अंबाला शहर के श्रीकृष्ण कृपा गीता मंदिर में श्रीमद्भागवत कथा सुनते श्रद्धालु। प्रवक्ता
श्रीमद्भागवत कथा में रासलीला और बांसुरी के आध्यात्मिक महत्व पर डाला प्रकाश
संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला सिटी। श्रीकृष्ण कृपा गीता मंदिर में श्रीकृष्ण कृपा सेवा समिति की ओर से श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया गया। कथा के छठे दिन गोविंद मुदगिल शास्त्री ने रासलीला और बांसुरी के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डाला।
शास्त्री ने बताया कि बांसुरी भगवान श्रीकृष्ण को अत्यंत प्रिय है। इसके तीन गुण हैं, यह सुरीली, सीधी और भीतर से खाली होती है। उन्होंने कहा कि सरल व्यवहार, मधुर वाणी और अहंकार मुक्त हृदय वाले व्यक्ति पर ईश्वर की विशेष कृपा होती है। शास्त्री ने महारास को जीव और परमात्मा के मिलन का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि रासलीला के माध्यम से भगवान ने जीवात्मा को ईश्वर से जुड़ने का संदेश दिया। सकारात्मक विचार जीवन को नई दिशा देते हैं। मन का भाव बदलते ही व्यक्ति का संसार बदल जाता है। कथा के दौरान वृंदावन के पांच प्रमुख स्वरूपों बांके बिहारी, राधा वल्लभ, राधा रमण, गोविंद देव और श्रीनाथ जी का भी उल्लेख किया गया।
भागवत महापुराण का महत्व
हरिद्वार से आए महामंडलेश्वर डॉ. स्वामी विवेकानंद महाराज ने भी कार्यक्रम में भाग लिया। उनके उत्तराधिकारी रविंद्रानंद ने भागवत महापुराण की महिमा बताई। उन्होंने कहा कि यह ग्रंथ भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का अद्भुत संगम है। इसके श्रवण से मोक्ष की प्राप्ति होती है। कार्यक्रम के अंत में समिति प्रधान विनोद बंसल और प्रेम सागर ने सपरिवार भागवत महापुराण का पूजन किया।
अंबाला शहर के श्रीकृष्ण कृपा गीता मंदिर में श्रीमद्भागवत कथा सुनते श्रद्धालु। प्रवक्ता