-बढ़ते पारे से किसान असमंजस में
संवाद न्यूज एजेंसी,
जलबेड़ा। भीषण गर्मी और रिकॉर्ड तोड़ तापमान ने क्षेत्र के किसानों की चिंता बढ़ा दी है। आसमान से बरसती आग के बीच किसान अपनी धान की पनीरी (पौध) उगाने को लेकर गहरे असमंजस में हैं। पारे के 46 से 47 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच जाने के कारण किसानों को डर सता रहा है कि कड़ी धूप और लू के थपेड़ों से उनकी पनीरी झुलसकर सूख न जाए।
इलाके के किसान रामकुमार, मनजीत सिंह और राजेंद्र कुमार ने बताया कि वे आमतौर पर दो तरीकों से पनीरी तैयार करते हैं। पहला गोबर की खाद का सहारा लेकर और दूसरा खेत में पानी खड़ा करके सीधी बिजाई करके। लेकिन इस बार रिकॉर्डतोड़ तापमान के कारण वे दोनों ही विधियों को आजमाने से डर रहे हैं।
किसानों की दोहरी मुसीबत यह है कि पिछले साल धान में आए बोनेपन रोग के कारण उन्हें प्रति एकड़ 35 से 40 हजार रुपये का भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा था। इस बार भी फसलों पर सफेद तेले (कीट) के प्रकोप की आशंका अभी से जताई जा रही है, जिससे किसान बेहद डरे हुए हैं।
कृषि अधिकारियों की सलाह, अपनाएं सीधी बिजाई
कृषि अधिकारियों के मुताबिक बोनेपन का रोग जिस कीट के जरिए फैलता है, उसका असर इस समय भी देखा जा रहा है। अधिकारियों ने किसानों को इस संकट से उबरने के लिए महत्वपूर्ण सलाह दी है। ट्रांसप्लांट (कद्दू करके पौध लगाने) की बजाय धान की सीधी बिजाई विधि को अपनाएं। पिछले साल जिन किसानों ने सीधी बिजाई की थी, उनके खेतों में बोनेपन का रोग नहीं के बराबर था। पनीरी उगाने वाले स्थान के आसपास गंदा पानी जमा न होने दें और वहां पेड़पौधों की घनी छाया न हो। अगर पास में मक्के का खेत हो, तो धान की पौध उससे काफी दूरी पर तैयार करें ताकि कीटों के हमले से बचा जा सके।