुख्ता करने का प्रबंध कर लिया है। इस बार पूरी मुस्तैदी के साथ इस मामले की पैरवी की जाएगी। सुप्रीम कोर्ट के समक्ष मजबूती के साथ पक्ष रखा जाएगा कि यह जमीन बंगला क्षेत्र के तहत एक्साइज क्षेत्र से संबंधित है जोकि राज्य सरकार की मलकियत है न कि किसी एक विशेष व्यक्ति की।
बर्फखाने पर भी नजर
दूसरी तरफ नगर परिषद छावनी के हाईप्रोफाइल बर्फखाने के मामले पर भी लगातार कार्रवाई में जुटी हुई है और जल्द ही सुप्रीम कोर्ट में भी निचले कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए अपील दायर करने की तैयारी है ताकि इस मसले को भी सुलझाया जा सके। इसके अलावा बर्फखाने की जमीन से चेतावनी बोर्ड को भी हटे हुए 20 से 25 दिन का समय बीत गया है, लेकिन बोर्ड अभी तक नहीं लग पाया है।
सिया वाटिका की लगभग तीन एकड़ जमीन को पुन: सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी है। इस संबंध में सभी तथ्य जुटा लिए गए हैं ताकि इस बार कहीं कोई खामी न रह जाए। इसके अलावा नए पैनल के संबंध में भी मंत्रणा हुई है, उम्मीद है कि जल्द ही याचिका दाखिल कर दी जाएगी।
- देवेंद्र नरवाल, कार्यकारी अभियंता, नप सदर, अंबाला।
अंबाला छावनी स्थित सिया वाटिका। संवाद