फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Ambala News: एक तरफा पास से जीआरपी परेशान, रेलवे काे नहीं ज्ञान

विज्ञापन
विज्ञापन
अंबाला। दूसरे राज्यों में छिपे अपराधियों को पकड़ने के लिए जीआरपी को रेलवे की तरफ से एक तरफ का इमरजेंसी पास दिया जा रहा है। इससे कर्मचारियों को सुविधा के स्थान पर परेशानी हो रही है। रेलवे के वाणिज्य विभाग से जुड़े अधिकारी का कहना है उन्हें इस समस्या की जानकारी ही नहीं है। ऐसे में समस्या का समाधान होना मुश्किल है।
विज्ञापन

जीआरपी प्रभारी धर्मवीर सिंह ने बताया कि वर्ष 2016 से उन्हें एक ही इमरजेंसी पास मिल रहा है। पहले आवागमन के लिए दो पास मिलते थे। जीआरपी का यह भी कहना है कि वो तत्कालीन मंडल रेल प्रबंधक दिनेश कुमार के समय भी रेलवे पुलिस अधीक्षक के माध्यम से तीन बार पत्राचार कर चुके हैं, लेकिन उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ।
यह आती है परेशानी
जीआरपी से जुड़े अधिकतर चोरी के मामले बिहार, झारखंड, मध्यप्रदेश और असम के होते हैं। वहां के लिए इमरजेंसी पास की जरूरत पड़ती है। रेलवे की तरफ से एक तरफ का ही पास मिलता है। इस कारण जब आरोपी पकड़ा जाता है तो उसे लाने में कठिनाई होती है। पहली परेशानी टिकट कंफर्म न होने को लेकर आती है और दूसरी आरोपी को साथ लेकर जनरल कोच में सफर करना पड़ता है।
विज्ञापन

एक माह में 7-8 बार बाहर जाते हैं कर्मी
दूसरे राज्यों से जुड़े चोरी के मामलों को सुलझाने और आरोपियों की धरपकड़ के लिए जीआरपी कर्मचारी एक माह में लगभग सात-आठ बार ट्रेनों से सफर करते हैं। ऐसे में उन्हें मानसिक और शारीरिक पीड़ा झेलनी पड़ती है। दूसरे राज्यों में जाकर वहां के रेलवे अधिकारी कोई मदद नहीं करते तो उन्हें खुद के जेब खर्च से टिकट लेकर सफर करना पड़ता है।
जयपुर और बीकानेर मंडल में मिल रहे दो पास
जब जीआरपी प्रभारी ने नारनौल और रेवाड़ी के जीआरपी प्रभारियों से बात की तो उन्होंने बताया कि उन्हें दो इमरजेंसी पास मिलते हैं। एक पर वो टिकट लेकर दूसरे राज्य जाते हैं और वापसी में दूसरे पास पर टिकट लेकर वापस आते हैं। कई बार वो एक ही जगह से आने-जाने की टिकट ले लेते हैं।
वर्जन
वर्ष 2023 से जुड़े एक मामले को लेकर साइबर सैल की मदद से आरोपी तक पहुंचे थे जोकि गुवाहाटी में था। आरोपी को पकड़ने के लिए एक इमरजेंसी पास मिला था, वापसी का नहीं। इसलिए काफी परेशानी हुई। वहीं आरोपी को पहले ही आने की सूचना मिल गई थी और वो मौके से फरार हो गया था।
सत्यवीर सिंह, जांच अधिकारी।
वर्जन
कोर्ट के आदेशानुसार भगोड़े को पकड़ने के लिए झारखंड जाना है, लेकिन एक इमरजेंसी पास से मुश्किल बढ़ गई है। अब वहां उतरकर पहले वापसी की टिकट बुक करवानी पड़ेगी ताकि परेशानी का सामना न करना पड़े। अगर भगोड़ा मिल गया तो सफर के दौरान काफी दिक्कत हो जाएगी।
प्रदीप कुमार, जांच अधिकारी।
वर्जन
इस मामले को लेकर अभी तक जीआरपी की तरफ से कोई भी पत्र नहीं मिला है और न ही किसी ने मुलाकात की है। मेरे आने से पहले कुछ हो तो इसकी मुझे जानकारी नहीं है। अगर समस्या है तो जीआरपी को मिलना चाहिए जो उचित व नियमानुसार समाधान होगा, उसे जरुर किया जाएगा।
विज्ञापन

नवीन कुमार, वरिष्ठ वाणिज्य प्रबंधक, अंबाला मंडल।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें