अंबाला सिटी: अरहर दाल की खेती कटाई को दिखाते हुए किसान। - संवाद
- फोटो : Ambala
चार किसानों ने 30 साल से चल रहे दालों के सूखे को अंबाला में समाप्त करने के लिए बड़ी पहल की है। इन चारों ने जिले में लुप्त हो चुकी अरहर की दाल को फिर से उगाकर न केवल कमाल किया बल्कि दूसरे किसानों के लिए भी अब यह किसी प्रेरणा से कम नहीं हैं। इन किसानों ने करीब साढ़े 5 एकड़ में प्रयोग के तौर खेतों में अरहर दाल की बिजाई की। परिणाम यह रहा कि करीब 135 दिनों में यह दाल पककर तैयार हो गई। इस तरह करीब साढ़े चार महीनों में प्रति एकड़ इन्होंने करीब 30 हजार रुपये का मुनाफा भी कमाया, जबकि दाल की बिजाई से लेकर उसकी कटाई तक करीब 6 हजार रुपये का खर्च आया। अब इन्हीं किसानों के बूते कृषि विज्ञान केंद्र दूसरे किसानों को भी दल्हनी फसलों के लिए प्रेरित करने में जुट गया है।
दरअसल जिले के चार किसानों जिनमें समलेहड़ी के युवा किसान सुशील ने दो, खुड्डा के अशोक ने एक, फुलेल माजरा के ओंकार नाथ सैनी ने दो और घसीटपुर के युवा किसान अभिषेक राणा ने आधा एकड़ में बार आर्गेनिक दाल की खेती प्रयोग के तौर पर की। इसमें उन्हें उम्मीद से बढ़कर बचत हुई है। किसानों की मानें तो यह खेती करीब करीब 30 साल पहले जिले में अच्छे स्तर पर की जाती थी। उसके बाद एकाएक किसानों ने सिर्फ गेहूं और धान की खेती करना शुरू कर दिया और अंबाला के खेतों में यह दाल पूरी तरह से विलुप्त हो गई थी। लेकिन हमने हमने कृषि विज्ञान केंद्र तेपला की मदद से दाल की फसल लगाई और कामयाब रहे। प्रत्येक किसान के खेत में करीब 20 क्विंटल आर्गेनिक दाल की पैदावर हुई जिसका मार्केट में दाम करीब 170 से 175 रुपये प्रति किलो आसानी से मिल गया।
अंबाला में इस साल पहली बार 30 साल के बाद अरहर की खेती हुई है। यह दाल अंबाला के किसानों के खेतों में लुप्त हो चुकी थी। इसके लिए अभियान चलाकर किसानों को दलहन फसल की खेती करने के लिए प्रोत्साहित किया गया। इसी कारण किसानों ने अरहर दाल की बुआई की। चार किसानों ने करीब साढ़े पांच एकड़ में फसल लगाई। एक एकड़ में 6 से 7 हजार रुपये लगाकर 30 से 32 हजार रुपये तक का मुनाफा कमा रहे हैं। आगे भी प्रयास रहेगा कि वह अधिक से अधिक किसानों को परंपरागत खेती के स्थान पर दलहन खेती की और रुख करें।
-डॉ. राजेंद्र, कृषि विशेषज्ञ, केविके, तेपला