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पुलिस कर्मियों ने ट्रेनिंग कर रहे 300 रंगरूटों से वर्दी और बर्तनों के नाम पर वसूले 1

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गृहमंत्री अनिल विज के गृह जिला अंबाला शहर के पुलिस लाइन स्थित (एचएपी) हरियाणा आर्म्ड पुलिस सेंटर में ट्रेनिंग ले रहे 300 रंगरूटों को वर्दी और बर्तन देने के नाम पर करीब 18 लाख वसूलने का आरोप लगा है। आरोप है कि कई माह यह फर्जीवाड़ा चलता रहा और अधिकारियों को भनक तक नहीं लगने दी। पर्दा तब उठा जब किसी रंगरूट ने गुमनाम पत्र आलाधिकारियों के नाम भेज दिया। इससे पूरे महकमे में हड़कंप मच गया लेकिन अभी कोई भी मामले में मुंह खोलने को तैैयार नहीं है। शिकायतकर्ता ने अपनी शिकायत में उन चार कर्मचारियों के नाम भी लिखे हैं जिन्होंने इस पूरे फर्जीवाड़े में अहम भूमिका निभाई और रंगरूटों को पैसे देने के लिए मजबूर किया।
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इस तरह रंगरूटों से वसूले गए लाखों
-गुमनाम पत्र में बताया गया कि नई वर्दी बनाकर देने के नाम पर 300 रंगरूटों से 7 लाख रुपये एकत्रित किए गए। आदेशक तक बात न पहुंचे इसलिए उनके नजदीकी कर्मियों व खरीददारी से संबंधित स्टाफ कर्मियों को खेल में शामिल किया गया। ये लोग सीधे रंगरूटों से पैसे मांगते, यदि वे इंकार करते तो गैरहाजिर व बर्खास्त करने की धमकी दी जाती है। कुछ रंगरूटों को नकली व सस्ता कपड़ा खरीदकर वर्दियां दे दी गई ताकि फर्जीवाड़ा आगे भी इसी प्रकार चलता रहे। खेल यहीं समाप्त नहीं हुआ, वर्दी के इन्हीं रंगरूटों से बर्तन व बाल्टी इत्यादि दिलाने के नाम पर पांच लाख रुपये लिए गए। यहां भी खानापूर्ति की गई। कुछ को घटिया क्वालिटी के बर्तन दिए गए जबकि अधिकतर मन मसोसकर रह गए। रंगरूट कर्मियों के झांसे में आ गए तो तीसरी बार फिर वर्दी के लिए छह लाख रुपये लिए गए लेकिन इस बार किसी को भी वर्दी व अन्य सामान नहीं दिया गया।
सरकार से किसी प्रकार की नहीं ली गई इजाजत
शिकायत के मुताबिक खरीददारी के लिए न तो सरकार से कोई अनुमति ली न ही विभाग को अवगत कराया गया।
खरीददारी भी किसी आथॉराइड डीलर से नहीं की गई। चार कर्मचारियों ने सरेआम अफसरों की नाक के नीचे यह खेल खेला।
गुमनाम पत्र में लिखा जांच में कर दी जाएगी खानापूर्ति
शिकायत में लिखा गया है कि पूरे मामले में खानापूर्ति के लिए डीएसपी को जांच का जिम्मा दिया जाएगा ताकि बदनामी से बचा जा सके। उच्च स्तरीय जांच के अलावा चारों कर्मियों को बर्खास्त कर केस दर्ज कराने की गुहार भी लगाई गई।
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डीएसपी से कराई जा रही गोपनीय जांच : स्मृति चौधरी, एचएपी कमांडेंट
एचएपी कमांडेंट स्मृति चौधरी के अनुसार यह एक गोपनीय जांच है। डीएसपी से इसकी जांच कराई जा रही है।
जो वास्तविकता सामने आएगी, उसे आलाधिकारियों को अवगत करा दिया जाएगा। उन्हीं के दिशा-निर्देश पर कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
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