छावनी के हार्ट सेंटर में ईको और अन्य टेस्ट रहे बंद
कर्मचारियों ने काले रिबन बांधकर जताया रोष
फोटो नंबर - 79, 80, 81
- पीएनडीटी एक्ट के तहत कार्रवाई का प्रदेशभर में जता रहे विरोध
- छावनी के नागरिक अस्पताल में पीपी मोड पर चल रहे हार्ट सेंटर में ओपीडी रही चालू, लेकिन ईको टेस्ट रहे बंद
संवा न्यूज एजेंसी
अंबाला। बीके अस्पताल के मेडिटीना हार्ट सेंटर में शुक्रवार को हुई पीएनडीटी एक्ट के तहत कार्रवाई के विरोध का असर सोमवार को अंबाला में भी देखने को मिला। छावनी नागरिक अस्पताल में पीपी मोड पर चल रहे हार्ट सेंटर में डॉक्टरों सहित स्टाफ ने हाथ पर काले रिबन बांधकर रोष जताया। इतना ही नहीं ईको सहित अन्य टेस्ट भी दिनभर बंद रखे। हालांकि आदेश ओपीडी पूरी तरह से बंद करने का था लेकिन हार्ट सेंटर के एचओडी ह्दय रोग विशेषज्ञ डॉ. राघव ने मरीजों के प्रभावित न होने के उद्देश्य से चालू रखी ताकि किसी मरीज की हालत न बिगड़ सके। जबकि ईको आदि टेस्ट न होने पर मरीजों को प्राइवेट सेंटरों की दौड़ लगानी पड़ी।
बता दें कि नागरिक अस्पताल के हार्ट सेंटर में रोजाना करीब 100 से ऊपर की ओपीडी रहती है और 40 के करीब ईको होती है। ओपीडी में अंबाला के साथ-साथ आसपास शहरों से भी मरीज पहुंचते हैं। पूरे स्टाफ ने दिनभर हाथ में काले रिबन बांधकर ही काम किया। डॉ. राघव ने बीके अस्पताल के मेडिटीना हार्ट सेंटर में पीएनडीटी एक्ट के तहत हुई कार्रवाई का विरोध किया और कहा कि इस मामले की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए।
यह था पूरा मामला
बता दें कि झज्जर की पीएनडीटी जांच टीम, पुलिस कर्मियों ने कॉर्डियोलॉजिस्ट, मैनेजर और कर्मचारियों के साथ दुर्व्यवहार कर कमरे में बंद रखा था। यह जानकारी संबंधित कंपनी के नॉर्थ इंडिया सीओओ प्रवीण तिवारी ने बताया था कि स्टाफ के साथ मारपीट की और हार्ट सेंटर के चिकित्सकों समेत अधिकारियों के मोबाइल फोन छीन लिए थे। पीएनडीटी टीम के नोडल ऑफिसर डॉ. शैलेंद्र डोगरा और डॉ. ममता, टीम के एडवोकेट संजय गुप्ता ने चिकित्सकों को धमकाया और गलत तरीके से बयान लिखवाने के लिए दवाब बनाया था। इस सबकी जांच होनी चाहिए। तिवारी ने पीएनडीटी एक्ट का दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए जिले के हार्ट सेंटर को बंद करने की मंशा से काम करने का आरोप कार्रवाई टीम पर लगाया। मामले में पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए पुलिस वालों के धमकाने की वजह से ही हार्ट सेंटर का स्टाफ पूरी तरह से डरा हुआ है।