अंबाला। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग (एमएसएमई) जो किसी भी अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाते हैं, वर्तमान में गंभीर संकट के दौर से गुजर रहे हैं। महंगे प्लॉट और बिजली की ऊंची दरों ने उद्यमियों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। हालात यह हैं कि कई छोटे कलपुर्जे बनाने वाले कारोबारी चाहकर भी अपनी यूनिट स्थापित नहीं कर पा रहे हैं।
कारोबारियों की लंबे समय से मांग चली आ रही है कि छोटे कारोबारियों के लिए औद्योगिक क्षेत्र के पास ही शेडेड इंडस्ट्रियल एरिया बनाया जाए। यहां 100 से 150 गज जगह लेकर छोटे कारोबारी अपना उपक्रम चला सकें। वह छोटी-छोटी यूनिट लगाकर बड़ी इंडस्ट्रीज की मांग पूरी कर सकते हैं।
प्लॉट के अभाव में दम तोड़ रहे स्टार्टअप
जिले में औद्योगिक विस्तार के दावों के बीच जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। अंबाला साइंटिफिक इंस्ट्रूमेंट्स मैन्युफेक्चरर एसोसिएशन के पूर्व महासचिव गौरव सोनी ने बताते हैं कि औद्योगिक क्षेत्र में आज अगर किसी छोटे कारोबारी को काम शुरू करने के लिए प्लॉट लेना है ताे 50 से 60 लाख रुपये खर्च करने होंगे। छोटे कारोबारी पर इतनी राशि हो ही नहीं पाती है। हमारी लंबे समय से मांग रही है कि 100 से 150 गज के शेडेड प्लॉट दे दिए जाएं तो छोटे कारोबारियों को काम शुरू करने में दिक्कत नहीं होगी। विशेषकर साइंस और मशीनरी के कलपुर्जे बनाने वाले कारीगरों के पास हुनर तो है, लेकिन फैक्ट्री लगाने के लिए पर्याप्त जगह नहीं। बिना स्थायी ठिकाने के इन कारोबारियों को किराये के कमरों या संकरी गलियों में काम करने को मजबूर होना पड़ रहा है।
एक ही छत के नीचे मिले समाधान
एमएसएमई कारोबारियों ने सरकार से पुरजोर मांग की है कि उनके लिए एक अलग क्लस्टर विकसित किया जाए। साइंस और मशीनरी सेक्टर से जुड़े उद्यमियों को एक ही स्थान पर कच्चा माल और सहायक उपकरण मिल सकेंगे। क्लस्टर होने से लॉजिस्टिक्स का खर्च घटेगा और उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार होगा।
महंगी बिजली भी बनी है चुनौती
दूसरी तरफ जमीन की कमी के साथ-साथ महंगी बिजली ने कारोबारियों की कमर तोड़ दी है। अंबाला साइंटिफिक इंस्ट्रूमेंट्स मैन्युफेक्चरर एसोसिएशन के महासचिव उमाकांत बताते हैं कि सरकार द्वारा प्रचारित 2 रुपये प्रति यूनिट की बिजली दर केवल अधिसूचित क्षेत्रों की चुनिंदा अति-लघु उद्योगों पर लागू होती है।
विडंबना यह है कि वहां भी फिक्स्ड चार्ज और फ्यूल सरचार्ज जुड़ने के बाद वास्तविक लागत 3 प्रति यूनिट के करीब पहुंच जाती है। अधिकांश लघु और मध्यम उद्योगों के लिए बिजली की प्रभावी दर आज 8.3 से 8.6 रुपये प्रति यूनिट के बीच है। वहीं दूसरी तरफ राजस्थान जैसा पड़ोसी राज्य बिना किसी बड़े सब्सिडी के दावों के, 7.1 से 7.8 रुपये प्रति यूनिट पर औद्योगिक बिजली दे रहा है। वहीं पंजाब की दरें भी हरियाणा के मुकाबले काफी प्रतिस्पर्धी बनी हुई हैं।