जलबेड़ा। धान व गेहूं की घटती पैदावार के चलते अब किसानों में सफेदे की फसल का रुझान बढ़ने लगा है। किसान बलविंद्र सिंह, जसविंद्र सिंह, मंगल सिंह, मोतीराम, दविंद्र कुमार का कहना है कि धान व गेहूं की फसलों में प्रतिवर्ष खर्च बढ़ रहे हैं, लेकिन पैदावार काम हो रही है। यही नहीं हर वर्ष कोई न कोई नई बीमारी पनप रही है। जो किसानों की लहर लगाती हुई फसल को एकदम से समाप्त कर देती है। पिछले साल तेले की भरमार के कारण फसल बर्बाद हो गई और इस वर्ष फिजी वायरस के कारण किसानों को अपनी धान की फसल खेत में ही समाप्त करनी पड़ी, क्योंकि खेत में धान के पेड़ तो खड़े थे, लेकिन उनके ऊपर धान की बालियां नहीं थी।
गेहूं-धान की तुलना में तीन गुना होगी फसल
किसानों ने बताया कि अब वह धान व गेहूं की फसलों को काम करते जाएंगे और उसकी जगह सफेदे की फसल लगाना शुरू करेंगे, जो उन्हें प्रतिवर्ष बिना खर्च के अच्छा मुनाफा प्रदान करेगी। यदि वह हर साल एक एकड़ में सफेदे की फसल लगाते हैं और 5 साल तक यह 5 एकड़ पर पहुंच जाएगी तो 5 वर्ष से हर साल एक एकड़ की फसल को वह काटकर अच्छा मुनाफा प्राप्त कर सकते हैं। यह फसल गेहूं-धान की तुलना में तीन गुना होगी।