संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला। सड़क हादसों में घायलों की जान बचाने के लिए डेढ़ लाख रुपये तक का उपचार नि:शुल्क कराने की केंद्र सरकार की योजना बजट के अभाव में दम तोड़ रही है। पांच माह से जिले के निजी अस्पतालों ने इस योजना के तहत उपचार देने से मना कर दिया है।
मरीजों को निजी अस्पताल में आयुष्मान कार्ड चलाना पड़ रहा है या फिर भुगतान करना पड़ रहा है या फिर उन्हें नागरिक अस्पतालों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। हालांकि जिले में अब तक इस योजना के तहत केवल दो प्राइवेट अस्पताल मुलाना एमएम व आदेश अस्पताल ही दिलचस्पी दिखा रहे थे। जबकि जिले के सभी निजी अस्पतालों को इसमें शामिल किया जाना है। निजी अस्पतालों ने जनवरी से सितंबर माह तक 50 मरीजों की इस योजना के तहत जान बचाई थी। लेकिन पेमेंट अटकने से वहां भी उपचार बंद हो गया है।
मरीज की चोटों के बाद निर्धारित होता है उपचार का पैकेज : सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा सड़क हादसे में घायल व्यक्ति का शुरुआती दौर यानी गोल्डन आवर में नि:शुल्क उपचार देने के लिए यह योजना शुरू की गई है। हादसे में गंभीर रूप से घायल मरीज को देखकर मेडिकल पैकेज दिया जाता है। इन पैकेज में 10 हजार रुपये से लेकर डेढ़ लाख तक का होता है। ऑपरेशन करना पड़ता है तो ज्यादा राशि वाली पैकेज बुक होते हैं। निजी अस्पतालों में जो 50 केस हुए हैं उनकी राशि भी 10 हजार से लेकर डेढ़ लाख के केस वाली है। इस तरह से करीब 30 लाख रुपये की राशि अटकी पड़ी है।
इस योजना के तहत सरकारी में भी 300 मरीजों को मिल चुका उपचार : निजी के साथ-साथ सरकारी अस्पतालों में भी इस योजना के तहत 300 मरीजों को डेढ़ लाख रुपये का उपचार नि:शुल्क दिया गया है। सितंबर से पेमेंट न होने पर सरकारी में भी इसके तहत उपचार बंद कर दिया गया है। हालांकि सरकारी अस्पताल में वैसे भी प्राथमिक उपचार की सुविधा नि:शुल्क होती है। जबकि लंबे समय से इस योजना के पोर्टल में भी बदलाव होने के कारण ठप पड़ा है।