हरिओम शर्मा कुरकुरी खस्ता गजक दिखाते हुए। संवाद
अंबाला। आगरा से अंबाला आकर कारोबारी ग्वालियर की गजक का व्यापार कर रहे हैं। यह कारोबारी साल में चार महीने के लिए अंबाला आते हैं। जनवरी में लोहड़ी के बाद वापस अपने घर की ओर चले जाते हैं। कारोबारी ज्यादातर गजक की आइटम बनाते हैं। इसमें तिल और गुड़ से बने शुगर फ्री अजूबा और अलसी के तिल वाले लड्डू खास हैं। इसके अलावा गजक की खस्ता जो नरम और कुरकुरी है यह खस्ता बुजुर्गाें के लिए सबसे अच्छी है जो मुंह में जाते ही घुल जाती है। इसके साथ ही कारोबारी तिल वाली गुलाब पट्टी, रेवडी गुड़ और चीनी, ड्राई फ्रूट वाली गजक, मूंगफली वाली गजक, मुट्ठी वाली गजक, गुड की पट्टी, मरोडी वाली गजक आदि बनाते हैं। जो लोगों को बहुत पसंद आ रही हैं।
25 साल से कारोबार करने आ रहे अंबाला
उत्तर प्रदेश के आगरा के निवासी हरिओम शर्मा ने बताया कि वह अंबाला में पिछले 25 साल से गजक का कारोबार कर रहे हैं। शुरू में वह अंबाला अकेले आते थे। इसके बाद वह अपने परिवार को भी साथ लाने लगे। इस काम में उनका परिवार भी साथ देता है। वह छावनी के कच्चा बाजार में दुकान लगाते हैं। इसके अलावा उनका बेटा लवकुश भी एक अन्य दुकान लगाता है वह इस दुकान पर गजक, गुड़ और तल की सभी आइटम रखते हैं।
अलसी के लड्डू और शुगर फ्री अजूबा है खास
आगरा निवासी साहूकार ने बताया कि वह वर्ष 1995 में कारोबार करने के लिए पहली बार अंबाला आए। तब से वह लगातार चार महीने के लिए अंबाला आते हैं और लोहड़ी के अगले दिन वापस चले जाते हैं। उनके पास तिल और गुड़ से बने शुगर फ्री अजूबा इसमें मीठा कम मात्रा होता है। इसके साथ ही अलसी के तिल वाले लड्डू बनाते हैं खास हैं। जो किसी के पास नहीं मिलते यह दोनों आइटम वह खुद बनाते हैं। इसके अलावा उनके पास सभी तरह की गजक और पट्टी मिलती है।
हरिओम शर्मा कुरकुरी खस्ता गजक दिखाते हुए। संवाद