अंबाला। 12 साल पहले करीब 10 करोड़ की लागत से बनाए गए पटवी पावर और कूड़ा प्रबंधन प्लांट से न तो कभी बिजली बन सकी न कूड़े का प्रबंधन हो सका। अलबत्ता पटवी में कूड़े के पहाड़ बनते चले गए। वर्तमान हालात की बात करें तो यहां करीब 3 लाख टन कूड़ा पड़ा है। इसके प्रबंधन और निस्तारण के लिए लंबे समय की जद्दोजहद के बाद टेंडर जारी किए गए थे लेकिन अब टेंडर में भी पेंच फंस गया है। क्योंकि आलाधिकारियों ने टेंडर की शर्त पूरी नहीं करने वाली कंपनी को योग्य करार देते हुए योग्य कंपनी को दूसरे नंबर पर कर दिया। अपने हाथ से टेंडर जाते देख कंपनी ने आपत्ति जाहिर कर दी है। ऐसे में अब यदि आलाधिकारी फाइनेंस बीड को खोलेंगे तो मामला कोर्ट में जाना तय है। ऐसे में इस टेंडर का एक बार फिर लटकना तय माना जा रहा है।
किस तरह किया टेंडर में खेल
दिल्ली की एल्फा थर्म ने आपत्ति जताते हुए पत्र में कहा है कि टेंडर की शर्त के अनुसार ठेका लेने वाली फर्म के पास 1 लाख 40 हजार टन कूड़े के निस्तारण और प्रबंधन के दो प्रोजेक्ट पूर्व में होना चाहिए लेकिन जिस कंपनी को एलवन-बताया गया है उसके पास केवल एक ही प्रोजेक्ट का अनुभव है और वह भी 81 हजार टन का। इसीलिए वह योग्य ही नहीं बनती।
12 साल से डंप हो रहे कूड़े से बना खतरा
पटवी में करीब 17 एकड़ जमीन जिले के कूड़े को डालने के लिए ली गई थी। इसमें से करीब 14 एकड़ जमीन में कूड़ा डाला जा रहा है। चूंकि आज तक कूड़ा का निस्तारण और प्रबंधन नहीं हुआ। इस कारण इस पूरी जमीन के साथ भूमिगत जल भी यहां का दूषित हो चुका है। इसके अलावा आसपास के एरिया के जीवों पर भी खतरा मंडराया हुआ है। गर्मियों में इस कूड़े में आग लगने के कारण निकलने वाली गैस कैंसर को बढ़ावा दे रही है। इसी तरह प्रदूषित जल से भी कैंसर के मरीज बढ़ रहे हैं। इतना ही नहीं इस प्लांट के आसपास पटवी की कृषि योग्य जमीन भी बंजर होने की कगार पर है।
इतना कूड़ा है पटवी में...
वर्ष 2008 से पटवी प्लांट में कूड़ा प्रबंधन और बिजली बनाने के लिए जाने लगा था लेकिन कभी चल नहीं पाया। इस पर 10 करोड़ रुपये तत्कालीन सरकार ने खर्च किए थे। उस समय अंबाला शहर और छावनी से करीब 220 टन कूड़ा रोजाना निकलता था। वर्तमान में औसतन 180 टन कूड़ा निकल रहा है। इसके सूखने के और यदि इनका आधा कूड़ा भी पटवी तक पहुंचा होगा तो भी 4 लाख टन से ज्यादा कूड़ा पटवी में इस समय मौजूद है।
पंजाब का कूड़ा भी यहीं पर होता है डंप
हैरत की बात तो यह है कि न केवल अंबाला बल्कि पंजाब की इंडस्ट्रियों से निकलने वाले कूड़े को भी यहीं पर गैर कानूनी तौर पर डंप किया जाता है। सब कुछ जानते हुए भी अधिकारी पूरे मामले पर मौन हैं। दरअसल पटवी के सबसे नजदीक हंडेसरा गांव पड़ता है जोकि पंजाब का है। यहां के उद्योगों की सारी गंदगी यहीं पर पहुंचती है।
सोलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल 2016 और एनजीटी के आदेश के अनुसार कचरा जहां से पैदा हो रहा है वहीं से गीले, सूखे कूड़े छंटनी करते हुए उसे अलग-अलग रखना चाहिए। अलग-अलग ही उसका उठाना काउंसिल द्वारा करना अनिवार्य। पटवी में 12 साल से जो कूड़ा डंप हो रहा है उससे आसपास का भूमिगत जल प्रदूषित हो चुका है। इसके अलावा उससे लगने वाली आग से निकलने वाली गैसों से ग्लोबल वार्मिंग व वायु प्रदूषण हो रहा है। इससे निश्चित तौर पर कैंसर के बढ़ने बढ़ने की संभावनाएं हैं।
-डॉ. नरेश भारद्वाज, ग्रीन अर्थ संस्था