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कम बरसी ‘प्रभु’ की ‘कृपा’, बड़ी परियोजना को तरसी झोली

Fri, 26 Feb 2016 05:28 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला/अंबाला
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अंबाला मंडल के लिए रेल बजट न तो पूरी तरह फीका रहा और न ही पूरी तरह से बढ़िया। अंबाला मंडल पर रेल मंत्री सुरेश ‘प्रभु’ की ‘कृपा’ तो बरसी सही, लेकिन उतना नहीं मिल पाया, जितने की अंबाला मंडल के रेल अफसरों, सांसदों और यात्रियों ने अपेक्षा की थी। इतना ही नहीं अंबाला मंडल के लिए बजट में किसी भी बड़ी नई परियोजना की घोषणा नहीं की गई।लिहाजा रेल बजट से अंबाला रेल मंडल के अफसर उतने संतुष्ट नहीं आए, जितने होने चाहिए थे। दूसरा, कारोबारी और आम यात्रियों ने भी इस बजट को केवल रेलवे की इंफ्रास्ट्रक्चर तक ही सीमित बताया, उनका कहना है कि इस रेल बजट से सीधे तौर पर यात्रियों को कुछ भी खास नहीं मिला। इसी के चलते मंडल के कारोबारियों, यात्रियों में मायूसी है।
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प्रभु ने ये दिया अंबाला मंडल कोपहला तोहफा- अब राजपुरा से चंडीगढ़ डायरेक्ट-घोषणा- इस रेल बजट में अंबाला मंडल के अधीनस्थ अंबाला सिटी के साथ लगते राजपुरा शहर से मोहाली तक 24 किलोमीटर की नई रेलवे लाइन को पास किया गया।-ये होगा फायदा- इस रेलवे लाइन की मांग बरसों पहले से चल रही थी, अब पटियाला व राजपुरा से मोहाली व चंडीगढ़ तक जाने के लिए यात्रियों व कारोबारियों को अंबाला कैंट आने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। अभी तक उन्हें रेल मार्ग के लिए अंबाला कैंट आकर चंडीगढ़ के लिए ट्रेन पकडनी पड़ती थी, लेकिन अब राजपुरा से सीधे मोहाली तक नई रेल लाइन बिछेगी और यात्री व कारोबारी वाया मोहाली सीधे चंडीगढ़ पहुंचेंगे

दूसरा तोहफा- चंडीगढ़-नारायणगढ़-जगाधरी लाइन को दिखी उम्मीद-घोषणा- चंडीगढ़ से जगाधरी वाया नारायणगढ़ (अंबाला) रेल लाइन को मिली रफ्तार। फिलहाल प्रारंभिक दौर में 25 करोड़ रुपये का बजट किया फाइनल।-ये होगा फायदा-ये रेलवे लाइन पहले की घोषित है, लेकिन अब इसे रेलवे ने 25 करोड़ का बजट दिया है। लाइन यदि बनती है तो अंबाला के नारायणगढ़, शहजादपुर, हिमाचल के कालाअंब, नाहन के लोगों को अंबाला आकर जगाधरी, सहारनपुर व चंडीगढ़ के लिए ट्रेन पकडने की जरूरत नहीं पड़ेगी। नारायणगढ़ से ही वे ट्रेन पकड़ पाएंगे और कारोबार को बढ़ावा मिलेगा।
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तीसरा तोहफा- राजपुरा से बठिंडा डबलिंग को मिलेगी रफ्तार-घोषणा- अंबाला मंडल के अंतर्गत राजपुरा से बठिंडा तक चल रहे रेलवे लाइन के दोहरीकरण के लिए 400 करोड़ रुपये के और बजट का प्रावधान किया गया।-ये होगा फायदा- बरसों पुरानी इस मांग के चलते राजपुरा स्टेशन से वाया पटियाला, बठिंडा तक रेल लाइन को दोहरा किया जा रहा है। ये काम थोड़ा धीमा चल रहा था, क्योंकि परियोजना में और बजट की घोषणा नहीं हो रही थी, अब 400 करोड़ और मिल गए हैं, ये प्रोजेक्ट तेजी से बढ़ेगा और इस रूट के यात्रियों और कारोबारियों को रेल सुविधा का ज्यादा लाभ मिलेगा।


चौथा तोहफा- शानदार बनेगा प्लेटफार्म नंबर एक-घोषणा- अंबाला मंडल के अंतर्गत पटियाला शहर के प्लेटफार्म नंबर एक का फैलाव किया जाएगा। -ये होगा फायदा- पटियाला एक महत्वपूर्ण शहर है, लेकिन उस लिहाज से वहां प्लेटफार्म नंबर एक छोटा है। अब इस प्लेटफार्म को दायरा और बढ़ाया जाएगा और स्टेशन पर प्लेटफार्म नंबर 1-ए बनाया जाएगा, ताकि इस प्लेटफार्म पर खड़े होने वाले यात्रियों को असुविधा न हो। और बैंच लगेेंगे, पीने के पानी की और ज्यादा व्यवस्था की जाएगी। 

पांचवा तोहफा- चंडीगढ़-बद्दी लाइन का काम होगा तेज-घोषणा- अंबाला मंडल के अंतर्गत चंडीगढ़ से बद्दी तक बिछाई जा रही रेलवे लाइन को 160 करोड़ का और बजट मिला।-ये होगा फायदा- व्यापारिक दृष्टि से चंडीगढ़ से बद्दी रेलवे लाइन को बिछाया जा रहा है। अंबाला रेल मंडल इस रेलवे लाइन को फायदा का सौदा मानती है, लेकिन बजट की कमी की वजह से इस परियोजना पर काम थोड़ा धीमा था, लेकिन अब इस परियोजना को और बजट की घोषण हुई है, इसलिए लाइन का काम और तेज होगा। लाइन बनने से बद्दी में स्थित इंडस्ट्री को अपने माल के आवागमन और यात्रियों को चंडीगढ़ तक रेल मार्ग के जरिए पहुंचने का बड़ा फायदा मिलेगा।

छठा तोहफा- मंडल में रेल हादसे होंगे कम-घोषणा- अंबाला रेल मंडल के अंतर्गत अंबाला-सहारनुपर, अंबाला-लुधियाना, सिरहंद-रोपड़ व कालका-चंडीगढ़ सेक्शन में 11 रेलवे ओवर ब्रिज और 4 लिमिटड हाइट सब-वे बनेंगे।ये होगा फायदा- अंबाला मंडल में कई सेक्शन ऐसे हैं, जिस पर रेल ट्रैफिक बहुत ही ज्यादा है। हरियाणा का सबसे बड़ा रेलवे स्टेशन चूंकि अंबाला छावनी है, इसलिए ढाई सौ से अधिक ट्रेने अंबाला कैंट से होकर ही गुजरती है। लेकिन अंबाला से जुड़े विभिन्न सेक्शनों में कई प्वाइंट ऐसे हैं, जहां हादसे ज्यादा होते हैं, इतना ही नहीं वहां बाहरी ट्रैफिक भी इतना ज्यादा है कि लोगों को फाटकों पर ही खड़े रहकर काफी वक्त खराब करना पड़ता है। लेकिन अब अंबाला-सहारनपुर सेक्शन में 4, अंबाला-लुधियाना सेक्शन में 3, सिरहंद-रोपड़ सेक्शन में 3 व कालका-चंडीगढ़ (पंचकूला, प्वाइंट 139-सी) पर एक रेलवे ओवरब्रिज बनेगा और इसी तरह अंबाला-लुधियाना सेक्शन में 1 व सिरहंद-रोपड़ में 3 लिमिटड हाइट सब वे बनेंगे। जिससे यात्रियों को बहुत फायदा होगा।

नई परियोजनाओं को नहीं दी प्रभु ने झंडी
-पहली मायूसी- अंबाला मंडल के अंतर्गत गिल (लुधियाना के पास) फ्रेट टर्मिनल बनाए जाने का एक बड़ा प्रोजेक्ट अफसरों ने रेल बजट में सेक्शन के लिए भेजा था। लेकिन रेल बजट में नहीं हो पाया पास। परियोजना इन वैटिंग रह गई।
-दूसरी मायूसी- अंबाला मंडल ने बड़े स्टेशनों पर लोडिंग और अनलोडिंग के सतही भाग को और ज्यादा इंप्रूव करना था। इसके लिए विशेष प्रोपोजल भेजा गया था। लेकिन इस परियोजना को भी बजट में शामिल नहीं किया।
-तीसरी मायूसी- अंबाला मंडल के कालका स्टेशन के यार्ड की रि-मॉडलिंग प्रोजेक्ट तैयार किया गया था। इस यार्ड का नक्शा पूरी तरह से बदला जाना था। इसके लिए 80 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया गया था। लेकिन रेल बजट में इस पर भी कोई ध्यान नहीं दिया गया।
-चौथी मायूसी- हरियाणा के सबसे बड़े रलवे स्टेशन अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन पर सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का एक बड़ा प्रोजेक्ट रेल बजट के लिए भेजा गया था। पहले चरण के लिए 5 करोड़ भी मांगे गए थे, लेकिन बजट में हाथ लगी मजबूती।
-पांचवी मायूसी- अति संवेदनशील सूची में शामिल अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन पर लगे तमाम पुरानी सीसीटीवी कैमरों को बदलकर हाई रेजुलेशन व नाइट विजिन सीसीटीव कैमरे लगाए जाने का प्रस्ताव भेजकर बजट का प्रावधान किए जाने की मांग की गई थी। लेकिन ये प्रस्ताव भी लटका।
-छठी मायूसी- अंबाला मंडल के अंतर्गत यात्रियों की सुविधाओं के लिए और भी कई तरह की स्टेशन स्तर पर सुविधाएं शुरू करने का प्रस्ताव भेजा गया था। लेकिन एक भी प्रस्ताव बजट में पास नहीं हो पाया।

इन परियोजनाओं पर नहीं हुई प्रभु की  नजर-ए-इनायत-अंबाला मंडल के चंडीगढ़ में आरपीएफ का ट्रेनिंग सेंटर का प्रस्ताव था, लटका रह गया-अंबाला मंडल में एक रेल कोच फैक्टरी का प्रस्ताव था, वो भी लटका रह गया-वर्ष 2010 के रेल बजट में रोजगार सृजन के लिए बॉटलिंग प्लांट का प्रोजेक्ट था, अभी तक जगह ही तय नहीं हो पा रही है।-वर्ष 2009 के रेल बजट में इंटीग्रेटिड सिक्योरिटी सिस्टम के तहत अंबाला स्टेशन को लिया गया था, अभी तक यहां सिक्योरिटी हाइटेक नहीं हुई, बजट की कमी, प्रोजेक्ट की रफ्तार पड़ी ठंडी

अंबाला मंडल ने कई प्रस्ताव और परियोजनाएं रेलवे बजट के लिए भेजी थी। कई पास हुई है, कई लटक गई है। खैर, कुछ नहीं से कुछ भला होता है। रेलवे बजट रेल के लिहाज से बहुत शानदार है। यात्रियों की सुविधाओं, सुरक्षा से लेकर रेल को वित्तीय रूप से मजबूत करने का पूरा ध्यान बजट में रखा गया है। यूं कहे तो रेल में जान फूंकने वाला बजट है, जिसका लाभ यात्रियों को भी मिलेगा।-दिनेश कुमार, मंडल रेल प्रबंधक, अंबाला मंडल

अंबाला मंडल को इस बजट में कई परियोजनाओं के लिए फंड मिला है। रेल बजट देखा जाएगा तो बहुत ही बढिय़ा ढंग से तैयार किया गया है। रेल यात्रियों से लेकर रेल की ढांचागत सरंचना को लाभ पहुंचेगा। कुछ परियोजनाएं हैं, जो पास होने से रह गई है, उसके लिए फिर से प्रयास जारी रहेगा। कुल मिलाकर रेलवे बजट में हर वर्ग के लिए कुछ न कुछ जरूरी है।-प्रवीण गौड़ द्विवेदी, वरिष्ठ मंडल वाणिज्यिक प्रबंधक, अंबाला मंडल                                                                                                                               घाटे का सौदा, फिर भी कायम उम्मीद की लौ पिछले छह साल से सियासी खींचतान का शिकार चल रही चंडीगढ़ वाया पंचकूला-नारायणगढ़-जगाधरी रेलवे लाइन परियोजना को इस रेल बजट में फिर से उम्मीद की लौ दी है। हालांकि रेलवे की नजर में ये परियोजना पूरी तरह से जबरदस्त घाटे का सौदा है, लेकिन उसके बावजूद इस परियोजना पर रेलवे केवल जनहित में हर रेल बजट में अपनी हिस्से का दायित्व तो निभा देता है।प्रभु जी ने इस रेल बजट पर भी इसी परियोजना पर रेल के हिस्से का दायित्व निभाते हुए इस परियोजना के लिए  25 करोड़ का और बजट पास कर दिया है। लेकिन हैरानी की बात यह कि छह साल गुजर गए अभी तक हरियाणा सरकार के साकारत्मक सहयोग न मिल पाने की वजह से ये परियोजना कागजों से धरातल तक ही नहीं उतरी है। जब हरियाणा सरकार इस परियोजना में रेलवे  की शर्त स्वीकार नहीं करते, तब तक बजट के प्रावधान के बावजूद ये परियोजना धरातल पर उतरने वाली नहीं है।
यह है प्रोजेक्टचंडीगढ़ से वाया पंचकूला, नारायणगढ़ जगाधरी से होते हुए देहरादून तक जाने वाली एक नई रेलवे लाइन का एक महत्वकांक्षी प्रोजेक्ट वर्ष 2010 के रेलवे बजट में घोषित किया गया था। इस रेलवे लाइन बनने से नारायणगढ़, बरवाला, सढौरा, जगाधरी, बिलासपुर इत्यादि बहुत से ऐसे दूरदराज बसे लोगों को राहत मिलेगी, जिन्हें रेल सुविधा के लिए चंडीगढ़, अंबाला या जगाधरी स्टेशन तक जाना पड़ता था। दूसरा चंडीगढ़ से जगाधरी भी सीधे जुड़ जाएगा।
इसलिए छह साल से लटकी परियोजना नियमानुसार रेल मंत्रालय और योजना आयोग जिस भी राज्य में रेल लाइन के प्रोजेक्ट को घोषणा कर उसे पास करते हैं, तो वहां राज्य सरकार ही जगह उपलब्ध करवाती है और रेल लाइन बनने के दौरान कंस्ट्रक्शन वक्र्स का आधा खर्च वहन करती है। लेकिन यहां इस प्रोजेक्ट में हरियाणा सरकार जमीन देने को तो तैयार है, मगर निशुल्क नहीं। हरियाणा सरकार इस प्रोजेक्ट में जमीन की लागत और लाइन बिछाने में आने वाले कुल कंस्ट्रक्शन वक्र्स की लागत का केवल आधा हिस्सा ही देना चाहती है। मगर रेल मंत्रालय चाहता है कि सरकार जमीन निशुल्क दे और कंस्ट्रशन वक्र्स का आधा लागत खर्च वहन करे। बस, इसी बात को लेकर मामला छह साल से अटका हुआ है।
इसलिए घाटे का सौदा है ये परियोजना-रेलवे मंत्रालय ने इस परियोजना को सर्वे के बाद घाटे का सौदा घोषित किया हुआ है-करीबन पैंतालीस किलोमीटर का इस ट्रैक पर 875 करोड़ का खर्च आना है-इसमें से 851 करोड़ का खर्च कैपिटल बजट के रूप में हैं, जबकि 24 करोड़ का सेफ्टी बजट के रूप में आएगा-लेकिन इतना खर्च करने के बावजूद भी रेलवे को प्रति वर्ष इस ट्रैक से अपेक्षाकृत कम ही यात्री मिल पाएंगें।-लेकिन अब रेलमंत्री सुरेश प्रभु ने इस परियोजना के कुल बजट में से 25 करोड़ का बजट जारी करके इस परियोजना की जान को फिलहाल बरकरार रखा है।

हरियाणा सरकार जल्द निपटाए पेचीदगियां : डीआरएमइस मामले में अंबाला रेल मंडल के डीआरएम दिनेश कुमार कहते हैं कि रेलवे इस परियोजना को घाटे के बावजूद भी सिरे चढ़ाना चाहता है। लेकिन हरियाणा सरकार को इस मसले पर अपना फैसला देना है। सरकार इस मसले पर जो भी पेचिदगियां है, उसे जल्द निपटाएं, ताकि रेलवे परियोजना को धरातल पर उतार सके।
सांसद बोले, जल्द सीएम से करूंगा मीटिंगसांसद रतनलाल कटारिया ने कहा कि इस मसले पर मैं सुरेश प्रभु से मिला था, इसी का नतीजा है कि उन्होंने इसके लिए 25 करोड़ रुपये के बजट को जारी करने की घोषणा की है। अब मैं जल्द ही हरियाणा सीएम मनोहर लाल खट्टर से मिलूंगा और उनसे आग्रह करूंगा कि इस परियोजना को सिरे चढ़ाने में सरकार अपने हिस्से का भी दायित्व जल्दी निभाएं और इस परियोजना का कुल खर्च का आधा खर्च वहन करें। इस परियोजना को जरूर सिरे चढ़ाऊंगा।
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