यह बात तो साफ है कि आज बेटियां किसी भी क्षेत्र में कम नहीं हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य या फिर नौकरीपेशा की बात करें हर क्षेत्र में लड़कियों का दबदबा है। हम यहां छावनी की टैगोर गार्डन निवासी गगनजोत की बात कर रहे हैं। इन्होंने खेलने-कूदने की उम्र में ऐसा रास्ता चुना जिस पर महिलाएं बहुत कम ही ध्यान देती हैं। गगनजोत ने अपने पिता जसबीर सिंह के कहने पर ताइक्वांडो की क्लास लेनी शुरू कर दी। अब उसी रास्ते पर चलते हुए वह अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए जी जान के साथ मेहनत करने में जुट गई हैं।
पहला राष्ट्र स्तरीय पदक सब जूनियर प्रतियोगिता में 2005 में जीता था। जिसमें उन्होंने ब्रांज मेडल हासिल किया था। उसके बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा। सबसे खुशी का पल वह था जब 2019 में अंतरराष्ट्रीय स्तर की नेपाल में हुए साउथ एशियन खेलों में भाग लेकर उन्होंने रजत पदक हासिल किया था। अब ओलंपिक में स्वर्ण पदक हासिल करते हुए पापा का सपना पूरा करना चाहती हैं।
छह से 9 घंटे मैदान में पसीना बहाती हैं गगनजोत
ताइक्वांडो में महारत हासिल करने के लिए गगनजोत आम दिनों में कम से कम छह घंटे तक मैदान में ही पसीना बहाती है। वहीं टूर्नामेंट के दिनों में वह दिन में 9 घंटे तक लगातार ट्रेनिंग करती है। जिससे कि वह ओलंपिक में स्वर्ण पदक के अपने लक्ष्य को हासिल कर भारत का नाम दुनिया में लहरा सके। गगनजोत केवल खेल में ही नहीं पढ़ाई में भी इसके साथ ही पढ़ाई में भी अच्छे अंकों के साथ स्नातक की डिग्री हासिल की है और अब लॉ कॉलेज में दाखिले के लिए परीक्षा की तैयारी कर रही हैं।
पिता को मार्शल आर्ट में महारत हासिल
गगनजोत गिल के पिता जसबीर सिंह स्वयं भी मार्शल आर्ट्स के खिलाड़ी रह चुके हैं और राष्ट्रीय स्तर पर कई मेडल हासिल कर चुके हैं। उन्हीं का सपना है कि उनकी बेटी ओलंपिक में गोल्ड मेडल लाते हुए भारत का नाम दुनिया में चमकाएं। वहीं कोच जगदीप सिंह भी पिछले कई सालों से गगनजोत गिल को ट्रेनिंग देते हुए उन्हें ओलंपिक के लिए तैयार कर रहे हैं।