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हीमोफीलिया-बी के मरीज को पहली बार लगा फेक्टर-9 का टीका, बची जान

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नागरिक अस्पताल छावनी में हीमोफीलिया-ए के बाद पहली बार हीमोफीलिया-बी से ग्रस्त 11 वर्षीय बच्चे धनकीरत को फेक्टर-9 का टीका लगा। इमरजेंसी वार्ड में धनकीरत गंभीर अवस्था में दाखिल हुआ। घुटनों पर लगी चोट के बाद भीतर खून बहना बंद नहीं हुआ तो परिजन सीधा अस्पताल लेकर पहुंचे। डॉक्टरों ने प्राथमिक जांच की तो बाल कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. विनीत को मौके पर बुलाया गया।
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आनन-फानन में बच्चे को फेक्टर-9 का टीका लगाया गया। यह एक टीका 9 हजार रुपये का है और अगले चार दिनों तक रोजाना दो-दो टीके यानी 70 हजार के टीके अस्पताल में बिलकुल निशुल्क लगाए जाएंगे। बता दें कि नागरिक अस्पताल में विगत माह ही हीमोफीलिया का उपचार शुरू हुआ है। हीमोफीलिया-ए और हीमोफीलिया बी दो वर्गों में वर्गीकृत किया गया है। लगभग 80 प्रतिशत हीमोफीलिया रोगी, हीमोफीलिया-ए से पीड़ित होते हैं। यह एक अनुवांशिक बीमारी होती है। इस बीमारी में शरीर में रक्त के थक्के बनने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है, जिसके कारण चोट लगने पर रक्त जम नहीं पाता और वह असामान्य रूप से बहता रहता है।
परिजन बोले- पहले तो हर बार जाना पड़ता था चंडीगढ़
धनकीरत के परिजनों ने बताया कि फेक्टर-9 का टीका छावनी नागरिक अस्पताल में मिलने पर काफी राहत मिली है। पहले कभी खून बहने लगता था तो सीधा चंडीगढ़ लेकर भागना पड़ता था। अंबाला में करीब 35 मरीज हीमोफीलिया है, जिसमें से 32 हीमोफीलिया-ए और 3 हीमोफीलिया-बी के हैं। पीएमओ डॉ. राकेश सहल ने बताया कि हाल में ही स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज द्वारा नागरिक अस्पताल में ही हजारों के टीके निशुल्क लगाने की स्वीकृति मिली है।
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छावनी नागरिक अस्पताल में पहली बार हीमोफीलिया-बी के मरीज को फैक्टर-9 का टीका निशुल्क लगा है। बाजार में यह टीका हजारों रुपये की लागत से आता है और चार दिन तक यह टीके लगेंगे।
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- डॉ. विनीत आनंद, बाल कैंसर रोग विशेषज्ञ अंबाला
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