अंबाला। बसपा पार्टी प्रत्याशी की रैली में शामिल होने व बिना बताए स्कूल से गायब रहने सहित अन्य अनियमितताओं के मामले में मुलाना हाई गर्ल्स स्कूल के हेडमास्टर गुलाब सिंह की हरियाणा सिविल सर्विसेज अंडर रूल -7 के तहत सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं। 12 साल तक चली विभागीय जांच और चार साल से चल रही कोर्ट की कार्रवाई में जीत के बाद शिक्षा विभाग ने इस कार्रवाई को अंजाम दिया। राजनीतिक गतिविधियों में शामिल होने के साथ-साथ जांच में हेडमास्टर गुलाब सिंह के खिलाफ कई अन्य अनियमितताएं भी पाई गई। इस बारे में हरियाणा गवर्नमेंट स्कूल एजूकेशन विभाग ने 9 सितंबर को आर्डर जारी किए जोकि 15 सितंबर को जिला शिक्षा विभाग और गुलाब सिंह के पास भेजे गए।
क्या है पूरा मामला, क्यों किया नौकरी से डिसमिस
दरअसल वर्ष 2008 में ग्राम पंचायत शेरपुर अंबाला और अन्य ने गवर्नमेंट हाई स्कूल शेरपुर के हेडमास्टर गुलाब सिंह के खिलाफ शिकायत करते हुए कहा था कि हेडमास्टर बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी समर्थन कर रहे हैं। इस मामले में शिकायत इलेक्शन कमीशन हरियाणा से की गई। इलेक्शन कमीशन ने यह शिकायत शिक्षा विभाग पंचकूला को प्रेषित कर दी। प्रदेश शिक्षा विभाग के आदेशों पर इस मामले में जिला शिक्षा अधिकारी ने जांच करते हुए फैक्ट एंड फाइडिंग रिपोर्ट 03 अक्टूबर 2009 को जमा करवाई। इसी रिपोर्ट के मुताबिक हेडमास्टर गुलाब सिंह को दोषी करार देते हुए हरियाणा सिविल सर्विसेज अंडर रूल 7 के तहत चार्जशीट कर दिया गया।
फैक्ट एंड फाइडिंग कमेटी ने अपने जांच में क्या पाया
जांच कमेटी ने पाया कि गुलाब सिंह बिना किसी सूचना के 2 व 3 दिसंबर 2008, 16 व 21 अक्टूबर 2009 को गैर हाजिर पाए गए। रिपोर्ट के मुताबिक वह गैर हाजिर रहने के आदी हो चुके हैं। इतना ही नहीं 3 दिसंबर 2008 को हेडमास्टर गुलाब सिंह ने बहुजन समाज पार्टी के सचिव मानसिंह मनहेड़ा द्वारा आयोजित चुनावी रैली में हिस्सा लिया। इतना ही नहीं गुलाब सिंह ने 1 लाख 69 हजार 930 रुपये की छात्रवृत्ति विद्यार्थियों को 56 दिन देरी से वितरित की। इसमें भी घोटाले के आरोप लगाए गए थे। इस मामले में उन्हें चार्जशीट करते हुए जवाब मांगा गया लेकिन वह संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए। इसके बाद शिक्षा विभाग के अतिरिक्त निदेशक सतबीर सिंह एचसीएस ने नियमित जांच बैठाई। इसमें गुलाब सिंह दोषी पाए गए। विभाग ने उन्हें अपने बचाव पक्ष में तथ्य रखने के लिए पत्र लिखा लेकिन गुलाब सिंह कोई तथ्य नहीं दे पाए। 5 अक्टूबर 2015 को विभाग ने उन्हें पत्र लिखकर कहा कि यदि आप 15 दिनों के भीतर कोई तथ्य पेश नहीं करते तो क्यों न आपकी सेवाएं समाप्त कर दी जाएं। इस पर गुलाब सिंह ने कारण बताओ नोटिस का जवाब तो दिया लेकिन अपने बचाव में कोई तथ्य पेश नहीं कर पाए।
सिविल कोर्ट में मिली जीत लेकिन सेशन व हाईकोर्ट में हुई हार
हेडमास्टर गुलाब सिंह ने कारण बताओ नोटिस को सिविल कोर्ट में चैलेंज कर दिया। कोर्ट ने 14 अक्टूबर 2015 को गुलाब सिंह के पक्ष में फैसला देते हुए कारण बताओ नोटिस को खारिज कर दिया। इसके खिलाफ शिक्षा विभाग ने सिविल कोर्ट के फैसले को सेशन कोर्ट में चैलेंज किया। इसमें 29 नवंबर 2018 को शिक्षा विभाग के हक में फैसला आया। इसके खिलाफ गुलाब सिंह ने इसे हाईकोर्ट को में चैलेंज किया। लेकिन 24 जनवरी 2019 को हाईकोर्ट ने अपने आर्डर में कहा कि शिक्षा विभाग ने गुलाब सिंह को पक्ष रखने के लिए पूरे अवसर दिए लेकिन वह बचाव में एक भी तथ्य पेश नहीं कर पाए। इसीलिए गुलाब सिंह पर लगे सभी आरोप सही पाए जाते हैं और वह दोषी सिद्ध होते हैं।
शिक्षा विभाग से आदेश मिल चुके हैं। हेडमास्टर गुलाब सिंह को बर्खास्त करने के आदेश बराड़ा बीईओ के पास भी भेज दिए गए हैं ताकि आवश्यक कार्रवाई की जा सके।
-सुरेश कुमार, जिला शिक्षा अधिकारी।