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28 करोड़ का सरकारी चावल डकार गए राइस मिलर्स

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28 करोड़ का सरकारी चावल डकार गए राइस मिलर्स, निकलवाने में छूटे पसीने
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- 21 करोड़ का मामला चल रहा हाईकोर्ट, 5.44 करोड़ के मामले में 10 को सुनवाई
- करीब 2 करोड़ रुपये के देनदार की प्रापर्टी अभी तक नहीं कर पाया विभाग सील
उमेश भार्गव
अंबाला। सरकार से करोड़ों रुपये का धान लेकर वापस में चावल नहीं लौटाने के मामले में अंबाला के दो राइस मिलर्स की दिक्कतें बढ़ती नजर आ रही हैं। जबकि तीसरे का मामला हाईकोर्ट में चल रहा है। इनमें बराड़ा के रामा राइस मिल पर 5.44 करोड़ की देनदारी खाद्य आपूर्ति विभाग की है जबकि राइस मिल संचालक करीब 6 करोड़ रुपये का देनदार स्टेट बैंक ऑफ इंडिया है।
इस मामले में अब 10 नवंबर को डीसी कोर्ट में सुनवाई होगी। राइस मिल संचालक की प्रापर्टी विभाग ने सील कर दी है लेकिन स्टेट बैंक ऑफ इंडिया इस प्रापर्टी पर पहला हक अपना जता रहा है जबकि खाद्य आपूर्ति विभाग इस पर सबसे पहला दावा अपना जता रहा है लेकिन पहला दावा किसका होगा यह डीसी कोर्ट तय करेगा। 5.44 करोड़ के मामले में रामा मिल्स बराड़ा के पार्टनर संजय गंभीर, मोहित गंभीर, आशिम गंभीर तीनों भाइयों व इनके गारंटर रविंद्र गौड़ पर केस दर्ज हो चुका है जबकि 21 करोड़ के मामले में नीरज गोयल व अतुल गोयल को डीएफएससी निशांत राठी ने आरोपी बनाते हुए केस दर्ज करवाया था।
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चार साल बाद भी नहीं हुआ भुगतान
बराड़ा के ही रिची-रिच एग्रो फूड प्राइवेट लिमिटेड पर करीब 21 करोड़ की देनदारी बकाया है। यह मामला वर्ष 2015-16 का है। करीब 300 गाड़ियां चावल की राइस मिल संचालक ने लौटानी है। इस मामले में भी प्रापर्टी सील हो चुकी हैं लेकिन निलामी आज तक नहीं हो सकी क्योंकि इसमें भी बैंक और फूड सप्लाई विभाग के बीच पहली प्राथमिकता को लेकर खींचतान चल रही है।
90 लाख दिए अब 2 करोड़ बकाया
अंबाला शहर की महावीर कारपोरेशन राइस मिल पर करीब 2 करोड़ रुपये के चावल बकाया हैं। जब विभाग ने सख्ती दिखाई थी तो राइस मिलर्स ने 90 लाख रुपये जमा करवा दिए थे। आश्वासन दिया था कि जल्द ही शेष राशि भी लौटा देगा। इसीलिए अभी इस मामले में विभाग ने प्रापर्टी सील नहीं की।
किसने कितना डकारा सरकारी चावल
मिल का नाम------लौटाई जाने वाली चावल की गाड़ियों की संख्या
रिची-रिच-----300
रमा राइस----80
महावीर कारपोरेशन---40
बता दें कि करीब एक गाड़ी की कीमत 7 लाख रुपये है। एक गाड़ी में करीब 270 क्विंटल चावल आता है। रामा राइस मिल्स बराड़ा ने 2347 एमटी धान लिया था। इसके एवज में उसने सरकार को 1572.51 एमटी चावल लौटाना था जोकि नहीं लौटाया। इस पर 12 प्रतिशत ब्याज और टैक्स अलग बनता है। जबकि रिची-रिच राइस मिल्स ने 16 हजार 783 एमटी धान लिया था और इसमें से करीब 6 हजार एमटी चावल वापस लौटाना था जोकि नहीं लौटाया। इस तरह इस पर 12 प्रतिशत ब्याज और टैक्स लगकर यह 21 करोड़ के पार हो चुका है।
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रमा राइस मिल्स मामले में अब 10 अक्तूबर को डीसी कोर्ट में सुनवाई है क्योंकि एसबीआई भी प्रापर्टी पर अपना दावा कर रही है और हम भी। प्राथमिकता किसकी होगी यह कोर्ट तय करेगा। खाद्य आपूर्ति विभाग के ही मिल ने 5.4 करोड़ रुपये देने हैं। महावीर कारपोरेशन पर इस समय करीब दो करोड़ की देनदारी है। 40 गाड़ियां चावल लौटाने थे इसमें से 90 लाख रुपये उसने जमा करवा दिए हैं। इसीलिए अभी उसे समय दिया गया है। देरी करने पर उसकी प्रापर्टी भी सील कर नीलाम करने की कार्रवाई की जाएगी।
-अनिल कुमार, डीएफएससी।
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