गणतंत्र दिवस पर दिल्ली में हुई घटना और गाजीपुर व सिंघु बार्डर पर पुलिस की ओर से वीरवार रात की कार्रवाई का असर शंभू बार्डर पर भी देखने को मिल रहा है। किसानों ने शंभू बार्डर पर दिन-रात धरना देने और ठीकरी पहरा देने की व्यवस्था बनाने के लिए रणनीति तैयार कर ली है। पहले शंभू बार्डर पर रात को एक गांव के किसानों की ड्यूटी लगाई जाती थी, अब इस संख्या को बढ़ाकर छह कर दिया है। शुक्रवार की रात मानकपुर, सद्दोपुर, पंजोखरा साहिब, कोलां, घेल और लोहगढ़ के किसानों ने रातभर शंभू बार्डर पर ठीकरी पहरा दिया।
दिन में भी शंभू बार्डर पर किसानों की संख्या पहले से दोगुनी हो गई है। शंभू बार्डर पर टोल शुरू करने के प्रयास में हुई तनातनी और बढ़ती पुलिस गतिविधियों को देखते हुए किसान दुगनी संख्या में शंभू बार्डर पर पहुंचने लगे हैं। शंभू बार्डर पर जहां पहले 400 किसान पहुंचते था, वहीं शुक्रवार को सीधे ही 800 के करीब किसानों ने उपस्थिति दर्ज करवाई। किसानों का कहना है कि सरकार चाहे किसानों पर जितना मर्जी दबाव बना ले। उन्होंने भी पूरी तैयारी कर ली है। जब तक सरकार इन कृषि कानूनों को वापस नहीं लेती तब तक उनका आंदोलन शंभू बार्डर पर इसी प्रकार जारी रहेगा।
सरकार हम किसानों पर पूरा दबाव बनाने की कोशिश कर रही है। लेकिन हम किसान तब तक पीछे नहीं हटेंगे। जब तक सरकार इन कृषि कानूनों को वापस नहीं ले लेती है। - सुरेश
शंभू बार्डर पर अब पहले के मुकाबले अधिक किसान पहुंच रहे हैं। इससे पता चलता है कि कृषि कानूनों को लेकर किसानों में कितना विरोध है। सरकार जब तक इन कृषि कानूनों को वापस नहीं ले लेती है। तब तक किसान किसी भी हाल में आंदोलन से पीछे नहीं हटेंगे। - गुरमीत सिंह।
रात के समय ठिकरी पहरे में एक गांव के स्थान पर छह गांव की ड्यूटी लगाई गई है। जहां के किसान रात के समय पहरा देंगे और दिन में भी अब अधिक किसानों को शंभू बार्डर पर पहुंचने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। - गुलाब सिंह, उप प्रधान, भाकियू।
किसान जागरूक हो चुका है। इसी का नतीजा है कि अधिक से अधिक किसान खुद ही शंभू बार्डर पर पहुंचकर आंदोलन को मजबूत कर रहे हैं। जिससे सरकार पर दबाव बने और सरकार कृषि कानूनों को वापस लेले। - जय सिंह, प्रवक्ता, भाकियू।