पिछले कुछ सालों में शुरू की गई जनहित की परियोजनाएं आज भी लटकी पड़ी हैं। ये परियोजनाएं विभिन्न कारणों से बरसों से लटकी पड़ी है। जिसका जनता को कोई लाभ नहीं हो रहा है। इसी को लेकर अंबाला के बाशिंदों और कारोबारियों में खासा रोष है।
परियोजना-एक- सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांटहालत- करीबन साढ़े पंद्रह करोड़ की लागत से इस परियोजना को वर्ष 2005 में केंद्र सरकार ने पटवी गांव में लगवाने के लिए मंजूर किया था। वर्ष 2008 में इसे तैयार किया गया और वर्ष 2010 के करीब इसकी शुरूआत की गई। लेकिन अफसरों की लापरवाही के चलते पर्यावरण मंत्रालय से एनओसी नहीं ली गई। लिहाजा, पर्यावरण मंत्रालय के हस्तक्षेप से प्लांट ठप हो गया। सरकार बदल गई, आज भी ये प्लांट ठप पड़ा है। इस प्लांट में शहर, कैंट व सैन्य क्षेत्र का कचरा फैंका जाना था, वहां इस कचरे से खाद बनाई जानी थी और फिर उसे किसानों को बेचा जाना था। मगर आज तक सबकुछ ठंडे बस्ते में है।
परियोजना -दो- सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांटहालत- वर्ष 2009 में करीबन सौ करोड़ के इस प्लांट को कैंट की रंगिया मंडी में बनाया जाना है। लेकिन इस मामले में भी अफसरों की बड़ी लापरवाही यह रही कि इस जमीन के एक विवादित लैंड का चयनित कर लिया गया। ये जमीन रिकार्ड में एक प्राइवेट व्यक्ति के नाम दर्ज है, मगर जिला प्रशासन ने इस जमीन को जबरन एक्वायर कर लिया। अब पिछले साल अदालत ने फैसला संबंधित व्यक्ति के हक में दे दिया है। जबकि अदालत ने यहां परियोजना पर स्टे करीबन तीन साल पहले ही लगा दिया था। इसलिए ये परियोजना भी पूरी तरह ठप पड़ी है।
परियोजना-तीन-साइंस टूल रूम एवं ट्रेनिंग इंस्टीट्यूटहालत- वर्ष 2013 में केंद्र सरकार ने इस परियोजना को तैयार किया था। देश की मेडिकल व सांइसटिफिक उपकरणों में सबसे बड़ी साइंस सिटी के लिए यह एक विशेष प्रोजेक्ट था। यहां केंद्रीय उद्योग मंत्री से बकायदा इसकी नीवं रखवाई गई थी। लेकिन इस परियोजना को दो साल गुजर चुके हैं, यहां शिलान्यास पत्थर ही लगा है, इसके अलावा यहां कोई काम नहीं हुआ। इसके अतिरिक्त यहां साइंस उद्योग के लिए साइंसटिफिक कलस्टर परियोजनाएं भी प्रस्तावित की गई । मगर ये परियोजनाएं भी आज तक एक कदम आगे नहीं बढ़ी।
परियोजना- चार- ट्रॉमा सेंटर की अपग्रेडेशनहालत- केंद्र की मदद के लिए अंबाला सिटी के सिविल अस्पताल स्थित ट्रामा सेंटर के अपग्रेडेशन के लिए करीबन आठ करोड़ का विशेष फंड पास करवाया था। लेकिन इसमें भी अफसर लापरवाही कर गए। किश्तों में आई चार करोड़ की राशि किस तरह अपग्रेडेशन में खर्च की गई, जिला प्रशासनिक अफसरों ने उसकी यूसी (यूटीलाइजेशन सर्टिफिकेट) ही समय रहते केंद्र को नहीं भेजा, लिहाजा शेष फंड लैप्स हो गया।
परियोजना-पांच- वर्ल्ड क्लास स्टेशनहालत- वर्ष 2009 में अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन को मॉडर्न स्टेशन से वर्ल्ड क्लास स्टेशन का दर्जा दिलवाया था। यहां सिक्योरिटी सिस्टम भी इंटीग्रेटिड किया जाना था। जबकि सुविधाओं के लिहाज से इस स्टेशन को पूरी तरह से वल्र्ड क्लास बनाना था। यहां स्टेशन परिसर में एक शानदार फूड प्लाजा बनाया जाना था। इसके अतिरिक्त अंबाला स्टेशन के पास ही एक बाटलिंग प्लांट भी बनाया जाना था। लेकिन सरकार बदल गई, अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन को लेकर सभी महत्वकांक्षी परियोजनाएं ठंडे बस्ते में चली गई है। इन परियोजनाओं को शुरू करने में कुछ लेटलतीफी तो कांग्रेस के वक्त में ही हो गई और अब ये परियोजनाएं भाजपा सरकार की अनदेखी का शिकार है।
परियोजना-छह- चंडीगढ़-नारायणगढ़- जगाधरी रेलवे लाइनहालत- वर्ष 2010 में चंडीगढ़ वाया नारायणगढ़ से जगाधरी तक नई रेलवे लाइन बनाने का प्रस्ताव पास करवाया था। लेकिन अभी तक इस परियोजना का केवल सर्वे हो पाया। लोग इस रेलवे लाइन को जल्द से जल्द बनवाने करवाने की मांग करते रहे। आज भी लोगों की ये मांग बुलंद है, क्योंकि रेलवे लाइन बनने से नारायणगढ़, कालाअंब जैसे औद्योगिक इलाके को बहुत राहत मिलेगी।। अब भाजपा भी इलाकावासियों को ये समझाने में लगी है कि वे रेलमंत्री से बातचीत करके जल्द इस रेलवे लाइन के परियोजना को आगे बढ़ाएंगें।
परियोजना- सात- सिक्सलेनिंग परियोजनाहालत- सरकार ने करीबन चार साल पहले अंबाला कैंट बस स्टैंड से टांगरी ब्रिज तक सड़क को सिक्सलेनिंग करने की परियोजना बनाई थी। चार साल में कई बार इसके एस्टीमेट बने और कई बार सर्वे हो गए। पूर्व सरकार ने बड़े-बड़े होर्डिंग्स लगाकर इस परियोजना की वाहवाही लूटने की कोशिश की थी। लेकिन सरकार बदली गई, लेकिन सिक्सलेनिंग नहीं बनी। लिहाजा इस सड़क पर जबरदस्त ट्रैफिक की वजह से आए दिन हादसे हो रहे हैं और सुबहोशाम यहां लंबा जाम लगा रहता है।
परियोजना- आठ- पंचकूला-साहा-जगाधरी फोरलेनिंगहालत- केंद्र ने वर्ष 2010 में पंचकूला से वाया शहजादपुर वाया साहा से जगाधरी नेशनल हाइवे को फोरलेनिंग करवाने का प्रस्ताव मंजूर किया था। पिछली सरकार में ही बजट एस्टीमेट और सर्वे का काम पूरा कर लिया गया था। पिछले सरकार में ही इस परियोजना की रफ्तार बहुत धीमी थी। अब नई सरकार बनने के करीबन सवा साल बाद अब पिछले दिनों केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी इस सड़क का शिलान्यास कर गए है। उन्होंने दावा किया है कि अब जल्द ये परियोजना पूरी हो जाएगी।
परियोजना-नौ-अंबाला-कैथल फोरलेनिंगहालत- वर्ष 2013 में अंबाला से कैथल फोरलेनिंग का प्रस्ताव पूर्व कांग्रेस सरकार ने पास किया था। बजट एस्टीमेट करीबन 724 करोड़ रुपये रखा गया था। लेकिन दो साल गुजरने के बावजूद भी ये परियोजना एक कदम नहीं आगे बढ़ी। अब नई भाजपा सरकार आई तो केंद्रीय सड़क मंत्री नितिन गडकरी ने कैथल फोरलेनिंग परियोजना का भी शिलान्यास किया और इस परियोजना को जल्द सिरे चढ़ाने का दावा किया।
परियोजना- दस- अंबाला सिटी बस स्टैंडहालत -करीबन ढाई लाख की आबादी वाले अंबाला सिटी में बस स्टैंड के नाम पर केवल एक बड़ा शेड है। छोटे से मैदान में बना ये बस स्टैंड सिटी के सबसे तंग कपड़ा मार्केट मार्केट के साथ सटा है। लिहाजा अंबाला डिपो को छोड़कर यहां किसी ओर डिपो की इक्का-दुक्का बस ही आते हैं। बसें, अग्रसेन व मानव चौक पर सड़क पर रूकती है, वहीं सवारियां छोड़ती और वहीं से सवारियां लादकर चलती बनती है। वर्ष 2005 से सिटी में बस स्टैंड बनाने को लेकर सियासत चल रही है। कई बार बस स्टैंड की साइट बदली गई, कई बार ड्राइंग बदली गई और कई बार एस्टीमेट तैयार हुए। लेकिन आज तक सिटी को बस स्टैंड नहीं मिला। लिहाजा सिटी के अधिकतर लोगों को कई किलोमीटर का फासला तय कर कैंट बस स्टैंड से बसें पकडनी पड़ती है।
परियोजना- ग्यारह - आवासीय फ्लैट योजनाहालत-आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए सरकार ने वर्ष 2008 में कैंट के घसीटपुर के पास हुड्डा के सेक्टर 33 व 34 में जेएनएनयूआरएम स्कीम के तहत 1660 वन रूम विद किचन व टॉयलट के फ्लैट्स तैयार किए थे। दरअसल, इन फ्लैट्स में झुग्गी, झोपड़ी व टपरी वाले लोगों को शिफ्ट करना था। लेकिन हुडा लाभार्थी लोगों को इन फ्लैट्स में शिफ्ट नहीं करवा पाया। आज तक केवल 200 फ्लैट्स ही आबंटित किए गए हैं। बाकी फ्लैट्स ऐसे ही बने जर्जर हो रहे हैं। जबकि प्रशासनिक अनदेखी के चलते यहां बने खिड़कियां, टूंटियां व दरवाजे व अन्य सामान तक यहां चोरी भी हो चुका है।
परियोजना- बारह - शहीद स्मारकहालत- वर्ष 2011 में हरियाणा सरकार ने जीटी रोड पर आईओसी डिपो के साथ खाली जमीन पर विश्वस्तरीय शहीद स्मारक बनाने की योजना बनाई थी। ये शहीद स्मारक सन 1857 के शहीदों को समर्पित था। ये परियोजना पहले तो दो साल ठप रही। लेकिन चुनाव के नजदीक आते ही इस पर हरकत शुरू हुई, लेकिन तब सरकार बदल गई। अब खेल मंत्री अनिल विज ने मनोहर लाल खट्टर से 12 मई 2015 को यहां शिलान्यास तो करवा दिया था और दावा किया है कि जल्द ही सरकार इसे बनवाएगी।
परियोजना-तेरह- कैंट अनाज व सब्जी मंडी शिफ्टिंग परियोजनाहालत- पूर्व सरकार ने अंबाला कैंट की अनाज मंडी व सब्जी मंडी को कैंट से बाहर बुहावा गांव में शिफ्ट करने की योजना वर्ष 2010 में बनाई थी। लेकिन आज तक ये परियोजना भी सिरे नहीं चढ़ी है। अब मंत्री अनिल विज ने पिछले दिनों इस मंडी का दौरा कर ये घोषणा की थी कि इसी साल कम से कम अनाज मंडी तो यहां शिफ्ट करवा दी जाएगी। अभी अनाज मंडी कैंट के बाजार में होने की वजह से हर सीजन में सड़के जाम हो जाती है और जनता की आफत आ जाती है।
परियोजना-चौदह- डेयरी शिफ्टिंग परियोजनाहालत- वर्ष 2005 में अंबाला कैंट व अंबाला सिटी से डेयरियों को शहर से बाहर निकालने की योजना बनाई थी। सिटी की डेयरियों को गांव खतौली व गांव कांवला में शिफ्ट करना था। लेकिन आज तक सिटी की सभी डेयरियां शहर से बाहर ही नहीं गई। जबकि अंबाला कैंट में तो हैरानी की बात यह कि दस साल में भी सरकार कैंट की डेयरियों को शिफ्ट करने के लिए जगह ही नहीं ढूंढ पाई है।
परियोजना-पंद्रह- साहा ग्रोथ सेंटरहालत- वर्ष 2000 में इस साहा ग्रोथ सेंटर की नीवं रखी गई थी। अंबाला के उद्योगों को और ज्यादा विकसित करने के लिए ये परियोजना बनाई थी। जिसके अंतर्गत उद्योगपतियों को साहा में छोटे-बड़े उपलब्ध करवाकर एक बड़ी इंडस्ट्री को डेवलप करना था। लेकिन चौटाला सरकार के जाने के बाद पहल तो ये परियोजना दस साल तक हुड्डा सरकार में उपेक्षित और अब भाजपा सरकार की भी अनदेखी का शिकार हो रही है। लिहाजा यहां प्लाट लेने वाले उद्यमी अब यहां अपनी इंडस्ट्री स्थापित करने में हिचकिचा रहे हैं।
पूर्व सरकार को केवल पत्थर लगाकर वाहवाही लूटने का शौक था। पूर्व लोकसभा सांसद कुमारी सैलजा और सीएम हुड्डा ने यही किया है। जो परियोजनाएं उन्होंने शुरू की थी उनको पूरा क्यों नहीं कराया, उनके पास तो वक्त ही वक्त था। ये परियोजनाएं उनके कार्यकाल में ही कई साल लटकी रहीं तो अब इसमें मौजूदा सरकार क्या कर सकती है। हां, फिर भी परियोजनाएं जनहित की हैं, इसलिए हमारी भी कोशिश है कि ये जल्द सिरे चढ़ें। इन पर ध्यान दिया जाएगा।-रत्नलाल कटारिया, सांसद, अंबाला
हमें पत्थरों का शौक नहीं, हम विकास में विश्वास रखते हैं। मौजूदा सांसद रतनलाल कटारिया यह बताएं कि अंबाला में रुकी परियोजनाओं पर उनकी सरकार ने क्या किया। अब तो केंद्र सरकार को सवा साल बीत चुका है। सांसद जनता को बताएं कि उन्होंने इन रुकी परियोजनाओं को कितनी रफ्तार दिलाई और कब तक ये परियोजनाएं सिरे चढ़ जाएंगी। हम तो अपने कार्यकाल में अंबाला के लिए बहुत कुछ ले आए थे। अब मौजूदा सांसद भी जनता को बता दें कि वे आखिरकार अभी तक अंबाला के लोगों के लिए कितनी नई परियोजनाएं ले आएं हैं।-कुमारी सैलजा, राज्यसभा सदस्य एवं पूर्व लोकसभा सांसद अंबाला
समाज सेवी बोले, कहीं बर्बाद न हो जाएं करोड़ोंइस बाबत समाज सेवी बलभद्र देव थापर, रमेश बंसल, आनंद मोहन शुक्ला, अश्वनी सलवान, बीडी गुप्ता, एस. दुग्गल, वीरेंद्र बंसत कहते हैं कि तमाम परियोजनाएं जनता व कारोबारियों के लिए थी। लेकिन अफसोस इस बात का है कि जनता को आज तक इन परियोजनाओं का कोई लाभ ही नहीं मिल पा रहा है। परियोजनाएं अधूरी ही लटकी पड़ी है, ऐसा न हो कि ये सभी परियोजनाएं ठप हो जाएं और इन पर लग चुका करोड़ों रुपया बर्बाद हो जाए। परियोजनाएं चाहे जिस भी सरकार की हो, उसे पूरा होना चाहिए।