ज्वैलरी पर एक्साइज ड्यूटी लगाने और दो लाख के खरीद पर पेन कार्ड की अनिवार्यता के विरोध में आंदोलनरत सोना व्यापारी अब दो धड़ों में बंटकर देेंगे धरना। पिछले 23 दिनों से जहां सर्राफ और स्वर्णकार सिटी के सर्राफा बाजार में एकजुट धरना देकर क्रमिक भूख हड़ताल पर बैठे थे वहीं अब सर्राफ सर्राफा बाजार और स्वर्णकार हलवाई बाजार में अलग अलग आंदोलन करेंगे।
शुक्रवार को जहां सर्राफा कारोबारियों की ओर से नवी जैन, रिशभ जैन, अमित गर्ग, दीपक ठाकुर, सचिन गुप्ता और शंभाजी भूख हड़ताल पर सर्राफा बाजार में बैठे वहीं अंबाला शहर स्वर्णकार संघ के बैनर के नीचे हलवाई बाजार में सभी कारीगर एसोसिएशन के लोगों ने धरना दिया। धरने पर बैठने वालों में संघ के प्रधान जोगिंद्र वर्मा, विनोद वर्मा, दविंद्र वर्मा, विजय बोबल, गुलशन कुमार, राकेश वर्मा, इकबाल सिंह, बंगाली प्रधान उत्पल, मराठा प्रधान जनार्दन सहित अनेक कारीगर धरने पर बैठे। दोनों ही स्थानों पर आंदोलनरत सोना कारोबारियों ने केंद्र सरकार और वित्त मंत्री के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
सर्राफा एसोसिएशन के प्रधान नरेश अग्रवाल और उपप्रधान मुकेश सिंगला ने बताया कि करनाल के सोना कारोबारियों ने 27 मार्च को पानीपत पहुंचने पर मुख्यमंत्री मनोहर लाल का घेराव करने की योजना बनाई है। अंबाला एसोसिएशन भी इस बारे विचार विमर्श कर रही है। उन्होंने कहा कि आंदोलन सरकार द्वारा निर्णय वापस लिए जाने तक जारी रखा जाएगा। दोनों नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार सर्राफा कारोबारियों की समस्या को हल करने की बजाए उनकी एकता में सेंध लगाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक दोनों प्रमुख मांगें मान ली जाती तब तक आंदोलन वापस नहीं होगा। उन्होंने कहा कि कारोबारी बंद का सबसे बुरा प्रभाव आभूषण कारीगरों पर पड़ रहा है जिनकी संख्या बड़ी ज्यादा है। उन्होंने चेतावनी दी कि सरकार सोना कारोबारियों के संयम की परीक्षा नहीं ले और थोपे गए काले नयमों को वापस लेने की घोषणा करे।
काली टी-शर्ट पहन मनाई होली
उधर, अंबाला कैंट सराफा बाजार में स्वर्णकार संघ ने काली टी शर्ट पहनकर होली मनाई। उन्होंने सरकार के खिलाफ रोष जाहिर किया। उन्होंने इस अवसर पर रोष जुलूस भी निकाला और सदर बाजार चौक पर एकत्रित होकर भारी प्रदर्शन किया। इस अवसर पर स्वर्णकार संघ के राकेश वर्मा, प्रमोद वर्मा, शुभम वर्मा, इंद्रप्रकाश, शीशपाल भोला, नरेश वर्मा नेबताया कि जब तक सरकार उनकी मांग नहीं मानती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।