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सरकारी खरीद शुरू, तैयारी अधूरी गेहूं बेचने नहीं पहुंचा कोई किसान

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ख़ाली पड़ी अनाज मंडी। - फोटो : Ambala
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अंबाला/बराड़ा। हरियाणा सरकार द्वारा घोषित रबी सीजन के लिए खरीद नीति के अनुसार एक अप्रैल से गेहूं की खरीद आरंभ कर दी गई। जिले में 15 मंडियों में गेहूं खरीद का कार्य एक अप्रैल से शुरू हो जाना था। हालांकि पहले दिन कोई भी किसान अपनी गेहूं लेकर मंडी नहीं पहुंचा। इस कारण खरीद आरंभ नहीं हो सकी। वहीं अनाज मंडी में व्यवस्था अभी आधी अधूरी है। मंडी परिसर का निर्माण अधूरा पड़ा है। यहां बेसहारा पशु घूम रहे हैं।
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दूसरी ओर सरकार द्वारा गेहूं के भुगतान की 72 घंटे सीमित समय अवधि में करने की घोषणा की गई है। अन्यथा विलंब की स्थिति में नौ प्रतिशत ब्याज सहित भुगतान किया जाएगा। हालांकि आढ़ती संघ के प्रधान कंवरजीत सिंह विर्क का आरोप है कि गत वर्ष सरकार ने कमीशन व लेबर को भुगतान करने में काफी देरी की थी। उन्हें सरकार द्वारा 2.50 रुपये की अपेक्षा कम कमीशन दिया गया। जिससे उन्हें व मजदूरों को आर्थिक संकट से गुजरना पड़ा। संघ ने मांग की कि उन्हें समय पर भुगतान किया जाए।
मंडी सचिव जसवीर सिंह के अनुसार एक सप्ताह के भीतर गेहूं की आवक शुरू होने की उम्मीद है। उन्होंने किसानों से अपील की है कि किसान 12 प्रतिशत से कम नमी वाली गेहूं ही मंडी में लेकर आएं। इससे अधिक नमी वाली गेहूं की विभाग द्वारा खरीद नहीं की जाएगी। उन्होंने बताया कि किसानों को किसी प्रकार से कठिनाई न हो इसके लिए हेल्प डेस्क बनाया गया है। वहीं हैफेड 15 मई तक प्रतिदिन गेहूं की खरीद करेगा।
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बता दें कि सरकार ने संबंधित विपणन मंडी सचिवों को परिपत्र जारी कर मध्य मार्च तक शेड तथा फड़ों, सड़क की सफाई एवं मरम्मत, पीने के पानी, प्रकाश, शौचालय सहित अन्य सभी प्रकार के प्रबंधों को अंतिम रूप देने के आदेश जारी किए थे।
गत रबी सीजन की तुलना में इस बार कम आवक की संभावना
चालू रबी मौसम में जिले भर की 15 मंडियों में गत वर्ष की तुलना में आवक कम होने की संभावना जताई जा रही है। इस बार गेहूं की बिजाई के समय अत्यधिक ठंड तथा एकाएक मौसम में परिवर्तन से गर्मी बढ़ने से आवक गत वर्ष की तुलना में कम रहने की संभावना है। इस बार सरसों की अधिक क्षेत्र में बिजाई के कारण गेहूं का उत्पादन कुछ हद तक कम होने से भी आवक कम रहेगी।
निजी मिलर्स ने की सरसों की खरीद
सरकार द्वारा निर्धारित एमएसपी 5050 रुपये प्रति क्विंटल से अधिक रेटों पर निजी मिलर्स द्वारा सरसों की खरीद की जा रही है। किसानों द्वारा 5200 रुपये प्रति क्विंटल से लेकर 7525 रुपये प्रति क्विंटल तक अपनी सरसों की उपज बेची गई है। इससे किसानों को आर्थिक लाभ हो रहा है।

अनाज मंडी में निर्माणाधीन परिसर व एकत्रित बेसहारा पशु।- फोटो : Ambala

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