निकिता के पिता यशपाल बजाज बिलाप करते हुए उन्हें ढांढस बंधाते हुए रिश्तेदार। संवाद
- फोटो : udhampur news
अंबाला सिटी। मॉडल टाउन निवासी निकिता बजाज आज इस दुनिया में नहीं है मगर उसके सपने परिजनों को सता रहे हैं। माता-पिता का घर में बुरा हाल है, उसकी बातें बार-बार याद आ रही हैं। अभी भी उन्हें विश्वास नहीं हो रहा कि घर की लाड़ली बेटी उनके बीच नहीं है।
पिता यशपाल राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के स्वयंसेवक हैं और सब्जी विक्रेता का काम करते हैं। वह बताते हैं कि बेटी ने डीएवी सीनियर सेकेंडरी स्कूल सिटी से पढ़ाई की थी। 10वीं और 12वीं में 80 प्रतिशत अंक थे। वह पढ़ने में होशियार थी और जल्द से जल्द आत्मनिर्भर बनकर खुद को साबित करना चाहती थी। वह कहती थी कि पापा एक दिन मैं अपना घर खरीदूंगी। तब दुनिया को लगेगा कि बेटियां भी कमतर नहीं होती हैं। जैसे ही 12वीं की पढ़ाई समाप्त हुई वह अपने सपनों को पूरा करने की इच्छा लिए फ्रैंकफिन से कोर्स करने लगी। कोर्स समाप्त हुआ तो पंजाब के जीरकपुर में नौकरी लग गई। इसके बाद गुरुग्राम में डेढ़ वर्ष पहले ही मल्टी नेशनल कंपनी अमेरिकन एक्सप्रेस में नौकरी लगी। नौकरी के साथ भाई की पढ़ाई का भी खर्च उठाने में मदद करती रही। संवाद