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Ambala News: रोडवेज की 46 बसों के सामने पर्यावरण नियम बने रोड़ा

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अंबाला शहर ​स्थित रोडवेज वर्कशाप परिसर में खड़ी मिनी पिंक बसें। संवाद
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अंबाला रोडवेज के बेड़े में कुल 177 बसें हैं। जो विभिन्न राज्यों में सफर करा रही हैं। हैरानी की बात है कि रोडवेज की 46 बसें पर्यावरण मानकों के कारण सिर्फ स्थानीय रूटों पर ही चलने को मजबूर हैं।
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इन बसों को एनसीआर में नहीं ले जाया जा सकता, क्योंकि यह वायु प्रदूषण करती हैं। इन बसों को स्थानीय रूटों पर चलाकर रोडवेज पर्यावरण तो नहीं मगर स्थानीय लोगों की जरूरत को पूरा कर रही है। यह बीएस 3 और बीएस 4 मानक की बसें हैं। मोटर व्हीकल एक्ट के अनुसार एनसीआर में बीएस छह मानक की ही बसें चल सकती हैं।
जबकि अन्य क्षेत्रों में अभी ऐसी कोई पाबंदी नहीं लगाई गई है। जबकि पर्यावरण की दृष्टि से देखा जाए तो बीएस 3 व बीएस 4 मानक की बसें काफी वायु प्रदूषण करती हैं। इसी लिए बीएस छह की बसों को बेड़े में बढ़ाया जा रहा है। अंबाला डिपो के पास बीएस 3 मानक की 37 बसें तो बीएस 4 मानक की 9 बसें हैं। रोडवेज के अधिकारियों की मानें तो इन बसों को धीमे धीमे बीएस छह से बदला जा रहा है।
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पिछले वर्ष मिलीं थीं बीएस छह मानक की बसें
डिपो के पास बीएस-3 मानक की 37 बस हैं। इन बसों को हिसार, जींद, नरवाना और लोकल मार्ग पर चलाया जा रहा है। वहीं बीएस 6 मानक की 104 बसे हैं। इनमें से कई बसें पिछले साल ही बेड़े में शामिल हुई हैं। वहीं 10 वातानुकूलित बीएस-6 मानक की बसों को चंडीगढ़- दिल्ली, दिल्ली- जालंधर के रूट पर संचालित किया जा रहा है। फिर भी रोडवेज के पास बीएस 6 मानक की बसों की संख्या कम है।
26 कंडम बस 85 लाख रुपये में की बेचीं
रोडवेज अधिकारियों ने कंडम हुई अंबाला डिपो की 26 बसों को हाल ही में 85 लाख रुपये में कबाड़ में बेच दिया। इसके अलावा कोर्ट केस के तहत 10 बसें कार्यशाला में परिसर में ही खड़ी रहती हैं। ऐसे में रोडवेज को अभी भी करीब 100 बसों की जरूरत है। इन बसों के संचालन के लिए 150 से अधिक चालक व परिचालकों की भी आवश्यकता होगी।
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