अंबाला। इंद्रपुरी में चल रही श्रीमद्भागवत सप्ताह यज्ञ के छठे दिन कथा के मुख्य यजमान अमरनाथ शर्मा व संतोष शर्मा ने भागवत पूजन कर कथा शुरू कराई। इस अवसर पर कथावाचक पंडित विकास चंद्र शास्त्री ने रास और महारास में अंतर बताया। उन्होंने कहा कि रास जीव को परमात्मा के निकट ले जाता है वहीं महारास जीव का परमात्मा से मिलन करवाता है। भगवान भगत को अपनी शरण में लेने से पहले उसकी परीक्षा लेते हैं। अगर वक्त सांसारिक माया साथ लेकर भगवान के शरण में आया है तो भगवान उसे स्वीकार नहीं करते और अगर संसार को त्याग कर भगवान की शरण में आया है। तब भगवान उसे अपने में मिला लेते हैं यही महारास है।
उन्होंने कहा कि भगवान श्री कृष्ण ने गोपियों को ब्रह्म ज्ञान प्रदान कर कृतार्थ किया और अनेक लीलाओं के साथ कई दैत्यों का उद्धार किया। उन्होंने कहा कि भगवान के वैसे तो 16108 विवाह हुए हैं लेकिन उनका पहला विवाह देवी रुक्मिणी से हुआ। रुक्मिणी साक्षात लक्ष्मी ही हैं। हर युग में जब भी लक्ष्मी का प्रादुर्भाव होता है तो वह नारायण का ही वरण करती हैं। लक्ष्मी वहीं वास करती हैं जहां श्री हरिनारायण का निवास होता है। इस मौके पर भगवान श्री कृष्ण-रुक्मिणी की सुंदर झांकी के माध्यम से विवाह का दर्शन कराया गया। इस दौरान कृष्ण भजनों पर श्रद्धालु झूमते हुए नजर आए। कथा विश्राम पर व्यास पूजन किया गया।