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विधायक के घर चाय पीने पर बवाल, आपसी कहासुनी के बाद किसानों ने लगाए नारे

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किसानों ने मंगलवार गृह एवं स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज के निवास स्थान के बाहर भी प्रदर्शन किया। अंबाला शहर विधायक असीम गोयल को ज्ञापन देने के बाद किसान शास्त्री कॉलोनी में पहुंचे। किसानों ने एकजुट होते ही नारेबाजी शुरू कर दी। इस दौरान भारी पुलिस बल तैनात था।
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इस दौरान डीएसपी रामकुमार पहले ही किसानों के प्रधान मलकीत सिंह, उपप्रधान गुलाब सिंह के समक्ष हाथ जोड़कर खड़े हो गए। डीएसपी बोले कि मंत्री साहब तो हैं नहीं और नगर परिषद के ईओ अपूर्व चौधरी को मौके पर बुलाया गया है उन्हें ज्ञापन सौंप दें। इस पर किसानों ने ईओ को ज्ञापन सौंपा। बाद में किसानों ने कॉलोनी के बाहर ही खड़े होकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। किसानों का कहना था कि जो विधायक किसान से साथ खड़ा होगा, वही उनके गांवों में घुसेगा। 10 मार्च को विधानसभा में कांग्रेस अविश्वास प्रस्ताव पास करेगा। उसमें पता चल जाएगा कि कौन किसान के साथ है और कौन किसान के खिलाफ। करीब आधे घंटे के बाद किसान शंभू बॉर्डर पर चले गए।
किसान नेताओं को चाय पीने के लिए पीए करते रहे विनती
अंबाला शहर में चाय के पीछे ही असीम गोयल के निवास स्थान के बाहर ही किसानों के बीच आपसी कहासुनी हो गई थी। वहीं गृहमंत्री अनिल विज की कॉलोनी के बाहर भी चाय का मुद्दा उठा। ज्ञापन देने के बाद जब डीएसपी व ईओ मौके से चले गए। बाद में पीए अजय किसान नेताओं के पास पहुंचे और हाथ जोड़कर उनसे चाय पीने की बात कहते रहे। पीए बोले कि मंत्री अनिल विज ने खुद कहा कि किसानों को बिना चाय के नहीं भेजना। ऐसे में किसान बोले कि जब मंत्री जी होंगे वह तभी चाय पीने के लिए जा जाएंगे।
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उधर, सिटी विधायक के घर चाय पीने पर बवाल
अविश्वास प्रस्ताव में समर्थन के लिए ज्ञापन देने पहुंचे थे किसान, आपस में ही हो गई बहस
अंबाला सिटी। अविश्वास प्रस्ताव के समर्थन में विधायक असीम गोयल को ज्ञापन सौंपने के लिए किसान मंगलवार को अंबाला शहर के विधायक असीम गोयल के आवास स्थान पर पहुंचे और उनके प्रतिनिधि रितेश गोयल को ज्ञापन सौंपा। इस दौरान तक पूरा कार्यक्रम शांतिपूर्ण तरीके से चला। लेकिन इसके बाद जमकर बवाल हुआ।
दरअसल ज्ञापन देने आए किसानों को रितेश गोयल ने सत्कार की भावना से चाय-पानी लेने का आग्रह किया। इसे किसान नेताओं ने सहर्ष स्वीकार किया। लेकिन जैसे ही सभी भाकियू पदाधिकारी कोठी पर गए तो किसान जयसिंह ने जमकर हंगामा। उन्होंने कहा कि इन्हीं की पार्टी की वजह से आज हमारे 200 से अधिक किसान अपनी जान गंवा चुके हैं। हम किसान ही अब इनके घर का चाय-पानी पी रहे हैं। मामला बढ़ता देख भाकियू पदाधिकारी कोठी से बाहर आ गए। यहां तक की एक दो बार जिला प्रधान व ब्लॉक प्रधान के साथ किसानों की काफी बहस भी हुई। लेकिन अन्य किसानों ने बीचबचाव करते हुए स्थिति को संभाला। करीब आधा घंटा तक चले इस हंगामे के बाद किसान गृह मंत्री को ज्ञापन देने के लिए विधायक की कोठी से रवाना हुए।
किसानों ने कहा कि अगर विधायक किसानों के समर्थन में वोट करते हैं तो किसानों की ओर से उन्हें पूरा मान सम्मान दिया जाएगा। अगर वह विरोध में वोट देते हैं तो वह किसी भी गांव में कार्यक्रम नहीं कर सकेंगे। उनका गांव में प्रवेश से पहले ही पूरा विरोध किया जाएगा।
जिस किसान ने हंगामा किया उसका भाकियू में कोई पद नहीं है। अब किसानों में भाजपा को लेकर गुस्सा तो है ही, इसी कारण ऐसा हुआ। कुल मिलाकर हमारा कार्यक्रम पूरी तरह से सफल रहा है।
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- मलकीत सिंह, जिला प्रधान, भाकियू।
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