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बंद होंगे फर्जी कॉलेज, परीक्षा दोबारा देनी ही पड़ेगी

Fri, 26 Jun 2015 12:49 AM IST
ब्यूूराे/अमर उजाला अंबाला
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नर्सिंग स्टूडेंट्स द्वारा स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज के खिलाफ मोर्चा खोल देने के बाद भी सेहत मंत्री विज अपने फैसले पर अडिग हैं।
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उन्होंने स्पष्ट कहा कि प्रदेश में फर्जी तरीके से खोले गए नर्सिंग कॉलेज बंद होंगे और इन छात्राओं को अधिकृत बोर्ड के माध्यम से दोबारा परीक्षा देनी होगी।

कई दिनों से राज्य के विभिन्न सूबों के ऐसे ही कॉलेजों में पढ़ने वाली नर्सिंग छात्राएं विज घर पर आकर प्रदर्शन और हंगामा कर रही हैं। एक वह छात्राएं नेशनल हाईवे भी जाम कर चुकी हैं।
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इसके बाद विज ने इन छात्राओं से सब्र से काम लेने और बात समझने की गुजारिशकी थी।

विज ने कहा कि ऐसे फर्जी नर्सिंग कालेजों व स्कूलों से ली गई डिग्रियां, आम आदमी पार्टी के कानून मंत्री तोमर की फर्जी डिग्री जैसी होगी और हरियाणा सरकार इसे सहन नहीं करेगी। छात्राएं इस बात की गंभीरता को समझें और जिद छोड़कर अपना ध्यान पढ़ाई में लगाएं। जल्द ही उनकी परीक्षा फिर से करवाई जाएगी।

विज ने बताया कि प्रदेश में 80 के करीब नर्सिंग कॉलेज और स्कूल ऐसे हैं, जो बिना अनुमति या इंडियन नर्सिंग काउंसिल की मान्यता के बिना ही खोल दिए गए हैं।

इनका जब कानूनी रूप से वजूद नहीं है, तो इनकी डिग्रियां कैसे मान्य होंगी। ऐसे आठ नर्सिंग कॉलेजो को बंद करने की प्रक्रिया पूरी होने वाली है। इसके बाद अन्य फर्जी स्कूलों और कॉलेजों को भी बंद करने का नोटिस दिया जाएगा।

हुड्डा के सिर फोड़ा ठीकरा
विज ने पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा को नर्सिंग छात्राओं की वर्तमान स्थिति का जिम्मेदार बताया। कहा कि हुड्डा के कार्यकाल में ही फर्जी ढंग से नर्सिंग स्कूल और कॉलेज खुुले।

इन्होंने मनमर्जी से परीक्षाएं लेकर डिग्रियां बांटीं। कानून का पालन न करने के कारण इनको सर्टिफिकेट देना फर्जी है।

कासनी का तबादला सीएम का फैसला
आईएएस प्रदीप कासनी के 17 साल में 63वें तबादले पर टिप्पणी करने से सेहत मंत्री विज ने परहेज किया। उन्होंने कहा कि प्रदीप कासनी और अन्य आईएएस अफसरों का तबादला सीएम लेते हैं। वह इस पर टिप्पणी नहीं करेंगे।
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पूर्व सैनिकों का मुद्दा केंद्र का
पूर्व सैनिकों के मामले में विज का कहना है कि पूर्व सैनिकों का मुद्दा उनके बस की बात नहीं है। वे तो उनकी बात एक पत्र के माध्यम से पीएम मोदी को भेज देंगे। इस बारे में निर्णय लेने का अधिकार केंद्र के पास है। वह केंद्र से पूर्व सैनिकों का धरना समाप्त करने का आग्रह कर सकते हैं।
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