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कूड़े में योजना, लोग गंदगी से बेहाल

Mon, 26 Sep 2016 12:28 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला/अंबाला
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अंबाला में जमा कूड़ा। - फोटो : अमर उजाला
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एक ओर पीएम मोदी का स्वच्छता अभियान तो दूसरी ओर स्वच्छता के हालात बदतर। एक दशक में स्वच्छता को लेकर चलाई तमाम योजनाएं औंधे मुंह गिरी हैं, जबकि आठ साले पहले स्थापित किया गया सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट ही ‘वेस्ट’ हो चुका है, लेकिन इसका फायदा नहीं मिला। रोजाना ट्विन सिटी का कचरा एक जगह से उठाकर दूसरी जगह डंप किया जा रहा है, लेकिन जनता को इससे राहत नहीं मिल पा रही है। हर बार निगम की बैठक में इस मुद्दे पर बहस होती है, लेकिन इसका हल कोई नहीं निकल पाया है।
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योजनाएं जो फेल रहीं
- सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट में कूड़ा पहुंचाया जाएगा, जहां इससे खाद बनेगी और निगम को आमदनी होगी, प्लांट ही बंद हो गया
- ट्विन सिटी को कूड़े से निजात दिलाने के लिए करोड़ों रुपये के उपकरण खरीदे गए जो बर्बाद हो गए
- तत्कालीन डीसी के ऑर्डर पर योजना बनी कि रात के समय में साफ सफाई की जाएगी, योजना फेल
- तमाम कॉलोनियों में कूड़ा डालने के लिए डस्टबिन रखे जाएंगे, लेकिन यह योजना भी अधूरी
- ट्विन सिटी में सुलभ इंटरनेशनल के साथ टाइअप कर सौ-सौ सफाई कर्मचारी रखे, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ, भ्रष्टाचार के आरोप लगे
- डोर टू डो कूड़ा कलेक्शन किया जाएगा, लेकिन अब यह योजना भी फ्लाप शो बनी
- कूड़ा कलेक्शन के लिए योजना का खाका खींचने के लिए एक टीम शिमला गई, कोई फायदा नहीं
- गंदगी से बचने के लिए डेयरियां बाहर ले जाने की योजना बनी, लेकिन यह आज भी अधूरी है
- नालों की सफाई के लिए योजनाएं बनाई, लेकिन सफाई नहीं हो पाई

डंपिंग को लेकर बहस, सफाई करवाने को धरना
एक कोने से गंदगी उठाकर दूसरी जगह पर फेंकी जा रही है। इसी को लेकर कई बार विवाद हो चुका है। अंबाला सिटी में नारायणगढ़ रोड पर एक गांव में कूड़ा डंप करने पर ग्रामीणों से विवाद हो गया। इसके चलते कूड़ा डंप करना बंद किया गया। इसी तरह गांव पटवी में स्थित सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट में लगे गंदगी के ढेरों का ग्रामीणों ने विरोध किया। इसके अलावा कैंट के पल्लेदार मोहल्ला के लोगोें ने सफाई व्यवस्था दुरुस्त न होने पर सड़क पर ही धरना दे दिया, जो दो दिनों तक चला। इसके बाद मेयर के आश्वासन के बाद लोगों ने धरना समाप्त किया।

यह कहते हैं लोग
यदि सरकारी छुट्टी है तो कूड़ा कर्कट नहीं उठाया जाएगा। अन्य दिनों में तो नाम के लिए सफाई होती है, जबकि हर चौराहे पर कूड़े के ढेर लगे दिखते हैं। अधिकारियों में इच्छा शक्ति की कमी है। जनप्रतिनिधि भी बैठकों में मुद्दा तो रखते हैं, लेकिन इसका हल नहीं निकलता।
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- आनंद मोहन शुक्ला, समाज सेवी

सिर्फ योजनाएं बनाने से काम नहीं होगा, मॉनीटरिंग भी जरूरी है। सबसे जरूरी है कि जवाबदेही तय की जाए, उसके बाद योजना लागू की जाए। निगम की सभी योजनाएं जमीन पर फेल हो चुकी हैं। साफ है कि या तो मॉनीटरिंग नहीं होती या फिर जवाबदेही नहीं है।
- अजय कुमार, शॉपकीकर, अंबाला

सफाई व्यवस्था को लेकर दोहरे मापदंड दिखाई देते हैं। सरकारी आवासों या कार्यालयों के आसपास तो पूरी तरह से सफाई दिखती है या फिर नेताओं के घरों के आसपास सफाई है। लेकिन बाजारों या कॉलोनियों में ऐसी सफाई क्यों नहीं होती? इसी से दिखता है कि सफाई व्यवस्था को लेकर क्या हो रहा है।
- स्नेहपाल धीमान, इनवेस्टमेंट एक्सपर्ट

जब तक सख्ती नहीं होती तब कुछ काम नहीं होता। लालकुर्ती में ही देख लो, हालात बिगड़े तो सफाई अभियान चला। सब कुछ रामभरोसे चल रहा है, जबकि सफाई को लेकर तो स्थिति सुधरने का नाम नहीं ले रही। जब निगम के डस्टबिन ही नहीं हैं तो कैसे दावा करते हैं कि सफाई व्यवस्था के लिए हर तरह से प्रयास किए जा रहे हैं।
- राजेश नैनीवाल, जॉब एक्सपर्ट

सफाई व्यवस्था को लेकर निगम काम कर रहा है, जबकि अधिकारियों को भी जिम्मेदारी निभानी चाहिए। हर बैठक में इस मुद्दे पर बातचीत होती है, लेकिन अधिकारियों द्वारा सिर्फ आश्वासन दिया जाता है। इसे लेकर अधिकारियों से फिर बातचीत होगी, ताकि इस काम की मॉनीटरिंग हो ताकि सफाई व्यवस्था को दुरुस्त किया जाए।
- रमेश मल, मेयर नगर निगम अंबाला

ट्विन सिटी में सफाई व्यवस्था को लेकर मैं खुद मॉनीटरिंग करूंगा। यदि कहीं पर कोई कमी दिखती है, तो सख्ती से कार्रवाई की जाएगी। ट्विन सिटी में गंदगी की समस्या को खत्म किया जाएगा, ताकि जनता को स्वच्छता का माहौल मिल सके।
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- दिनेश यादव, आयुक्त नगर निगम
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