अंबाला। शंभू पर पुलिस की तरफ से मोर्चे पर तैनात डीएसपी रामकुमार का अलग ही अंदाज दिखा। वह किसानों के पास लंगर लेकर शांति से वहीं बैठने की बात कहते नजर आए। कभी फूलों की वर्षा तो कभी सतनाम वाहेगुरू नाम का जाप कर किसानों को हैरत में डालते दिखे। इसके बाद डीएसपी ने मीडिया कर्मियों को बुला लिया और यह तक कह दिया कि वह शहीद होने नहीं आए हैं। किसान अनुमति दिखा दें तो वह हाथों पर बैठाकर फूलों की वर्षा करते हुए उन्हें लेकर जाएंगे।
इस प्रतिक्रिया के बाद डीएसपी बैरिकेडिंग पर लगी छत पर चढ़ गए और किसानों की तरफ देखकर बार-बार हाथ पैर जोड़ने लगे। इस दौरान कई बार पीछे खड़े उनके साथ पुलिस अधिकारी उन्हें रोक रहे थे मगर डीएसपी बिना रुके एक के बाद एक प्रतिक्रिया देते दिखाई। हाथ पैर जोड़ने के बाद डीएसपी एक पाइप लेकर खड़े हो गए जिससे पानी छोड़ने के लिए अपने अधीनस्थों को कहने लगे मगर जब किसी ने पानी नहीं छोड़ा तो वह पाइप को वहीं छोड़कर वापस लौट गए।
डीएसपी बोले यहां नशेड़ी आ रखे हैं
डीएसपी रामकुमार ने कहा कि आपके परिवार पर हमला होगा तो आप क्या करेंगे। किसान और पुलिस दोनों मेरा परिवार हैं। मैं हाथ जोड़ रहा हूं, चाय पिला रहा हूं यह सिर्फ दिखाने के लिए नहीं कर रहा हूं। मैं चाहता हूं कि किसी चीज का शांतिपूर्ण तरीके से हल निकले, आप हमारे साथ संघर्ष न करो। मैंने पंधेर से भी मीटिंग की। उनसे भी कहा कि ऐसा काम न करो कि आपके ऊपर बल प्रयोग करना पड़े।
उन्होंने कहा कि हम नहीं जाने दे रहे तो बैठ जाओ। आप अनुमति दिखा दो। हमारे ऊपर क्यों हमला किया जा रहा है। पत्थर फैंके गए, जाली तोड़ी गई। यहां कई नशेड़ी आ रखे हैं। क्या इतनी फोर्स का प्रयोग बनता था। हम भी किसान के बेटे हैं मगर हम यहां शहीद होने बिल्कुल नहीं आए हैं हमारे भी परिवार हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह भाले, बरछे और पिस्तौल तक लेकर आए हैं। अपनी नौकरी, अपनी सरकार या देश के ऊपर आंच आएगी तो हम शहीद होने को भी तैयार हैं।
नेता बलदेव सिंह जीरा पर लगाए उकसाने के आरोप
डीएसपी ने पत्रकारों के पूछने पर कहा कि इस आंदोलन में बलदेव सिंह जीरा सबसे उग्र हैं। वह पत्थर मरवाने वाला है, जाली में कुंडा मरवाने वाला है, जीरा महत्वाकांक्षी है। उसकी मंशा शांतिपूर्ण धरने की नहीं थी। दिल्ली जाने के प्रश्न पर डीएसपी बोले कि क्या यह भारत से भी बड़े हैं कि जानकारी नहीं देंगे। किसान अनुमति लें और आगे जाएं।