अंबाला। न्यायालय की आंखों में धूल झोंक कर फर्जी दस्तावेजों के सहारे जमानत हासिल करने का मामले सामने आया है।
रेलवे के विशेष न्यायाधीश जेएमआईसी सचिन कुमार की अदालत ने इस साजिश का पर्दाफाश करते हुए आरोपी मनीष चौधरी, उसकी मां कांति देवी और एक अज्ञात जालसाज के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के आदेश दिए हैं। मामला रेलवे एक्ट के तहत दर्ज एक पुराने केस से जुड़ा है।
आरोपी मनीष चौधरी को जमानत दिलाने के लिए शिव राम नाम का एक व्यक्ति जमानतदार बनकर पेश हुआ था। शक होने पर जब अदालत ने एसपी रेलवे से जांच करवाई, तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। चंडीगढ़ यूआईडीएआई कार्यालय की रिपोर्ट के अनुसार, जमानत के लिए इस्तेमाल किया गया आधार कार्ड पूरी तरह फर्जी पाया गया। जमानत बांड 29 अगस्त 2023 को भरे गए थे, लेकिन उस पर दिया गया मोबाइल नंबर 12 सितंबर 2023 को चालू हुआ था।
यानी जब जमानत ली गई, तब वह नंबर अस्तित्व में ही नहीं था। जिस महिला वकील ने इन दस्तावेजों को सत्यापित किया था, उन्होंने भी कोर्ट को बताया कि उनके पास उस तथाकथित शिव राम का कोई पहचान पत्र या सही जानकारी नहीं है। संवाद