अंबाला सिटी के श्री महाकाली मां दुखभंजनी मंदिर में नवरात्रि के अवसर पर स्वर्ण मुकुट से माता की ताजपोशी की गई। इस आयोजन में दूर-दूर से भक्त पहुंचे और मेले में भाग लिया। आयोजन से धार्मिक उल्लास और श्रद्धालुओं की भीड़ देखी गई।
अंबाला सिटी। श्री महाकाली मां दुखभंजनी मंदिर में गुरुवार को माता जी की स्वर्ण मुकुट से ताजपोशी की गई। मंदिर के मुख्य पुजारी पंकज शर्मा ने बताया कि इस बार शारदीय नवरात्र में दिन बढ़ रहा है, इसलिए बुधवार और गुरुवार दोनों दिन माता के तृतीय स्वरूप मां चंद्रघंटा की आराधना की गई। संध्याकालीन सत्र में मां को पालकी में बिठाकर मंदिर की परिक्रमा की गई और उसके पश्चात मां की ताजपोशी का कार्यक्रम आयोजित हुआ। नवरात्र में प्रतिदिन मां का भव्य शृंगार अति सुखकारी है। मंदिर परिसर में लगे भव्य मेले में भगत दूर-दूर से पहुंचकर मां के दर्शनों का लाभ प्राप्त कर रहे हैं और कंजक पूजन के लिए खरीदारी कर रहे हैं। बच्चों के लिए भी आकर्षक झूलों का प्रबंध किया गया है।
उन्होंने बताया कि मां दुर्गा की तृतीय शक्ति का नाम चंद्रघंटा है। नवरात्रि विग्रह के तीसरे दिन इन का पूजन किया जाता है। मां का यह स्वरूप शांतिदायक और कल्याणकारी है। इनके माथे पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र है, इसीलिए इन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। इनका शरीर स्वर्ण के समान उज्ज्वल है, इनके दस हाथ हैं। दसों हाथों में खड्ग, बाण आदि शस्त्र सुशोभित रहते हैं। इनका वाहन सिंह है। इनकी मुद्रा युद्ध के लिए उद्यत रहने वाली है। इनके घंटे की भयानक चडंध्वनि से दानव, अत्याचारी, दैत्य, राक्षस डरते रहते हैं। नवरात्र की तीसरे दिन की पूजा का अत्यधिक महत्त्व है। इस दिन साधक का मन मणिपुर चक्र में प्रविष्ट होता है। मां चंद्रघंटा की कृपा से साधक को अलौकिक दर्शन होते हैं और मां चंद्रघंटा की कृपा से साधक के समस्त पाप और बाधाएं नष्ट हो जाती हैं। इनकी आराधना सद्य: फलदायी है। इनकी मुद्रा सदैव युद्ध के लिए अभिमुख रहने की होती हैं, अत: भक्तों के कष्ट का निवारण यह शीघ्र कर देती हैं।