नागरिक अस्पताल में डायलिसिस यूनिट बंद होने के कारण अंबाला शहर के पटेल रोड निवासी विजय कुमार ने बुधवार देर शाम एक निजी अस्पताल में दम तोड़ दिया। विदित हो कि कोरोना संक्रमण के कारण पिछले चार दिनों से नागरिक अस्पताल में डायलिसिस यूनिट बंद पड़ी थी।
सामान्य डायलिसिस के मरीजों का यह संकट अभी टला भी नहीं था कि अब काला पीलिया वाले डायलिसिस के मरीजों की सांसें भी उखड़नी शुरू हो गई हैं। बृहस्पतिवार को डायलिसिस करवाने के लिए सुबह से इंतजार में बैठे कई मरीजों की तबीयत बिगड़ गई। जगाधरी के गांव गुंदियाना से काला पीलिया के मरीज नरेश कुमार की सांसें उखड़ने लगी तो अस्पताल प्रबंधन में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में उसे उपचार के लिए इमरजेंसी वार्ड के अंदर दाखिल करवाकर आक्सीजन दी। वीरवार शाम मरीजों की जान बचाने के लिए डाक्टरों ने खुद जोखिम उठाकर करीब साढ़े 4 बजे फिर से डायलिसिस यूनिट शुरू कर दी गई।
फूल गए मरीज के हाथ और पैर... नरेश की हालत इस कद्र बिगड़ी हुई थी कि पैर फूलकर मोटे-मोटे हो गए थे। कई तो दिनभर इस इंतजार में दर्द से कराहते रहे कि जैसे ही यूनिट चालू करने की अनुमति मिलेगी, वह सबसे पहले डायलिसिस करवाकर अपनी जान बचा लेंगे। बता दें कि पिछले तीन दिनों से कोरोना संक्रमण के चलते पूरे स्टाफ के टेस्ट करने के लिए सैंपल की प्रक्रिया चल रही है। गत दिनों डायलिसिस करवाने वाले दो मरीज ही कोरोना से संक्रमित पाए गए थे। तभी से विंग में एहतियात बरती जा रही है।
अनहोनी की आशंका हुई सच... अमर उजाला ने प्रकाशित किया था दर्द
अंबाला शहर निवासी विजय बुधवार को छावनी नागरिक अस्पताल में छह घंटे इंतजार करके गया था। अपनी पत्नी पायल के साथ डायलिसिस विंग के स्टाफ और अमर उजाला के समक्ष दुखड़ा रोते हुए कहा था कि कोरोना से तो पता नहीं मौत हो या नहीं लेकिन डायलिसिस नहीं हुई तो हम वैसे ही मर जाएंगे और हुआ भी यही। उसकी डायलिसिस हो ही नहीं पाई और उसने दम तोड़ दिया।
काले पीलिया वालों के लिए जिले में केवल एक ही मशीन: काले पीलिया के जूझ रहे डायलिसिस वाले मरीजों के लिए जिले में केवल एक ही मशीन है। वह भी नागरिक अस्पताल में जोकि पिछले 3 दिनों से बंद है। इसीलिए ऐसे मरीजों की जान पर भी संकट बन आया है। बता दें कि काला पीलिया एचआईवी की तरह होता है। यदि संक्रमित रक्त के संपर्क में कोई भी मरीज आ गया तो उसे भी काला पीलिया होना तय है। इसीलिए ऐसे डायलिसिस के मरीजों की अलग मशीन पर डायलिसिस होती है।
भर गया पूरे शरीर में पानी: अंबाला शहर के जंडली निवासी 50 वर्षीय पालो देवी ने बताया कि कई दिनों से लगातार चक्कर काट रही है। सप्ताह में दो बार डायलिसिस होती है, पंरतु अभी तक एक भी बार नहीं हुई। पूरे शरीर में पानी-पानी भर गया है। सांस लेने में दिक्कत और चक्कर आने के कारण व्हील चेयर पर बैठी, कहीं जमीन पर गिर न जाऊं।
एक सप्ताह से नहीं हुई डायलिसिस : शाहपुर निवासी परमजीत ने बताया कि एक सप्ताह से डायलिसिस नहीं हुई। रोजाना अस्पताल के चक्कर काटने पर भी कोई डायलिसिस करने को तैयार नहीं। प्राइवेट अस्पताल में खर्च काफी ज्यादा है जो भर पाना बेहद मुश्किल है। उपचार नहीं मिला तो बैठना भी मुश्किल हो जाएगा।
शाहाबाद से आ रही काला पीलिया से ग्रस्त ज्योति : शाहाबाद निवासी 26 वर्षीय ज्योति ने बताया कि वह काले पीलिया से ग्रस्त है। डायलिसिस न होने के कारण पूरे पेट में पानी भर गया है। खड़े होना तो दूर सांस तक नहीं लिया जा रहा। छह दिन से वह अपनी मां के साथ चक्कर काट रही है।