अंबाला। सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों में गणित, तार्किक क्षमता, विश्लेषणात्मक सोच और प्रॉब्लम-सॉल्विंग स्किल्स को निखारने के लिए राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद, हरियाणा ने एक अनूठी पहल की है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए अब प्रदेश के स्कूलों में हरबंस पजल को एक प्रभावी शैक्षणिक उपकरण के रूप में लागू किया जाएगा।
इस संबंध में एससीईआरटी के अतिरिक्त निदेशक की ओर से प्रदेश के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों और जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों को दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं। अंबाला के जिला शिक्षा कार्यालय द्वारा भी इस पत्र के आधार पर जिले के सभी खंड शिक्षा अधिकारियों और स्कूल प्रभारियों को आदेश जारी कर दिए हैं। एससीईआरटी की ओर से जारी कार्ययोजना के तहत स्कूलों में चार मुख्य कदम उठाए जाएंगे। सभी स्कूलों में एक विशेष कोना यानी पजल कॉर्नर तैयार किया जाएगा। यहां हर दिन गणितीय और तार्किक पहेलियां प्रदर्शित की जाएंगी। हर शनिवार को प्रत्येक छात्र को कम से कम एक हरबंस पजल दी जाएगी। बच्चे इसे अकेले या ग्रुप में मिलकर हल कर सकेंगे। बच्चों में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए सबसे सटीक और बेहतरीन तरीके से पहेली हल करने वाले छात्र की शीट को स्कूल के नोटिस बोर्ड पर दर्शाया जाएगा। इन पहेलियों को सुबह की प्रार्थना सभा, मैथमेटिक्स क्लब और रेगुलर क्लासरूम एक्टिविटी का हिस्सा बनाया जाएगा।
मछली के दाम से लेकर सेट थ्योरी तक की पहेलियां शामिल
वरिष्ठ माध्यमिक कक्षाओं, जैसे कक्षा 11वीं और 12वीं के छात्रों के लिए एससीईआरटी ने बकायदा 12 पेजों का एक सैंपल सेट भी जारी किया है। इसमें गणित के अलग-अलग चैप्टर्स जैसे, द फिश टेल (मछली की कहानी), नंबर सिस्टम, शेप्स, सेट्स और रिलेशन्स एंड फंक्शंस पर आधारित दिलचस्प ग्रिड वाली पहेलियां दी गई हैं। इन पहेलियों में बच्चों को व्यावहारिक गणित जैसे, मछली की खरीद-बिक्री के हिसाब-किताब के साथ-साथ सुडोकू और केनकेन जैसे दिमागी खेल के नियमों का इस्तेमाल कर ग्रिड को भरना होगा। संवाद
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इस पहल से छात्र रट्टा मारने की प्रवृत्ति से दूर होंगे और उनमें कठिन एवं अनजानी समस्याओं को हल करने का आत्मविश्वास पैदा होगा। यह कदम बच्चों के सीखने के परिणाम को सुधारने में अहम कड़ी साबित होगा।
सुधीर कालड़ा, जिला शिक्षा अधिकारी,अंबाला।