माता कुलवंत कौर बताती हैं कि जब नायब सिंह आरएसएस से जुड़ रहे थे तब एक ही बात कही थी कि जो दिल करे वो करो। नायब सिंह की शुरुआती शिक्षा गांव के सरकारी स्कूल से हुई। सीएम की दो बहनें हैं। बहन श्वेता और संतोष बताती हैं कि बचपन में भाई नायब सिंह जब राजनीति से जुड़ी बातें करते थे तो उन्हें विश्वास नहीं होता था कि भाई इतने गंभीर हैं कि वह एक दिन प्रदेश के मुख्यमंत्री बन जाएंगे।
सीएम नायब सिंह सैनी की तीन भांजी हैं। इसमें हर्षिता बताती है कि मामा परिवार में सबसे प्रेम करते हैं। वे जब हमारे साथ होते हैं तो बच्चे बन जाते हैं और जब बड़ों से बात करते हैं तो बड़े। उनके सीएम बनने से बहुत खुशी है। वह अपनी मां के साथ अभी ननिहाल इसी खुशी को साझा करने आईं हैं। बचपन में स्कूल की छुट्टियां होते ही वह अपने साथ सभी को ननिहाल ले आते थे।
भाई चंदन बताते हैं कि पहले नायब सैनी ने संघ से जुड़कर शाखा में जाना शुरू किया। संघ का काम करने के दौरान उनका संपर्क संघ में प्रचारक रहे मनोहर लाल से हुआ। उन्होंने पूर्व सीएम को गुरु बना लिया और सामाजिक क्षेत्र में काम किए। इसी दौरान कुछ समय के लिए नायब सिंह सैनी को पीएम का भी सानिध्य मिला। इसके बाद वर्ष 2002-03 में संघ ने उन्हें क्षेत्र में कार्य करने को भेज दिया तो वे गांव आ गए और सिटी केबल नेटवर्क के व्यापार से जुड़ गए।
सीएम नायब सिंह के भाई चंदन बताते हैं कि वे चार भाई-बहन हैं। सबसे बड़े वे हैं तो छोटे नायब सिंह, फिर बहन श्वेता और संतोष हैं। श्वेता की शादी शहर के नदी मोहल्ला में हुई है तो छोटी बहन संतोष कुरुक्षेत्र है, जोकि अब गुरुग्राम में है। भाई चंदन पहले इटली में नौकरी करते थे फिर भाई राजनीति में गए तो वे वर्ष 2014 में गांव आ गए। यहां वह खेती और क्रशर के दो प्लांट संचालित करते हैं। घर में चंदन की पत्नी ऊषा, बेटा विशाल और रसम सिंह भी हैं। नायब सिंह की पत्नी सुमन सैनी सक्रिय राजनीति में हैं तो बेटे अनिकेत और वंशिका चंडीगढ़ ही शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।
सीएम बनने के बाद राजभवन में उनकी एक पल के लिए मां कुलवंत कौर से मुलाकात हुई। उसके बाद उनकी मां से बात नहीं हुई है, अब मां गांव में अपने घर में बेटे का इंतजार कर रही हैं। गांव में घर को लड़ियों से सजाया जा रहा है। वहीं समूचे गांव में इंतजार है कि उनके गांव का बेटा सीएम के रूप में जल्द आएगा।