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बढ़ेंगी मुश्किलें, नेताओं के दबाव में अफसर!

Fri, 23 May 2014 01:16 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, अंबाला
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अंबाला कैंट। कैंट के तमाम बाजारों से सरकारी जमीन और नालों के ऊपर से अवैध कब्जेे हटाए जाने के मामले में हाईकोर्ट में डाली गई जनहित याचिका में शुक्रवार को याची हाईकोर्ट में अपना शपथ पत्र दाखिल करेंगे।
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 हाईकोर्ट ने जिला प्रशासन के अफसरों की ओर से हाईकोर्ट में पहले दिए शपथ पत्र के समांतर याची को भी शपथपत्र देकर अपना पक्ष रखने के आदेश दिए थे। इसी के चलते अब याची एडवोकेट एसकेएस बेदी ने अपना शपथपत्र तैयार कर लिया है। इसे शुक्रवार को हाईकोर्ट में पेश कर दिया जाएगा।

शपथपत्र में याची ने जहां इस जनहित याचिका की शुरुआत से लेकर अब तक हाईकोर्ट में डाली गई अवमानना याचिका तक का जिक्र करते हुए अंबाला प्रशासन के विभिन्न अफसरों को कठघरे में खड़ा कर दिया है। याची इस मामले में अब डीसी अंबाला साकेत कुमार और म्यूनिसिपल कारपोरेशन अंबाला के सेक्रेटरी केके यादव को भी केस मे पार्टी बनाने की गुहार लगाएंगे।
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यह है मामला
अंबाला में सरकारी जमीनों और नालों पर लगातार बढ़ रहे अवैध कब्जों, बाजारों में जाम की स्थिति, आवाजाही में दिक्कत, पार्किंग में भारी परेशान इत्यादि  को देखते हुए एडवोकेट एसकेएस बेदी ने हाईकोर्ट में  जनहित  याचिका 3 जनवरी, 2011 को डाली थी। उसके बाद प्रशासन ने हाईकोर्ट से समय लेकर अवैध कब्जों की निशानदेही करवाने का समय मांगा। इसके बाद प्रशासनिक अफसरों ने कब्जों को हटवाने का समय मांगा। इस दौरान कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति जरूर हुई, मगर इस सारे मुद्दे के दौरान तीन डीसी समीरपाल सरो, शेखर विद्यार्थी, केएम पांडुरंग बदल गए। अब डा. साकेत कुमार नए डीसी हैं। जब हाईकोर्ट के आदेशों की पालना नहीं की गई तो याची ने अवमानना याचिका लगाकर प्रशासनिक अफसरों को फिर कठघरे में खड़ा कर दिया। इस पर हाईकोर्ट जब सख्त हुआ तो प्रशासन ने फिर दो दिन का ‘अवैध कब्जे हटाओ’ अभियान चलाया और हाईकोर्ट में शपथ पत्र लगाकर दावा किया कि अंबाला कैंट के बाजारों से तमाम अवैध कब्जे हट गए हैं। इस पर हाईकोर्ट में याची ने इस शपथ पत्र को झूठ का पुलिंदा बताया जिस पर हाईकोर्ट ने याची को अब अपना जवाब शपथ पत्र के रूप में ही दाखिल करने के आदेश दिए थे। आज शुक्रवार को याची अपना यही शपथपत्र हाईकोर्ट में दाखिल करेंगे।

अफसरों की कार्यप्रणाली पर सवाल
याची ने तैयार किए अपने शपथपत्र में फिर से प्रशासन के अफसरों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। याची एडवोकेट बेदी ने प्रशासन के अवैध कब्जे हटाओ अभियान को पूरी तरह नेताओं के दबाव में बताया। शपथ पत्र में उन्होंने कहा है कि  जिन दुकानदारों के नेताओं से अच्छे लिंक थे, उनके अवैध कब्जे नाममात्र ही हटाए गए हैं, जबकि अफसर भी पूरी तरह नेताओं के प्रेशर में हैं।

 बेदी का कहना है कि इतना ही नहीं जब यह अभियान चला तो कुछ नेता भी अपनी राजनीति चमकाने और इस अभियान को प्रेशर में लाने के लिए मौके पर पहुंचे हुए थे और माहौल को भड़काने की कोशिशों में लगे थे। बेदी का कहना है कि प्रशासन की खानापूर्ति वाली कार्रवाई केवल सदर बाजार और बजाजा बाजार के कुछ हिस्से में ही हुई है। उसके अलावा अनाज मंडी, गुड़ बाजार, निकलसन रोड, चौड़ा बाजार, सब्जी मंडी, कपड़ा मार्केट, हनुमान मंदिर मार्केट,  हिल रोड पुल चमेली चौक तक, राम बाग रोड,  हलवाई बाजार, कसेरा बाजार, सराफ बाजार, पंसारी बाजार, कबाड़ी बाजार, मनियारी बाजार, डीसी रोड, विजय रत्न चौक, राय मार्केट सभी जगह पर नालों व सरकारी जमीनों पर पक्के कब्जे मौजूद हैं। 

याची के अनुसार जो कब्जे बारह क्रास रोड, मच्छी मोहल्ला व प्रगट शिव मंदिर के आसपास इलाके में गिराए थे, वे भी लोगों ने पक्के बना लिए हैं और प्रभावशाली लोगों के भवन तो प्रशासन ने वहां भी छोड़ दिए थे। इसीलिए याची ने अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
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