अंबाला सिटी। कोरोना कॉल में धारा 144 का उल्लंघन के मामले में सिविल जज श्रेया बंसल की अदालत ने सुबूतों के अभाव में आठ आरोपियों को बरी कर दिया। अदालत में पुलिस यह साबित नहीं कर पाई कि जिस समय आरोपी घूम रहे थे उस समय उन्हें कोरोना था या नहीं।
इसके साथ कोरोना लॉकडाउन संबंधित दस्तावेज भी पुख्ता नहीं थे। वर्ष 2020 से चल रहे इस मामले में पांच वर्ष बाद फैसला आया। मामले में चार गवाहों की गवाही हुई। जिसके बाद फैसला दिया गया। बरी होने वालों में छावनी की ओमनगर कॉलोनी निवासी संजीव कुमार, अमीर चन्द, राजेश कुमार, मुकेश कुमार, अर्जुन लाल, राजेश कुमार, अनिल कुमार और सुरेंद्र कुमार शामिल हैं।
यह था मामला
कोराना कॉल में थाना महेश नगर प्रभारी की ओर से 26 अप्रैल 2020 को आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया था। उन्होंने बताया कि उक्त आरोपी लॉकडाउन का उल्लंघन करते हुए सड़क पर घूम रहे थे। जिससे कोरोना महामारी फैलने का डर बन रहा है। इसी आधार पर पुलिस ने आठों युवकों को गिरफ्तार किया था। इसके बाद से ही युवक बेल पर चल रहे थे।
बरी होने के आधार
पुलिस की ओर से लॉकडाउन की स्थिति स्पष्ट करने के लिए कोई उचित दस्तावेज नहीं लगाया था।
जिस समय युवकों को गिरफ्तार किया गया था उस समय उन्हें कोरोना भी नहीं था।
इसके साथ ही डीसी की ओर से लगाई धारा 144 का सबूत भी संलग्न नहीं किया था।
पॉक्सो के मामले में सुनवाई 19 को
नाबालिग चचेरी बहन के साथ दुष्कर्म के मामले में पॉक्सो की विशेष कोर्ट में मामले में सुबूत पेश किए गए। इसके बाद कोर्ट ने मामले में 19 मई को अगली तारीख लगाई है। इस मामले में पुलिस अधिकारी ने शिकायत दी थी। इसमें बताया गया था कि नाबालिग के साथ उसके चाचा के बेटे ने ही गलत काम किया है। इतना ही नहीं इसके बाद नाबालिग गर्भवती भी हो गई। इसके बाद लड़के के परिवार वाले मिलकर नाबालिग का गर्भपात करवाने के लिए अस्पताल पहुंचे थे। कुछ दिन बाद ही नाबालिग के पेट में दर्द होने लगा। इसकी जांच के लिए वे नागरिक अस्पताल में पहुंचे थे। जहां से सारा मामला सामने आया और शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया।