संवाद न्यूज एजेंसी
जलबेड़ा। प्रदेश सरकार की ओर से जारी बजट के बाद किसानों ने मिली जुली प्रतिक्रिया दी है। किसानों का कहना है कि पहले भी जो बजट आए थे उसमें सरकार ने किसान हित में कई बड़ी घोषाएं की। मगर हकीकत में वह योजनाओं का लाभ नहीं ले पा रहे हैं। इस बार का बजट लोकलुभावन तो लग रहा है मगर किसानों तक सरकार की घोषणाएं कब तक पहुंचेंगे यह समय बताएगा।
एमएसपी पर गारंटी अभी भी नहीं
किसान अमरीक सिंह ने बताया कि बागवानी और सब्जियों के बीमे में बढ़ोतरी सराहनीय है लेकिन किसान अभी भी सभी फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य की ठोस कानूनी गारंटी और पुराने कर्ज से राहत की उम्मीद कर रहे थे। मंडियों के आधुनिकीकरण और गेट-पास सिस्टम को और अधिक सरल बनाने की जरूरत है।
धान की पद्धति पर वापस आएंगे
किसान राजेश कुमार ने बताया कि वह तीन साल से दो एकड़ में ज्वार की फसल उगा रहे हैं। अबकी बार उनके पास भी प्रोत्साहन राशि नहीं पहुंची। उन्होंने बताया कि सरकार की इस योजना के तहत ही धान की फसल छोड़कर ज्वार उगाना शुरू किया था। सरकार अपने द्वारा किए गए वादे से ही मुकर गई है। इसलिए अब वह पहले धान वाली कृषि पद्धति पर ही वापस आएंगे।
बिजली कटौती की समस्या हल होगी
किसान जरनैल सिंह ने बताया कि खेती के लिए अलग बिजली कंपनी बनने से उम्मीद है कि ट्यूबवेल कनेक्शन के लिए लंबा इंतजार खत्म होगा। बिजली की वोल्टेज की समस्या भी हल होगी। सोलर पंप पर सब्सिडी का दायरा बढ़ने से डीजल का खर्च कम होगा, जिससे खेती की लागत में कमी आएगी।
अमरीक सिंह
अमरीक सिंह