- एक्स-रे और अल्ट्रसाउंड की भी नहीं सुविधा, मरीज झेल रहे परेशानी
पूर्ण सिंह
बराड़ा। स्वास्थ्य विभाग भले ही बेहतर सुविधाएं देने का दावा करता हो, मगर ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य केंद्रों में स्टाफ तक पूरा नहीं है। इसके कारण गंभीर परिस्थिति में मरीजों को रेफर करने के अलावा कोई विकल्प नहीं रह जाता है। बराड़ा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के भी ऐसे ही हालात हैं। यहां न तो पर्याप्त स्टाफ है और न सुविधाएं। कोई गंभीर मरीज आ जाए तो उसे रेफर के नाम पर औपचारिकता निभा दी जाती है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अनुसार यहां सात विशेषज्ञ डॉक्टर होने चाहिए, लेकिन इस समय केवल दो ही काम कर रहे हैं। यहां पांच चिकित्सकों की कमी है।
एएसएमओ को उगाला प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का चार्ज दिया गया है इसलिए वह उगाला और बराड़ा दोनों जगह का काम देखते हैं। इसके अलावा यहां फार्मासिस्ट की कमी है। वहीं एक ही अकाउंटेंट बराड़ा सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, बिहटा, उगाला प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का काम संभाल रहा हैै। लैब में एलटी नहीं हैं। जो इस समय काम कर रहे हैं वह एनएचएम कर्मचारी हैं। -संवाद
एक ही एंबुलेंस
अस्पताल के पास एक ही एंबुलेंस है। अगर वह किसी मरीज को लाने या ले जाने के लिए चली जाए तो पीछे से दिक्कत हो जाती है। ऐसे में डायल 112 द्वारा भेजी गई एंबुलेंस ही लोगों के लिए सहारा बनती है। हालांकि विभाग की तरफ से दवाइयां पर्याप्त रूप से भेजी जाती हैं। अगर कोई कमी होती है तो प्राइवेट तौर पर दवाइयां खरीदकर मरीजों को दी जाती हैं। पिछले दिनों बाढ़ के दौरान महेश नगर में बने विभाग के वेयरहाउस में पानी घुस गया, जिस कारण अस्पताल में दवाइयां नहीं आ पाईं और प्राइवेट तौर पर दवाइयां खरीदकर मरीजों को दी गई।
आंखों का नहीं उपचार
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में स्थाई नेत्र रोग विशेषज्ञ न होने के कारण लोग परेशान हैं। लोगों को निजी अस्पतालों में धक्के खाने के लिए मजबूर होना पड़ता है। हालांकि कुछ महीने पहले अंबाला अस्पताल की ओर से यहां दिन निर्धारित करके नेत्ररोग विशेषज्ञ की टीम भेजी गई। जो कुछ दिन तो यहां आई लेकिन अब यह टीम यहां नहीं आती। जिस दिन यह डॉक्टर बराड़ा आते थे तो क्षेत्र के लोगों की भीड़ इलाज के लिए आती थी लेकिन अब फिर हाल वही हैं। लोगों को आंखों के इलाज के लिए भटकना पड़ रहा है। लोगों की मांग है कि यहां स्थाई आंखों का विशेषज्ञ लगाया जाए। बराड़ा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से कई गांवों के हजारों लोग जुड़े हैं। उन्हें अपने टेस्ट और इलाज के लिए दूर जाना पड़ता है। किसी को कोई चोट लग जाए या कोई दुर्घटना हो जाए तो यहां न तो एक्स-रे होगा और न ही अल्ट्रासाउंड की सुविधा है। एसएमओ डॉ. तरुण प्रसाद के अनुसार यहां काफी समय पुरानी एक्सरे मशीन है जो चालू हालत में नहीं हैै। एक्सरे मशीन और डेंटल एक्सरे मशीन भी यहां होनी बेहद जरूरी है।
डॉक्टरों की कमी और स्टाफ की कमी के बारे में विभाग को बताया जाता है। फिलहाल जो स्टाफ है उसके सहारे लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने का प्रयास किया जा रहा है।
- डॉ. तरुण प्रसाद, एसएमओ बराड़ा