अंबाला। किसान आंदोलन के चलते बीते 22 दिनों से देश की लाइफ लाइन माने जाने वाले जीटी रोड पर यातायात की कमर टूट गई है।
गाड़ियों के रास्ते में अतिरिक्त समय और अनगिनत तकलीफों से लोगों को गुजरना पड़ रहा है। हालात यह हैं कि 22 दिन बाद भी अंबाला रोडवेज हिम्मत नहीं कर पा रही है कि पंजाब की तरफ सेवा शुरू कर सके। इधर, दिल्ली जाने को भी दो घंटे, चंडीगढ़ अढ़ाई घंटे तो पंजाब जाने को साढ़े चार घंटे का समय लग रहा है।
दिल्ली रूट को छोड़कर अन्य सभी रूटों पर कई किलोमीटर का सफर बढ़ गया है। इसके कारण रोडवेज बसों को तो घाटा हो ही रहा है साथ कि यात्रियों को भी कई घंटे जाम में फंसने को मजबूर होना पड़ रहा है।
अंबाला-दिल्ली राजमार्ग बंद, सर्विस लेन में वाहन
अंबाला से दिल्ली जाने वाला राष्ट्रीय राजमार्ग पहले पूरी तरह से बंद था। मगर दो दिन पहले कुरुक्षेत्र के शाहबाद के पास दोनों तरफ की सर्विस लेन को शुरू किया है। इससे वाहन जीटी रोड पर आ-जा रहे हैं, मगर इस सर्विस लेन से गुजरना भी मुश्किल हो रहा है, क्योंकि यहां रास्ता संकरा होने के कारण वाहन कई घंटे जाम में फंसते दिख रहे हैं।
पहले अंबाला से दिल्ली चार घंटे में पहुंच जाते थे, मगर अब छह घंटे तक का समय लग रहा है। दिल्ली बस ले जाने वाले चंडीगढ़ डिपो के चालक करमजीत सिंह बताते हैं कि दिल्ली के लिए अंबाला से हाल ही में रूट शुरू हुआ है, मगर सर्विस लेन खोलने से कई वाहन जाम में काफी देर तक फंसे रहते हैं। इस कारण समय लग रहा है।
चंडीगढ़ से अंबाला अढ़ाई घंटे में पहुंच रहे लोग
चंडीगढ़ से अंबाला 50 किलोमीटर का समय लगभग एक घंटे में तय हो जाता है। मगर चंडीगढ़ रूट डायवर्ट होने के कारण 95 किलोमीटर तक का समय बढ़ गया है। अंबाला से चंडीगढ़ जाने को कुछ लोग छावनी की डिफेंस काॅलोनी से हंडेसरा नारायणगढ़ रोड होते हुए वाया पंचकूला चंडीगढ़ जा रहे हैं तो कुछ लोग साहा, शहजादपुर, रायपुररानी होते हुए पंचकूला चंडीगढ़ आवाजाही रहे हैं। दोनों ही रूटाें पर दो से अढ़ाई घंटे में चंडीगढ़ तक पहुंच पा रहे हैं। इस रूट पर भी कई जगहों पर जाम मिल रहा है। चंडीगढ़ डिपो के चालक जसविंदर ने बताया कि इस रूट पर किलोमीटर भी बढ़ गए हैं और समय भी अधिक लग रहा है। कई बार जाम मिल जाता है तो और अधिक समय लग जाता है।
लुधियाना का सफर 48 किलोमीटर बढ़ा
अंबाला से शंभू बॉर्डर होते हुए लुधियाना का सफर 122 किलोमीटर का है, मगर यह बॉर्डर बंद होने से अब यह सफर 170 किलोमीटर तक का हो गया है। ऐसे में 48 किलोमीटर अधिक रूट बढ़ गया है। अंबाला डिपो तो बीते 22 दिनों से इस रूट पर बसें ही नहीं ले जा पा रहा है क्योंकि उन्हें लगता है कि गांव के रास्तों पर कहीं कोई दुर्घटना न हो जाए। वहीं पंजाब की पीआरटीसी ने हाल ही में अपने बसों को पंजाब के अंबाला के लिए शुरू किया है। यह बसें लुधियाना से चलकर खन्ना, सरहिंद, राजपुरा होते हुए हिसार बाईपास गन्नाैर, मटहेड़ी से अंबाला शहर और अंबाला छावनी पर पहुंच रही हैं। पहले लुधियाना तक ढ़ाई घंटे का समय लगता था अब साढ़े चार घंटे का समय लगता है। इसी रूट पर सामान्य लोग भी आवाजाही कर रहे हैं ऐसे में कई बार बसें जाम में फंसी रहती हैं। पीआरटीसी बस के चालक संजीव ने बताया कि शंभू बॉर्डर बंद होने के कारण जो सफर ढ़ाई घंटे में होता था वह अब साढ़े चार घंटे में तय कर रहे हैं। यात्रियों को काफी परेशानी हो रही है।
प्राइवेट टैक्सी का बेहिसाब बढ़ा किराया
आपदा में अवसर खोजते हुए प्राइवेट टैक्सी चालकों ने भी इन रूटों पर किराया बढ़ा दिया है। जिसमें अंबाला दिल्ली जाने के लिए 5 हजार रुपये लगते थे मगर अब 7 हजार रुपये मांग रहे है। वहीं चंडीगढ़ को 1500 रुपये से टैक्सी का किराया 2200 से 2500 रुपये तक पहुंच गया है।