पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है। लगातार बढ़ रही पेट्रोल की कीमतों का असर अब रोजमर्रा की वस्तुओं पर भी नजर आने लगा है। हालात यह हैं कि बढ़ती कीमतों के चलते औसतन 5 सदस्यीय परिवार को अब प्रति माह अपनी रोजाना की मूलभूत सुविधाओं को पूरा करने के लिए न्यूनतम 900 रुपये प्रति माह खर्च करने पड़ेंगे। महंगाई का सबसे ज्यादा असर रसोई पर पड़ा है। रसोई गैस के साथ-साथ पेट्रोलियम पदार्थों की वृद्धि से माल ढुलाई के रेट बढ़ने से दाल और सब्जियों के रेट बढ़ गए हैं। -संवाद
जानिए किस तरह से एक मध्यम वर्गीय परिवार पर पड़ रहा अतिरिक्त बोझ
दाल के बदले चुकाने पड़ रहे 200 रुपये तक अतिरिक्त
चने की दाल, उड़द की दाल, सफेद चना, काला चना, माह की दाल, राजमा, साबूत मूंग की दाल, धुली मूंग की ताल, अरहर की दाल व अन्य सभी दालों की कीमत में औसतन 10 से 20 रुपये तक का उछाल गया है। ऐसे में एक परिवार में प्रतिमाह औसतन 8-10 किलो दालें भी लगती हैं। इससे सीधे तौर पर 150 से 200 रुपये तक का बोझा आम आदमी पर पड़ा है।
सब्जियों के दाम में बढ़त से 470 रुपये का पड़ा बोझ
आलू, प्याज, टमाटर, लहसुन, हरी मिर्च यह घर में सबसे ज्यादा प्रयोग होती है। इसमें आलू की खपत प्रतिमाह 25 किलो जिसमें 5 रुपये किलो की बढ़त के हिसाब से 125, प्याज 10 किलो जिसमें 10 रुपये प्रति किलो की बढ़त के हिसाब से 100 रुपये, टमाटर 15 किलो 5 रुपये प्रति किलो की बढ़त के साहिब से 75 रुपये इसके अलावा लहसुन, हरी मिर्च, अदरक कुल दो किलो माने तो इसमें भी 10 रुपये के हिसाब से 20 रुपये की बढ़त दर्ज की गई है। गोभी, गाजर, शिमला मिर्च, फलिया, बैंगन, मटर व अन्य ऐसी ही सब्जियां जो कि एक माह में औसतन 15 किलो आती हैं। इन सभी में भी 10 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। इस हिसाब से 150 रुपये अतिरिक्त भार आम परिवार पर पड़ेगा। एक परिवार पर 470 रुपये प्रति माह का बोझ बढ़ गया है।
तेलों की कीमतों के चलते रसोई का बजट हर महीने 105 रुपये बढ़ा
सरसों का तेल, रिफाइंड, वनस्पति घी, देसी घी औसतन 6-7 किलो तक प्रयोग होता है। इसमें वनस्पति घी में इन सभी में प्रति किलो के हिसाब से 15 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। इस हिसाब से 90-105 रुपये की अधिक भार पड़ेगा है।
सिलिंडर के रेट बढ़ने से जिलेवासियों पर पड़ा 1.70 करोड़ का बोझ
इस समय सिलिंडर के रेट में सीधे ही 50 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। अंबाला वासियों को इस समय 787 रुपये का मिल रहा है। एक सिलिंडर औसतन एक माह चल जाता है। 3 रुपये से 7.50 रुपये तक सब्सिडी के ही मिल पा रहे हैं। जिले में करीब 3.40 लाख घरेलू गैस कनेक्शन हैं। अलबत्ता जिलेवासियों को रसोई गैस के दाम बढ़ने से 1 करोड़ 70 लाख रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ा है।
पेट्रोल के लिए औसतन हर परिवार को देने पड़ रहे 50 रुपये अतिरिक्त
10 फरवरी को पेट्रोल 85.15 रुपये था। अब 88.4 रुपये हो गया है। अगर एक बाइक की बात करें तो न्यूनतम 15 लीटर पेट्रोल की खपत एक माह में होती है। इस हिसाब से 50 रुपये एक बाइक से अतिरिक्त भार पड़ रहा है। अगर दो बाइक है तो 100 रुपये। वहीं डीजल के रेट में भी 3.25 रुपये की बढ़ोतरी हुई है जो कि 10 फरवरी को 77.83 रुपये था वह अब 81.08 हो गया है। एक्टिवा और स्कूटर चालकों पर औसतन यह मार करीब 75 से 100 रुपये तक पड़ रही है।
नोट- डीजल व पेट्रोल वाली तिपहिया व चोपहिया गाड़ी को इस आंकड़े में नहीं शामिल किया गया। केवल 2 दोपहिया वाहन को ही शामिल किया गया है।
दुकानदार से बातचीत
दाल और तेल में काफी वृद्धि हुई है, वहीं अभी आटा, चावल और मैदा पहले वाले रेट पर ही बिक रहे हैं। मगर ऐसे ही पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ते रहे तो दो चार दिन में अंतर दिखने की उम्मीद है, जिसके संकेत मिल रहे हैं।
- रोहित जैन, दुकानदार।
पिछले तीन चार दिनों में ही सब्जी के रेट बढ़ गए हैं। किसी में पांच तो किसी में 10 रुपये का अंतर आम सी बात है। यह सारी सब्जियां ट्रांसपोर्ट से ही आती है, जैसे ही ट्रांसपोर्ट संचालक रेट बढ़ाएंगे वैसे ही सब्जियों के रेट और अधिक बढ़ जाएंगे।
- रिंकू, सब्जी विक्रेता।
सिलिंडर के साथ साथ दाल, सब्जी हर चीज महंगी हो गई हैं। इस महीने तो राशन भी हाथ टाइट कर प्रयोग कर रहे हैं। पता नहीं महंगा आखिरकार कहां जाकर रुकेगी।
- कुलविंद्र, गृहिणी।
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अगर मध्यम वर्गीय परिवार की बात करें, जिनके घर पांच सदस्य हैं और दो बाइक है उन पर प्रतिमाह का करीब करीब 1 हजार से 15 सौ रुपये तक अतिरिक्त भार पड़ेगा। वहीं जैसे-जैसे गाड़ी और घर में सदस्यों की संख्या बड़ेगी भार और अधिक बढ़ता जाएगा। क्योंकि खाना और ईंधन दोनों ही मूलभूत सुविधा हैं। इनके बिना अब जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती। ईंधन के रेट में बढ़ोतरी का असर हर चीज पर पड़ता है।
- डॉ. नीति, अर्थशास्त्री।